ओमिक्रॉन
ओमिक्रॉन (Omicron) ग्रीक वर्णमाला का 15वां अक्षर है (15th letter of the Greek Alphabet). इसे फोनीशियन लेटर अयिन से लिया गया है (Phoenician Letter Ayin): प्राचीन ग्रीक में, ओमिक्रॉन ओमेगा के विपरीत ध्वनि ‘ओ’ को प्रतिनिधित्व करता था. आधुनिक ग्रीक में, ओमिक्रॉन और ओमेगा दोनों बीच के स्वर ‘ओ’ का प्रतिनिधित्व करते हैं. ओमिक्रॉन से निकलने वाले अक्षरों में रोमन ओ और सिरिलिक ओ शामिल हैं. शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘लिटिल ओ’ (Meaning of Omicron). ग्रीक अंकों की प्रणाली में, ओमिक्रॉन का मान 70 होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) COVID-19 का कारण बनने वाले वायरस SARS CoV 2 के विभिन्न रूपों का वर्णन करने के लिए ग्रीक वर्णमाला का उपयोग करता है. 26 नवंबर, 2021 को, कोविड के B.1.1.1.529 वेरिएंट को ओमिक्रॉन नाम दिया (Omicron assigned to Covid-19 B.1.1.529 Variant).
एक वर्णमाला पत्र के रूप में ओमिक्रॉन का उपयोग सीमित है क्योंकि अपर केस और लोअर केस, दोनों में इसे लैटिन अक्षर ‘ओ’ से अलग करना असंभव है. इसमें हिंदू-अरबी अंक ‘शून्य’ से अंतर करना भी मुश्किल है (Omicron Resembles Hindu-Arabic Zero).
पॉल बैचमैन ने 1894 में बिग-ओ सिम्बॉल की शुरुआत की, जिसे 1909 में एडमंड लैंडौ ने लोकप्रिय बनाया, लेकिन इन दोनों ने कभी भी इसे ओमिक्रॉन नहीं कहा. यानी ओमिक्रॉन शब्द का प्रयोग सिर्फ एक बार नुथ के पेपर में हुआ था (Omicron in Mathematics).
ओमिक्रॉन का उपयोग एक तारामंडल समूह में पंद्रहवें तारे के नाम के रूप में किया जाता है. इस तरह के तारों में ओमिक्रॉन एंड्रोमेडे, ओमाइक्रोन सेटी और ओमिक्रॉन पर्सी शामिल हैं (Omicron in Astronomy).
ओमिक्रॉन के माध्यम से एक खाली संख्या सेल को दिखाया जाता है. आधुनिक तालिकाओं में रिक्त कोशिकाओं को डैश से भरा जाता है. एक ओमिक्रॉन और एक डैश दोनों का अर्थ खाली सेल यानी रिक्त कोशिका माना जाता है (Omicron Represents Empty Number Cell). संयोग से, प्राचीन शून्य-मान ओमिक्रॉन एक आधुनिक हिंदू-अरबी शून्य (0) जैसा दिखता है.
तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन कोरोना हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा है. जाते-जाते फिर लौटकर आ जा रहा है. इसकी एक वजह है वायरस का लगातार म्यूटेट होना और इस कारण इसके नए-नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं. ऐसे में जानिए कोरोना वायरस, म्यूटेशन, वैरिएंट से जुड़े सभी सवालों के जवाब...
देशभर में कोरोना अब विकराल रूप धारण करने लगा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले आंकड़े के मुताबिक पिछले 24 घंटे में देशभर में कोविड-19 के 10158 नए केस दर्ज किए गए हैं. वहीं राजधानी दिल्ली में बुधवार को कोरोना के 1149 नए मामले दर्ज किए गए थे. संक्रमण की दर 23.8% हो गई है. जबकि कोविड से 1 मरीज की मौत भी हुई थी.
XBB.1.16 कोरोना के सब वैरिएंट ओमिक्रॉन का वैरिएंट है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, XBB.1.16, XBB.1.5 से अधिक तेजी से फैल सकता है. यह XBB.1.5 की तुलना में कहीं अधिक आक्रामक है. हालांकि, कोरोना के नए वैरिएंट के लक्षण पहले की तरह ही हैं.
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ही एक डराने वाली बात सामने आई है. ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट XBB.1.16 में म्यूटेशन हो गया है और अब इसका एक और नया सब-वैरिएंट XBB.1.16.1 सामने आ गया है.
कोरोना की रफ्तार एक बार फिर डराने लगी है. 24 घंटे में देशभर में कोरोना के करीब आठ हजार नए मामले सामने आए हैं. इस बीच ओमिक्रॉन का एक और नया सब-वैरिएंट XBB.1.16.1 मिला है. ऐसे में जानिए ये सब-वैरिएंट क्या है और कितना खतरनाक है?
भारत में कोरोना की रफ्तार थमी भी नहीं थी कि कुछ ही महीनों के अंतराल में नए वैरिएंट ने फिर से जनता और सरकारों को टेंशन देना शुरू कर दिया है. दिल्ली में संक्रमण दर 18.59% हो गया है. मुंबई से लेकर छत्तीसगढ़ के शहरों तक कोरोना कोहराम मचाने लगा है.
साइंस जर्नल लैंसेट में छपी स्टडी में बूस्टर डोज सुरक्षित साबित हुई है. ये स्टडी इजरायल के रिसर्चर्स ने की थी. इसके लिए स्मार्टवॉच की मदद ली गई. पांच हजार लोगों पर हुई स्टडी में सामने आया कि बूस्टर डोज सुरक्षित है. ये स्टडी कैसे हुई? और क्या-क्या सामने आया? पढ़ें...
Coronavirus in India: भारत के लिए अगले 40 दिन बहुत गंभीर हैं, क्योंकि जनवरी में कोरोना की चौथी लहर आ सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूर्वी एशिया में मामले बढ़ने के 30-35 दिन बाद भारत में नई लहर आ जाती है. पढ़ें- पिछली तीन लहरें कैसे आई थीं और क्यों इस बार भी वैसा ही ट्रेंड दिख रहा है.
चीन, अमेरिका और जापान समेत कई देशों में कोरोना की नई लहर आ गई है. वहां संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. भारत में फिलहाल संक्रमण काबू में है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हफ्तेभर में नए मामलों में 14 फीसदी का उछाल आया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत में चौथी लहर शुरू हो गई है?
चीन में कोरोना के कहर ने तबाही मचा रही है. ऐसे में चीन में रह रहे एक भारतीय डॉक्टर ने वहां की वास्तविक स्थिति से वाकिफ कराते हुए पुष्टि की कि वहां रोजाना की दर से 10 लाख केस सामने आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि यहां हालात इतने खराब है कि अस्पतालों में बेड कैपेसिटी बढ़ाने की लगातार कोशिश की जा रही है.
चीन में एक ओर कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, दूसरी ओर वहां सारी पाबंदियां और सख्तियां हटने जा रहीं हैं. चीन में 8 जनवरी से सबकुछ खोल दिया जाएगा. चीन आने वाले यात्रियों को क्वारनटीन भी नहीं रहना होगा. इससे दुनिया के सामने फिर से वही संकट खड़ा होता दिख रहा है, जैसा तीन साल पहले हुआ था.
चीन में कोरोना की विस्फोटक स्थिति के मद्देनजर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को पहली बार बयान दिया. उन्होंने कहा कि लोगों की जिंदगी बचाने की दिशा में कदम उठाएं जाएंगे. जिनपिंग ने कहा कि हमें कोरोना से निपटने के लिए एक देशभक्तिपूर्ण हेल्थ कैंपेन शुरू करना चाहिए. कोरोना से बचाव के लिए कम्युनिटी स्ट्रक्चर को मजबूत करना होगा ताकि लोगों की जिंदगियां बचाई जा सके.
कोरोना की नई लहर के खतरे के बीच भारत में अब जल्द ही नाक से दी जाने वाली कोविड वैक्सीन को प्रयोग में लाया जाएगा. इस वैक्सीन का नाम iNCOVACC है, जिसे भारत बायोटेक ने बनाया है. इस वैक्सीन का इस्तेमाल बूस्टर डोज के तौर पर होगा. ऐसे में जानना जरूरी है कि वैक्सीन कितनी सेफ है? कौन लगवा सकता है? और इसमें बाकी वैक्सीन से क्या अलग है?
चीन में एक बार फिर कोरोना से तबाही जारी है. अस्पतालों में जगह नहीं बची है. मुर्दाघरों और श्मशान के बाहर कतारें लगीं हैं. इन सबके बीच अब महामारी विशेषज्ञ जो अनुमान लगा रहे हैं, वो और डराते हैं. इन अनुमानों के मुताबिक, चीन में अभी कोरोना की सुनामी आने वाली है. अनुमान है कि तीन महीनों में चीन की 60 फीसदी आबादी संक्रमित हो सकती है.
कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसों को देखते हुए 27 दिसंबर को मॉकड्रिल की जाएगी. इस दौरान कोविड की तैयारियों को परखा जाएगा. कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ मीटिंग हुई है. साथ ही हमने लोगों से अधिक सतर्क रहने और जल्द से जल्द बूस्टर डोज लगवाने की अपील की है.
चीन से निकला कोरोना एक बार फिर तबाही मचाने लगा है. चीन में कोरोना की अब तक की सबसे बड़ी लहर आई है. इससे दुनिया पर फिर से नया संकट मंडराने लगा है. कोरोना तीन साल से हमारे बीच में है और अभी इसके जाने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है. ऐसे में जानना जरूरी है कि तीन साल में कोरोना ने हमें क्या-क्या दिखाया और आगे क्या बाकी है?
चीन में कोरोना से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. वहां कोरोना की अब तक की सबसे बड़ी लहर आई है. संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और मौतें भी हो रहीं हैं. हालांकि, चीन के आधिकारिक आंकड़ों में संक्रमण की संख्या बेहद कम है और मौतें तो वो बता ही नहीं रहा. चीन में कहां-कहां बढ़ रहा है कोरोना? वहां कैसे हैं हालात?
चीन में ओमिक्रॉन का सबवेरिएंट BF.7 कहर बरपा रहा है. चीन की राजधानी बीजिंग में 70 प्रतिशत लोग इस वेरिएंट की चपेट में आ चुके हैं. लेकिन जो खतरा सबसे बड़ा है वो ये कि चीन के अलावा, अब ये वेरिएंट, जापान, ब्राजील, दक्षिण कोरिया से लेकर अमेरिका तक फैल रहा है. देखें ये पूरी रिपोर्ट.
चीन में कोरोना से तबाही जारी है. वहां ओमिक्रॉन का BF.7 वैरिएंट मामले बढ़ा रहा है. भारत में भी इस वैरिएंट के चार मामले सामने आ चुके हैं. सरकार ने वैरिएंट की पहचान करने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग बढ़ाने को कहा है. जानें- जीनोम सिक्वेंसिंग से वैरिएंट का पता कैसे चलता है और भारत में इसकी क्या व्यवस्था है?
चीन की वजह से दुनिया में एक बार फिर से कोरोना का नया संकट खड़ा हो गया है. चिंता बढ़ाने वाली बात ये है कि चीन अभी भी आंकड़े छिपा रहा है. इससे डर है कि फिर से पूरी दुनिया ठप न हो जाए. पढ़ें- तीन साल में कोरोना पर चीन की वो करतूतें जिसका अंजाम अभी तक दुनिया भुगत रही है.
डब्ल्यूएचओ ने चीन को एक तरह से आगाह भी किया है कि जिस तरह से चीन वैक्सीनेशन में मुंह की खा रहा है, ऐसे में बड़ी संख्या में उनके लोग कोरोना की चपेट में आ सकते हैं. डब्ल्यूएचओ का मानना है कि चीन को अधिक जोखिम भरे इलाकों में लोगों की वैक्सीनेशन पर अधिक जोर देना चाहिए.