ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में स्थित एक कॉलेजिएट रिसर्च यूनिवर्सिटी है (Oxford University Location). यहां साल 1096 से पढ़ाए जाने के प्रमाण मिलते है. यह अंग्रेजी बोलने वाली दुनिया का दूसरा सबसे पुराना विश्वविद्यालय है. यह लगातार ऑपरेशनल रहने वाली दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी है (World's Second-Oldest University in Continuous Operation). ऑक्सफोर्ड को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गिना जाता है.
यह यूनिवर्सिटी 39 अर्ध-स्वायत्त कॉलेजों, 6 स्थायी निजी हॉल और शैक्षणिक विभागों की एक सीरीज से बना है जो चार विभागों में बंटा हुआ है. इस विश्वविद्यालय के सभी कॉलेज स्वशासी संस्थान हैं. इसके तमाम कॉलेज अपनी सदस्यता और अपनी आंतरिक संरचना और गतिविधियों को खुद नियंत्रित करते हैं. सभी छात्र एक कॉलेज के सदस्य हैं. इसका कोई मुख्य परिसर नहीं है, और इसकी इमारतें और सुविधाएं पूरे शहर में फैली हुई हैं (Oxford University Structures). ऑक्सफोर्ड में स्नातक शिक्षण में लेक्चर, छोटे समूह के ट्यूटोरियल, सेमिनार और प्रयोगशाला कार्य शामिल हैं. यहां जरूरत के मुताबिक एक्स्ट्रा ट्यूटोरियल भी दिए जाते हैं. स्नातकोत्तर शिक्षण मुख्य रूप से केंद्रीय स्तर पर दिया जाता है (Oxford University Teaching).
ऑक्सफोर्ड दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालय संग्रहालय को संचालित करता है (Oxford University Museum). साथ ही, यहां दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय प्रेस है (Oxford University Library) और यह देश के सबसे बड़े एकेडमिक लाइब्रेरी सिस्टम को ओपरेट करता है (Oxford University Library System). 31 जुलाई 2019 को, इस विश्वविद्यालय की कुल आय 2.45 बिलियन पाउंड थी, जिसमें से 624.8 मिलियन पाउंड रिसर्च ग्रांट और कॉन्ट्रैक्ट से मिला था (Oxford’s Endowment).
ऑक्सफोर्ड ने कई महत्वपूर्ण पूर्व छात्रों को शिक्षित किया है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम के 28 प्रधानमंत्री और दुनिया भर के कई राष्ट्राध्यक्ष और सरकार शामिल हैं. अक्टूबर 2020 तक, 72 नोबेल पुरस्कार विजेता, 3 फील्ड मेडलिस्ट, और 6 ट्यूरिंग अवार्ड विजेताओं ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई, काम या विजिटिंग फेलोशिप की है. इसके पूर्व छात्रों ने 160 ओलंपिक पदक विजेता भी हैं (Notable Oxford alumni, faculty, and researchers).
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और गेट्स फाउंडेशन की यह स्टडी सोमवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु द्वारा आयोजित एक सेमिनार में रिलीज की गई. इस सेमिनार में एकेडमिक, पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के लीडर्स ने चर्चा की कि डिजिटल गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को कैसे बदल सकता है.
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था. ब्रिटेन की एक प्रमुख कानूनी फर्म ने बताया कि चूंकि वे जेल में हैं, इसलिए यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार वे ऑक्सफोर्ड चांसलर पद के लिए अयोग्य हैं.
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के लिए ये करियर का तीसरा विकल्प हो सकता है. लेकिन ये चुनाव आसान नहीं है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चांसलर पद के लिए उनके खिलाफ टक्कर में हैं ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और बोरिस जॉनसन. फिर भी अगर इमरान खान जीतते हैं तो क्या वे पाकिस्तान की राजनीति से एग्जिट होना चाहेंगे?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट और उसमें भी नेता बन चुके पूर्व छात्रों की चांसलर पद पर चुनाव लड़ने का मौका दिया जाता है. इमरान खान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट हैं. उन्होंने 1972 में यूनिवर्सिटी के केबर कॉलेज से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिक्स की पढ़ाई की थी.
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने कहा, "पाकिस्तान के राष्ट्रीय नायक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, एक महान क्रिकेटर और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र, जेल में रहते हुए विश्वविद्यालय के चांसलर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं."
इमरान खुद ऑक्सफोर्ड ग्रैजुएट हैं. वह 1972 में यूनिवर्सिटी के केबर कॉलेज से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिक्स की पढ़ाई कर चुके हैं. वह 2005 से 2014 तक ब्रैडफोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर पद पर भी रह चुके हैं.
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला ने कहा, "मलेरिया के बोझ को कम करना आखिरकार नजर में आ गया है. ऑक्सफोर्ड और नोवावैक्स (Novavax) में हमारे पार्टनर्स के साथ सालों के अविश्वसनीय काम के बाद आज R21/Matrix-M™ वैक्सीन रोल-आउट की शुरुआत एक मील का पत्थर है."
भारत सरकार ने तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई कांस्य मूर्ति के लिए ब्रिटेन के संग्रहालय को फॉर्मल रिक्वेस्ट भेजा था, जो नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक संग्रहालय में पहुंची थी.
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. इसे बनाने वाली एस्ट्राजेनेका ने यूके( यूनाइटेड किंगडम) हाईकोर्ट में दिए गए अपने अदालती दस्तावेजों में पहली बार माना है कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन से TTS जैसे दुर्लभ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.
दुनियाभर के कई देशों में मलेरिया का कहर बढ़ने के बाद डीसीजीआई ने मलेरिया वैक्सीन की दो लाख डोज के ब्रिटेन में निर्यात को मंजूरी दे दी है. इस वैक्सीन को भारत में ही तैयार किया गया है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह के डीसीजीआई को लिखे गए पत्र के बाद यह कदम उठाया गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में मलेरिया से हर साल 2,05,000 मौतें होती हैं. इस घातक बीमारी की मार सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ती है. 55,000 बच्चे जन्म के कुछ ही साल में दम तोड़ देते हैं. 30 हजार बच्चे 5 से 14 साल के बीच मलेरिया से दम तोड़ते हैं. 15 से 69 साल की उम्र के 1,20,000 लोग भी इस बीमारी से बच नहीं पाते हैं. आम तौर पर मलेरिया संक्रमित मच्छर के काटने से होता है. इस बीमारी की वजह से हर साल दुनियाभर में करीब 400000 लोग मारे जाते हैं.