पेगासस, स्पाइवेयर
पेगासस (Pegasus) इजरायली साइबरआर्म्स कंपनी NSO Group (Niv, Shalev and Omri) द्वारा विकसित स्पाइवेयर है. इसे आईओएस और एंड्रॉइड मोबाइल फोन में गुप्त रूप से इंस्टॉल किया जा सकता है (iOS and Android). 2021 अंतरराष्ट्रीय जांच प्रोजेक्ट पेगासस (Project Pegasus) के मुताबिक पेगासस आईओएस के सभी संस्करणों पर काम कर सकता है. 2022 तक, पेगासस टेक्स्ट मैसेज पढ़ने, कॉल ट्रैक करने, पासवर्ड इकट्ठा करने, लोकेशन ट्रैकिंग, टारगेट डिवाइस के माइक्रोफोन और कैमरा तक पहुंचने और ऐप्स से जानकारी प्राप्त करने में सक्षम था (Text messages, Tracking calls, Collecting passwords, Location tracking).
इस स्पाइवेयर का नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं के पंखों वाले घोड़े पेगासस के नाम पर रखा गया है (Named after winged horse of Greek mythology, Pegasus). यह एक ट्रोजन हॉर्स कंप्यूटर वायरस है जिसे सेल फोन को संक्रमित करने के लिए भेजा जा सकता है (Trojan horse computer virus).
पेगासस की खोज अगस्त 2016 में हुई थी, जब एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के आईफोन पर एक असफल इंस्टॉलेशन का प्रयास किया गया था (Discovered in August 2016). जांच के दौरान इस स्पाइवेयर की क्षमताओं और इससे सुरक्षा में लगने वाली सेंध के बारे में जानकारी मिली. स्पाइवेयर की खबर का जबरदस्त मीडिया कवरेज हुआ. इसे अब तक का "सबसे परिष्कृत" स्मार्टफोन हमला कहा गया था. ऐसा पहली बार हुआ था कि एक दुर्भावनापूर्ण रिमोट कंट्रोल ने आईफोन तक पहुंच हासिल करने के लिए जेलब्रेकिंग (Jailbreaking) का इस्तेमाल किया.
23 अगस्त, 2020 को, हारेत्ज (Haaretz) को मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, एनएसओ समूह ने पेगासस को संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी राज्यों को सैकड़ों मिलियन अमेरिकी डॉलर में बेच दिया. यह खरीद-बिक्री शासन विरोधी कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और प्रतिद्वंद्वी देशों के राजनीतिक नेताओं की निगरानी करने के लिए की गई. इसके लिए इजरायल सरकार ने दोनों पक्षों को प्रोत्साहित किया और मध्यस्थता भी की. प्रोजेक्ट पेगासस के व्यापक मीडिया कवरेज के साथ-साथ मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने भी इसका गहन विश्लेषण किया. जुलाई 2021 में पता चला कि पेगासस का अभी भी हाई-प्रोफाइल लक्ष्यों के खिलाफ व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा था. इससे पता चला कि पेगासस आईओएस 14.6 तक के सभी आधुनिक आईओएस संस्करणों को जीरो-क्लिक iMessage के माध्यम से संक्रमित करने में सक्षम था.
Pegasus Spyware बनाने वाली कंपनी NSO ग्रुप को बड़ा झटका लगा है. कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट ने NSO ग्रुप को आदेश दिया है कि वो वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta से तमाम डिटेल्स शेयर करेगी. कंपनी पेगासस और दूसरे स्पाईवेयर को लेकर डिटेल्स शेयर करेगी, जिनका असर वॉट्सऐप यूजर्स पर पड़ा था. आइए जानते हैं इस मामले की पूरी डिटेल.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कुछ देर पहले मुझे झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने फोन किया था और कहा था कि किस तरह केंद्रीय एजेंसियां उन्हें परेशान कर रहीं हैं.
दुनियाभर में शायद ही किसी स्पाईवेयर की इतनी चर्चा हुई हो, जितनी Pegasus की हुई. इस स्पाईवेयर को इजरायल के NSO ग्रुप में तैयार किया था और इसका इस्तेमाल दुनियाभर में लोगों की जासूसी के लिए हुआ था.प
राहुल गांधी ने लंदन में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में आरोप लगाया कि भारत में बड़े पैमाने पर विपक्षी नेताओं की जासूसी की गई और इसके लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके फोन में भी पेगासस था. राहुल गांधी के आरोप कितने सच्चे और कितने झूठ हैं? देखें विश्लेषण.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पेगासस को लेकर बड़ा दावा किया है. राहुल गांधी ने दावा किया है कि उनके फोन में पेगासस सॉफ्टवेयर था और अफसरों ने सलाह दी थी को फोन पर संभलकर बात करें क्योंकि उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है. पेगासस का पूरा मामला क्या है? ये जासूसी सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है? जानिए...
What is Pegasus: दुनियाभर में शायद ही किसी स्पाईवेयर की इतनी चर्चा हुई हो, जितनी Pegasus की हुई. इस स्पाईवेयर को इजरायल के NSO ग्रुप में तैयार किया था और इसका इस्तेमाल दुनियाभर में लोगों की जासूसी के लिए हुआ था. अगस्त 2016 में ये स्पाईवेयर पहली बार सामने आया और फिर इस पर हड़कंप मच गया. आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें.
राहुल गांधी ने कैम्ब्रिज में अपने संबोधन में कहा, भारत में लोकतंत्र खतरे में है. हम लोग एक निरंतर दबाव है महसूस कर रहे हैं. विपक्षी नेताओं पर केस किए जा रहे हैं. मेरे ऊपर कई केस किए गए. ऐसे मामलों में केस किए गए, जो बनते ही नहीं. हम अपना बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं.
इजराइल की जासूसी फर्म पर दुनिया के 30 से अधिक देशों के चुनावों में दखल देने का आरोप है. टीम जॉर्ज के अधिकारियों ने यह कबूल किया है कि उन्होंने हैकिंग के जरिए दुनियाभर के 30 देशों के चुनावों में हस्तक्षेप किया है. हैकिंग,साइबर जासूसी, फेक न्यूज और ट्रॉल आर्मीज के बूते चुनावों को प्रभावित किया गया.
इजराइल की जासूसी फर्म की टीम पर दुनिया के 30 से अधिक देशों के चुनावों में दखल देने का आरोप है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली फर्म एक सॉफ्टवेयर के जरिए भारत समेत कई देशों में फेक सोशल मीडिया कैंपेन चला रहा है.
Pegasus केस में WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta की बड़ी जीत हुई है. अब पेगासस बनाने वाली इजरायली कंपनी NSO Group पर केस चलेगा. इसकी मंजूरी अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है. WhatsApp का आरोप है Pegasus ने ऐप की खामी का फायदा उठाकर लोगों के फोन में स्पाई या जासूसी सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया. इससे 1400 लोगों की जासूसी की गई. इसमें पत्रकार समेत दूसरे लोग शामिल थे.
Spyware Company: Pegasus के बाद अब जासूसी सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी Intellexa भी चर्चा में आ गई है. ये कंपनी दावा करती है कि ये Android और iOS दोनों फोन को हैक कर सकती है. हालांकि, इसका यूज करने की कीमत काफी ज्यादा है. इसके बाद से इस जासूसी कंपनी को लेकर काफी विवाद हो रहा है.
आज सुप्रीम कोर्ट में पेगासस मामले में टेक्निकल कमेटी द्वारा दायर की गई रिपोर्ट पर सुनवाई हुई. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कमेटी को 29 मोबाइल फोन दिए गए थे, जिनमें से 5 में मैलवेयर है, लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि जासूसी की गई.
NSO Group के जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus का नाम आपने जरूर सुना होगा. ये अभी काफी ज्यादा चर्चा में था. कंपनी अभी भी विवादों में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के इस स्पाईवेयर का इस्तेमाल करके सरकार ने पत्रकारों और विपक्षी नेताओं पर नजर रखी. अब NSO Group के CEO Shalev Hulio अपना पद छोड़ दिया है.