पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया
द पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) भारत में एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है. 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में गठित किया गया था (Foundation of PFI), जो बाद में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट, मनीथा नीथी पासराय, कर्नाटक के साथ विलय हो गया. इस संगठन पर पर अक्सर राष्ट्र-विरोधी और असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाता रहा है.
राष्ट्रीय महिला मोर्चा (NWF) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) सहित समाज के विभिन्न वर्गों को पूरा करने के लिए इस संगठन के पास विभिन्न विंग हैं. केरल और कर्नाटक में अक्सर पीएफआई और संघ परिवार के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें होती रही हैं.
2012 में, केरल सरकार ने दावा किया कि पीएफआई "प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के एक अन्य रूप में पुनरुत्थान के अलावा कुछ नहीं है" जिसके बाद पीएफआई द्वारा आयोजित "फ्रीडम परेड" पर प्रतिबंध लगा दिया. उच्च न्यायालय ने सरकार के रुख को खारिज कर दिया, लेकिन राज्य सरकार के लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखा (PFI Banned by High Court).
पुलिस को कई बाग PFI कार्यकर्ताओं के पास से घातक हथियार, बम, बारूद, तलवारें मिली हैं. उन पर तालिबान और अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध होने के कई आरोप लगाए गए हैं (PFI linked with Taliban and Al-Qaeda).
पीएफआई केरल में 2006 में राष्ट्रीय विकास मोर्चा के उत्तराधिकारी के रूप में शुरू हुआ. यह कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी ऑफ कर्नाटक और तमिलनाडु में मनिथा नीथी पासराय और बाद में 2009 में गोवा के नागरिक फोरम, राजस्थान के सामुदायिक सामाजिक और शैक्षिक के साथ विलय हो गया. यह सक्रिय रूप से मुस्लिम आरक्षण, मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ कोर्ट, दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों के हितों और वंचित मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति की वकालत करता है (History of PFI). इस संगठन ने 26 और 27 नवंबर 2005 को हैदराबाद में मुस्लिम आरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्घाटन राज्यसभा सदस्य रहमान खान ने किया था (Rajya Sabha member Rahman Khan).
जांच में पता चला कि पीएफआई की खाड़ी देशों में व्यापक मौजूदगी है, जिसमें 13,000 से अधिक सक्रिय सदस्य हैं, जिनमें कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं. पीएफआई ने प्रवासी मुस्लिम समुदाय के लिए जिला कार्यकारी समितियां (DEC) बनाई थीं, जिनका उद्देश्य करोड़ों रुपये जुटाना था.
एनआईए ने इब्राहिम पुथनाथनी और कुछ अन्य पीएफआई नेताओं के खिलाफ यूएपीए के तहत एक आतंकी मामले में चार्जशीट दायर की है. उन्हें 2022 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था. एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये लोग कई राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भारत और विदेशों से फंड इकट्ठा कर रहे थे और साजिश रच रहे थे.
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों ने आपराधिक बल का इस्तेमाल करके सरकार को डराने के लिए समान विचारधारा वाले लोगों को अपने साथ शामिल होने के लिए उकसाया.
जेल में बंद अबुबकर ने ट्रायल कोर्ट द्वारा राहत से इनकार करने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उसने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करते हुए ट्रायल कोर्ट का रुख किया था. अबुबकर ने योग्यता और चिकित्सा दोनों आधारों पर अपनी रिहाई की मांग की थी. न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, "हम अपील को खारिज करते हैं."
सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित पीएफआई के कथित आठ सदस्यों की जमानत रद्द कर दी है. कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि है. किसी भी हिंसक या अहिंसक आतंकवादी कृत्य को प्रतिबंधित किया जा सकता है. इन पीएफआई सदस्यों पर देशभर में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की साजिश रचने का आरोप है.
पासपोर्ट कार्यालय ने मोहम्मद गौस को प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का संस्थापक सदस्य बताते हुए कहा था कि नया पासपोर्ट जारी करने से किसी दूसरे देश के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों पर असर पड़ सकता है.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को राजस्थान के कोटा में एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान शाह ने कहा कि अगर आपने 2019 में कांग्रेस को वोट दिए होते तो कोटा PFI का गढ़ बन जाता, नरेंद्र मोदी को वोट दिया तो PFI का सफाया हो गया. देखें ये वीडियो.
प्रतिबंधित संगठन के तीनों आरोपी सदस्यों को गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को राजधानी दिल्ली की एक विशेष अदालत में पेश किया गया. एजेंसी ने तीनों लोगों पर पीएफआई कैडर को हथियारों का प्रशिक्षण देने और इसके लिए प्रतिबंधित संगठन से पर्याप्त धन प्राप्त करने का आरोप लगाया है.
एनआईए ने प्रतिबंधित पीएफआई के सदस्य शफीक को पकड़ा है. वह 2022 में आरएसएस नेता श्रीनिवासन की हत्या के बाद से फरार था. इस हत्या के मामले में अब तक कुल 71 लोगों की पहचान की गई है.
साल 2016 में RSS लीडर रुद्रेश की बेंगलुरु में बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. NIA से वांटेड मोहम्मद गौस नयाजी RSS लीडर की हत्या करने के बाद भारत से फरार हो गया था और विदेश में अलग अलग जगहों पर ठिकाना बनाया हुआ था. RSS लीडर रुद्रेश की हत्या की जांच NIA कर रही है.
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कुछ लोगों को अरेस्ट करने के मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई है. ये चार्जशीट दिल्ली के पटियाला हॉउस कोर्ट में दाखिल की गई है. इस चार्जशीट में कई अहम खुलासे हुई हैं. बीजेपी और आरएसएस के नेताओं पर हमले के लिए लोगों को तैयार किया जा रहा था जिसका कोडवर्ड रिपोर्टर रखा गया था.
केरल में बीजेपी ओबीसी विंग के एक नेता की हत्या के मामले में कोर्ट ने 15 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. ये सभी दोषी प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी की PFI से जुड़े हुए हैं.
इंटरनल एग्जाम के क्वेश्चन पेपर में पैगंबर मोहम्मद के नाम का कथित तौर पर आपत्तिजनक तरीके से इस्तेमाल करने के आरोप में पीएफआई सदस्यों ने जोसेफ की दाहिनी हथेली काट दी थी और उनके बाएं पैर पर कुल्हाड़ी से हमला किया था. बाद में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में जोसेफ को कॉलेज से निकाल दिया गया था.
ED के मुताबिक, ये सभी आरोपी प्रतिबंधित संगठन PFI में अलग-अलग पदों पर थे, जो विदेश से हवाला के जरिये आए करोड़ों रुपये का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों में कर रहे थे. इनकी पहचान ई एम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, ए एस इस्माइल और मोहम्मद शफीक के रूप में हुई है.
श्रीनिवासन की टारगेट किलिंग से जुड़े जघन्य अपराध के बाद से सहीर के.वी फरार चल रहा था. पुलिस और तमाम एजेंसियां उसे तलाश कर रही थीं. पलक्कड़ के पट्टांबी का रहने वाला साहिर के.वी. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पट्टांबी क्षेत्र का सचिव है, जिसे इसी साल गिरफ्तार किया गया था.
केंद्र सरकार ने देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में पीएफआई को 5 साल के लिए बैन कर दिया था. केंद्र सरकार के इस फैसले को UAPA ट्रिब्यूनल ने बरकरार रखा था. पीएफआई ने UAPA ट्रिब्यूनल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया.
दिल्ली में थाना हौज काजी इलाके के बल्लीमारान में NIA की छापेमारी चल रही है. इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर छापेमारी की गई है. उधर, राजस्थान के टोंक समेत कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है. महाराष्ट्र और यूपी में भी NIA ने रेड डाली है. देखें 100 शहर 100 खबर.
MP News: गुना में PFI एजेंट मोहसिन कुरैशी को अनैतिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया था जिसके चलते एटीएस की टीम ने मोहसिन को गिरफ्तार किया था. फिलहाल मोहसिन भोपाल के सेंट्रल जेल में बंद है.
MP News: अब ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर पीएफआई सदस्य मोहसिन के फोटो वाले बैनर गुना शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए जाने के बाद हलचल मच गई है. हालांकि, सूचना मिलने पर सतर्कता बरतते हुए प्रशासन ने कुछ घंटों बाद ही बैनर उतरवा दिए.
पुलिस ने पीएफआई की राजनीतिक विंग से जुड़े 9 पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है. अरेस्ट लोगों पर धारा 144 का उलंघन करने का आरोप है. इस मीटिंग में करीब 48 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. बता दें कि एसडीपीआई को PFI का राजनीतिक संगठन माना जाता है, लेकिन फिलहाल इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
बहराइच में एक होटल के अंदर मीटिंग कर रहे SDPI से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की गई है. पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन में 9 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की है. बता दें कि प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़ी दूसरी विंग एसडीपीआई के पदाधिकारी वहां बैठक कर रहे थे.