पितृ पक्ष
पितृ पक्ष (Pitru Paksha) हिंदू कैलेंडर में 16-चंद्र दिनों की अवधि होती है. इस अवधि में हिंदू अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं (Pay Homage to Ancestors in Pitru Paksha). भारत में इसे अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे पितृ पोक्खो, सोरा श्राद्ध, कनागत, महालय, अपरा पक्ष और अखाडपाक, पितृ पांधारवड़ा.
पितृ पक्ष के दैरान हिंदुओं में शुभ कार्य नहीं किया जाता है. इस समय के दौरान किए गए मृत्यु संस्कार को श्राद्ध या तर्पण के रूप में जाना जाता है. दक्षिणी और पश्चिमी भारत में भाद्रपद, सितंबर महीने के हिंदू चंद्र महीने के दूसरे पक्ष में पड़ता है और गणेश उत्सव के तुरंत बाद पखवाड़े के बाद आता है. यह प्रतिपदा से शुरू होता है. यह अमावस्या के दिन समाप्त होता है जिसे सर्वपितृ अमावस्या, पितृ अमावस्या, पेड्डला अमावस्या, महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. पितृ पक्ष की समाप्ति और मातृ पक्ष की शुरुआत को महालय कहा जाता है (Pitru Paksha for 16 Lunar Days).
अधिकांश वर्षों में, इस अवधि के दौरान सूर्य उत्तरी से दक्षिणी गोलार्ध की ओर दिशा बदलता है.
पितृ पक्ष में लोग पितरों की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराते है और कुछ परिवार भागवत पुराण और भगवद गीता धर्मग्रंथों का अनुष्ठान भी कराते हैं. कई स्थानों पर साथ ही, पूर्वजों की भलाई के लिए प्रार्थना करने के लिए पुजारियों को उपहार भेंट करने की भी परंपरा है (Pitru Paksha, Conduct Ritual Recitals).
Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और ये अमावस्या तिथि तक रहता है. पितृपक्ष के दिनों में वातावरण अत्यंत सादा और सात्विक होता है. ब्राह्मण भोजन से लेकर विशेष पूजन से लेकर ब्राह्मण भोजन की परंपरा वाला श्राद्ध तब तक अधूरा है जब तक कि पंचबलि न की जाए. तो आइए जानते हैं कि पंचबलि क्या होता है.
Pitru Paksha 2024: पितृदोष के कारण व्यक्ति को हमेशा मानसिक परेशानी की समस्या रहती है. पारिवारिक संतुलन नहीं बैठ पाता है. पैसा कमाने के बाद भी घर में बरकत नहीं हो पाती है. स्वयं निर्णय लेने में बहुत परेशानी होती है.
Pitru Paksha 2024: पितरों का श्राद्ध करने के लिए बिहार के गया जिले की धरती को सबसे उत्तम माना गया है. ऐसी मान्यताएं कि भगवान श्रीराम के पिता राजा दशरथ का श्राद्ध भी गया की पवित्र धरती पर ही किया गया था.
Pitru Paksha 2024: गया में करीब 54 पिंडवेदी और 53 ऐसे स्थल हैं, जहां पितरों के लिए पिंडदान किया जाता है. लेकिन गया का जनार्दन मंदिर वेदी पूरी दुनिया में इकलौता ऐसा स्थल है, जहां आत्मश्राद्ध यानी जीते जी खुद का पिंडदान किया जाता है. यह मंदिर गया में भस्मकूट पर्वत पर मां मंगला गौरी मंदिर के उत्तर में स्थित है.
Pitru Paksha 2024: क्या आप जानते हैं कि हॉलीवुड का एक दिग्गज एक्टर भी अपने मृत बेटे की आत्मा की शांति के लिए उसका श्राद्ध कर चुका है. इतना ही नहीं, एक्टर ने अपने बेटे का श्राद्ध हरिद्वार में पूरे विधि-विधान के साथ किया था.
इस दिन उन पितरों को तर्पण दिया जाता है जिनका तिथि अनुसार श्राद्ध न हो पाया हो. इसलिए इसे "सर्वपितृ" अमावस्या कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
चतुर्दशी तिथि में उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो. यानी जिन लोगों की मृत्यु अप्राकृतिक कारणों जैसे दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या या किसी अनहोनी के चलते हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी पर होता है.
Trayodashi Shradh 2024: आज श्राद्ध पक्ष की त्रयोदशी तिथि है. इस तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि पर हुई. त्रयोदशी या अमावस्या के दिन मृत बच्चों का श्राद्ध भी उपयुक्त बताया गया है.
Magha Shraddh 2024: पितृ पक्ष में मघा श्राद्ध की तिथि सबसे खास मानी जाती है. ज्योतिष शास्त्र में मघा श्राद्ध दसवां नक्षत्र होता है. पितृ पक्ष के दौरान मघा श्राद्ध तब किया जाता है जब अपराह्न काल में मघा नक्षत्र प्रबल होता है.
Pitru Paksha 2024: दशमी तिथि का श्राद्ध पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है. दशमी तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध होता है, जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार दशमी तिथि को होती है.
Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष में नवमी तिथि के श्राद्ध को विशेष स्थान दिया गया है. इस दिन दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध करने का विधान है. इसलिए इसे मातृ नवमी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है.
Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष में छठे दिन उन पूर्वजों या पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार षष्ठी तिथि को होती है. जबकि सप्तमी तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध होता है, जिनकी मृत्यु सप्तमी तिथि के दिन होती है.
Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है. पितृपक्ष का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इन दिनों में श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करके पूर्वजों को यह बताया जाता है कि आज भी वह परिवार का हिस्सा हैं. पितृपक्ष में पूर्वजों का आशीर्वाद लेने से घर में सुख-शांति रहती है.
Pitru Paksha 2024: पंचमी तिथि पर परिवार के उन मृत सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि पर होती है. इसे पंचमी का श्राद्ध भी कहा जाता है. श्राद्ध कर्म पितरों को तर्पण और श्राद्ध अर्पित करने के लिए किया जाता है.
Pitru paksha 2024: आज पितृ पक्ष का चौथा दिन है और महाभरणी श्राद्ध भी किया जाता है. महाभरणी श्राद्ध के दिन अविवाहित मरने वाले लोगों का श्राद्ध किया जाता है. ग्रंथों में कहा गया है कि भरणी श्राद्ध का फल गया तीर्थ में किए गए श्राद्ध के समान ही है. भरणी श्राद्ध पितृपक्ष में तब किया जाता है जब अपराह्नकाल में भरणी नक्षत्र प्रारंभ होता है.
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष या श्राद्ध का समय बहुत ही खास माना जाता है. पितृ पक्ष के दिन पितरों के नाम का श्राद्ध, पिंडदान और पूजा की जाती है.
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पितृपक्ष शुरू हो चुका है. पितरों की आत्मा की शांति के लिए यह 15 दिन बहुत ही विशेष होते हैं. कहा जाता है कि इन दिनों पितर धरती लोक पर वास करते हैं. आइए तो ज्योतिष प्रवीण मिश्रा से जानते हैं कि पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृपक्ष में क्या खास उपाय करना चाहिए. देखें वीडियो.
Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष में यदि श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण विधिवत किया जाए तो दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है और वे सुखी संतुष्ट होकर लौट जाते हैं. आज पितृ पक्ष का तीसरा दिन है इसलिए इसे तृतीया श्राद्ध और तीज श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है.