scorecardresearch
 
Advertisement

पोस्टल बैलेट

पोस्टल बैलेट

पोस्टल बैलेट

पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) यानी डाक मतदान एक ऐसा चुनाव है जिसमें मतपत्र मतदाताओं को डाक द्वारा वितरित किए जाते हैं, जबकि मतदाता मतदान केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से मतदान करते हैं.

किसी चुनाव में, पोस्टल बैलेट मांग पर उपलब्ध करवाया जाता है. अगर आप निर्दिष्ट मतदान स्थल पर जाने में असमर्थ हैं तो आप इसकी मांग कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, निवारक निरोध में रहने वाले लोग, विकलांग और 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग पोस्टल बैलेट का उपयोग कर सकते हैं. कैदी बिल्कुल भी वोट नहीं दे सकते. मीडियाकर्मियों को भी अपना वोट डालने के लिए पोस्टल बैलेट का उपयोग करने की अनुमति दी गई है. इसके लिए मतदाताओं को आवेदन करना आवश्यक होता है

भारत में पोस्टल बैलेट केवल भारतीय चुनाव आयोग की इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट पेपर्स (ETPB) प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जहां पंजीकृत मतदाताओं को मतपत्र वितरित किए जाते हैं और वे पोस्टल द्वारा मत वापस करते हैं. जब वोटों की गिनती शुरू होती है, तो इन पोस्टल बैलेट की गिनती इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से वोटों की गिनती से पहले की जाती है.

हालांकि भारतीय राजनीति में कई दल इसका विरोध करते आ रहे हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने आरोप लगाया था कि पोस्टल 'बड़ी संख्या में मतदाताओं की सत्यापन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे, इस प्रकार, प्रक्रिया की पारदर्शिता और अखंडता', और पोस्टल बैलेट के साथ 'हेरफेर और कदाचार के उदाहरणों' के बारे में चिंता व्यक्त की थी. 

दरअसल, 2019 तक सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होती थी. उसके बाद ईवीएम वोटों की गिनती शुरू की जाती थी. डाक मतपत्रों की संख्या में वृद्धि के साथ चुनाव पैनल ने 2019 के चुनावों के बाद अपने दिशानिर्देशों में बदलाव किया है और अब पोस्टल बैलेट की गिनती के साथ ईवीएम की गिनती भी शुरू की जा सकती है (Postal Ballot in India).

18 मई, 2019 को सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को दिए गए निर्देशों में चुनाव आयोग ने अपने पहले के दिशानिर्देश को वापस ले लिया और यह कहा कि ईवीएम की गिनती डाक मतपत्रों की गिनती के दौरान भी जारी रह सकती है. एक बार ईवीएम की गिनती पूरी हो जाने के  बाद वीवीपैट पर्चियों की गिनती की जा सकती है. नए निर्देशों ने डाक मतपत्रों की अनिवार्य रूप से दोबारा गिनती के नियम को भी संशोधित किया है. इससे पहले यदि जीत का अंतर डाक मतपत्रों की कुल संख्या से कम होता था तो डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती की जाती थी.  अब गिनती के दौरान अमान्य करार दिए गए डाक मतपत्रों का फिर से सत्यापन किया जाएगा, यदि ऐसे मतपत्रों की संख्या से अंतर कम हो. 

और पढ़ें

पोस्टल बैलेट न्यूज़

Advertisement
Advertisement