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रघुराज प्रताप सिंह

रघुराज प्रताप सिंह

रघुराज प्रताप सिंह

रघुराज प्रताप सिंह, राजनेता

रघुराज प्रताप सिंह (Raghuraj Pratap Singh) जिन्हें राजा भैया (Raja Bhaiya) के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय राजनेता हैं जो अपने स्थानीय विधानसभा क्षेत्र कुंडा (Kunda Constituency), उत्तर प्रदेश से एक स्वतंत्र MLA हैं. 16 नवंबर 2018 को राजा भैया ने घोषणा की कि वह अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक (Jansatta Dal Loktantrik) बना रहे हैं.

रघुराज प्रताप सिंह का जन्म 31 अक्टूबर 1969 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में एक राजपूत परिवार में हुआ था (Raghuraj Pratap Singh Date of Birth). उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह हैं और अवध के शाही भाद्री से हैं. उनके दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति और बाद में हिमाचल प्रदेश राज्य के दूसरे राज्यपाल थे. उनके दादा ने अपने भतीजे राजा उदय प्रताप सिंह को अपने बेटे के रूप में गोद लिया था (Raghuraj Pratap Singh Family).

सिंह ने 1989 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की (Raghuraj Pratap Singh Education). 

उन्होंने 15 फरवरी 1995 को भंवी कुमारी सिंह से शादी की (Wife), जिनसे उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं (Children). 

मुलायम सिंह यादव की सरकार में साल 2003 में आने के तुरंत बाद ही राजा भैया के खिलाफ सभी POTA आरोप हटा दिए गए थे. हालांकि, Supreme Court ने राज्य सरकार को पोटा आरोपों को खारिज करने से रोक दिया. अंततः 2004 में POTA Act को निरस्त कर दिया गया था, लेकिन अदालत ने रघुराज प्रताप सिंह को रिहा करने से इनकार कर दिया. बाद में वह सरकार में एक शक्तिशाली व्यक्ति बनकर उभरे. 

पुलिस अधिकारी आर.एस. पांडे ने उनके घर पर छापेमारी का नेतृत्व किया था. अंततः Police Officer R.S. Pandey एक सड़क दुर्घटना में मारे गए थे, जिसकी जांच वर्तमान में CBI द्वारा की जा रही है. 

2005 में, वह खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री बने (minister for Food and Civil Supplies) और उनके लंबित आपराधिक मामलों के बावजूद, उन्हें राज्य द्वारा Z-category की सुरक्षा प्रदान की गई.  उनकी पार्टी ने प्रतापगढ़ और कौशांबी की दो सीटों पर अकेले लोकसभा चुनाव लड़ा (Raghuraj Pratap Singh political Career).

3 मार्च 2013 को, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के निर्वाचन क्षेत्र कुंडा में ग्रामीणों और पुलिस के बीच संघर्ष के दौरान पुलिस उपाधीक्षक (DSP) जिया उल हक की मौत हो गई थी. मारे गए अधिकारी की पत्नी, परवीन आजाद की शिकायत के बाद, प्रतापगढ़ पुलिस ने राजा भैया के खिलाफ 'साजिश' में कथित रूप से शामिल होने के लिए मामला दर्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप सामूहिक युद्ध हुआ और बाद में पुलिस अधिकारी की हत्या हुई. 1 अगस्त 2013 को CBI ने राजा भैया को क्लीन चिट देते हुए सीबीआई कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की (Raja Bhaiya Controversies).
 

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