गुजरात के राजकोट में 25 मई 2024 को हुए टीआरपी गेमिंग जोन अग्निकांड में लगभग 28 लोगों की जान चली गई, जिसमें 12 बच्चे हैं. इस मामले में प्रशासन ने छह अधिकारियों को सस्पेंड किया है. राजकोट नगर निगम के दो अधिकारी असिस्टेंट इंजीनियर जयदीप चौधरी और टाउन प्लानर गौतम जोशी को सस्पेंड किया गया है. इसके साथ ही सड़क एवं निर्माण विभाग के दो अधिकारी एडिशनल इंजीनियर पारस कोठिया और डिप्टी इंजीनियर एम आर सुमा को भी सस्पेंड किया गया है. वहीं, पुलिस विभाग के दो अधिकारी पुलिस इंस्पेक्टर एन आर राठौड़ और पुलिस इंस्पेक्टर वी आर पटेल पर भी गाज गिरी है (Rajkot TRP Game Zone Agnikand).
इस बीच गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार को राजकोट गेम जोन दुर्घटना स्थल पर जाकर निजी तौर पर निरीक्षण किया. इस गंभीर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इसके बाद ही राज्य सरकार ने छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश दिया.
इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था. हाईकोर्ट की स्पेशल ब्रांच की बेंच ने सुनवाई करते हुए इसे मानव निर्मित आपदा बताया था.
कोर्ट ने राजकोट नगर निगम से हलफनामा लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद नगर निगम की ओर से दाखिल हलफनामा वापस ले लिया गया. हाइकोर्ट ने आदेश के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों और अग्निकांड में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में नए एफिडेविट के साथ आने को कहा है. आगे की सुनवाई 27 सितंबर को होगी.
राजकोट TRP गेम जोन में हुए अग्निकांड को लेकर कांग्रेस लगातार आक्रामक है. गुजरात कांग्रेस ने 9 अगस्त से अहमदाबाद और गांधीनगर होते हुए मोरबी से राजकोट तक 300 किलोमीटर की न्याय यात्रा निकालने की घोषणा की है. न्याय यात्रा 9 अगस्त को मोरबी पुल दुर्घटना स्थल से शुरू होकर 11 अगस्त को राजकोट पहुंचेगी.
2021 में शुरू हुआ यह गेम जोन पूरी तरीके से अवैध था, इतना बड़ा गेम जोन खड़ा करने के लिए मालिकों ने राजकोट महानगर निगम से किसी भी प्रकार की मंजूरी नही ली थी.जांच में यह भी सामने आया कि गेम जोन में आग बुझाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं थे.
राजकोट TRP गेम जोन अग्निकांड के पीड़ितों के लिए कांग्रेस न्याय यात्रा निकालेगी. कांग्रेस ने ऐलान किया है कि गुजरात की भाजपा सरकार के खिलाफ वह न्याय यात्रा निकालेगी. 1 अगस्त को राजकोट से ही इस यात्रा की शुरुआत होगी और यह 15 अगस्त तक चलेगी. राजकोट अग्निकांड के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इस यात्रा का आयोजन किया जाएगा.
राजकोट के टीआरपी गेम जोन अग्निकांड को एक महीना पूरा हो चुका है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने बंद का ऐलान कर दिया था. शहर की प्रमुख दुकानें आधे दिन बंद रखी गई थी. जिसका असर भी देखने को मिला और सड़क पर सन्नाटा पसरा रहा. VIDEO
आरएमसी के चीफ फायर ऑफिसर इलेश खैर, डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर भीखाभाई ठेबा और फेब्रिकेशन का काम करने वाले सुपरवाइजर महेश राठौड़ की गिरफ्तारी शनिवार को की गई है. राजकोट टीआरपी गेम जोन में 25 मई को आग लगी थी.
कांग्रेस ने 25 जून को 'राजकोट बंद' का आह्वान किया है, जिसमें पीड़ितों के परिवारों के लिए भाजपा सरकार से बड़े मुआवजे की मांग की गई है. पीड़ितों के रिश्तेदारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जनता और दुकानदारों से अपील की है कि वे अपने व्यवसाय बंद करके बंद का समर्थन करें.
RMC के सस्पेंडेड टाउन प्लैनिंग ऑफीसर मनसुख सागठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति होने का मामला ACB की तरफ से दर्ज किया गया है. सागठिया के साथ जुडी हुई अलग अलग जगहों पर ACB की टीम ने रेड कर जांच में 10 करोड 55 लाख 37 हजार 355 रुपए की आय से अधिक संपत्ति प्राप्त की है. जो की 70,000 रुपए के पगारदार सागठिया की आय से 410 प्रतिशत अधिक है.
कोर्ट ने कहा कि, 'सरकार का शहरी विकास विभाग इन सभी नगर निगमों की विभागीय जांच करें, क्या नगर निगमों ने सही तरीके से काम किया? जो भी जिम्मेदार हैं, उन सबके नाम फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में होने चाहिए. गेम ज़ोन जब से शुरू हुआ तब वहां पर जो भी अधिकारी गए थे उनको सब पता था, तो वह लोग क्या कर रहे थे?
स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि सुझाव 25 जून तक गृह विभाग की ईमेल आईडी 'home@gujarat.gov.in' पर दिए जा सकते हैं. गुजरात पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 33 के तहत पुलिस आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट को इस संबंध में नियम बनाने का अधिकार है.
राजकोट अग्निकांड हादसे में एसआईटी की टीम ने कई बड़े खुलासे किए हैं. इन खुलासों में फायर सेफ्टी विभाग की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. एसआईटी के खुलासे के बाद बड़ा सवाल ये है कि क्या इस हादसे को टाला जा सकता था? देखें गुजरात आजतक.
जून 2023 में राजकोट महानगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग ने इस अवैध कार्य को तोड़ने का भी नोटिस दिया था, लेकिन उसके बाद न तो TRP गेमिंग जोन का स्ट्रक्चर तोड़ा गया और न तो मालिकों की तरफ से इसे रेगुलराइज किया गया.
राजकोट महानगर निगम के टाउन प्लानिंग ऑफिसर मनसुख सागठिया, असिस्टेंट टाउन प्लानिंग ऑफिसर गौतम जोशी और मुकेश मकवाना, स्टेशन फायर ऑफिसर रोहित विगोरा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. राजकोट पुलिस ने इन चारों अधिकारियों को अरेस्ट कर लिया है.
राजकोट अग्निकांड मामले में एसआईटी की जांच जारी है. राजकोट अग्निकांड को लेकर राज्य सरकार अब एक्शन में आ गई है. जिसे लेकर गांधीनगर में अहम बैठक हुई. जिसमें एसआईटी ने गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी को जांच का स्टेटस बताया. राजकोट अग्निकांड को लेकर आज पूरे दिन जबरदस्त हलचल रही. देखें गुजरात आजतक.
राजकोट के टीआरपी गेम जॉन में लगी भीषण आग में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गेम जॉन की जगह का मालिक और हिस्सेदार अशोक सिंह जाडेजा अभी भी फरार है. सरकार की तरफ से कार्रवाई करते हुई अब तक 7 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है.
गिरफ्तार किया गया आरोपी किरीट सिंह जडेजा और अशोक सिंह जडेजा सगे भाई हैं और गेम जोन वाली जगह के मालिक हैं. वे टीआरपी गेम जोन में प्रोपराइटर मालिक थे. पुलिस ने किरीट सिंह को पकड़ लिया है और अशोक सिंह अभी भी फरार है.
गुजरात के राजकोट से बीजेपी उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला मृतकों के परिजनों से मुलाकात करने सिविल अस्पताल पहुंचे थे, जहां उन्हें देखकर परिजनों ने भड़कते हुए कहा कि 25 मई को घटना घटी थी और आप आज लोगों से मिलने पहुंचे हैं.
गुजरात के गृहमंत्री हर्ष सांघवी का कहना है कि डीएनए टेस्ट के जरिए नौ शवों की पहचान की गई है. फॉरेंसिक साइंस लैब की मदद से डीएनए प्रोफाइलिंग के जरिए और भी शवों की पहचान की जाएगी.
राजकोट गेमिंग जोन अग्निकांड पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है. जिसमें राजकोट नगर निगम और गुजरात सरकार ने अपना पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और नगर निगम की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि हमें गुजरात की मशीनरी पर भरोसा नहीं है. देखें गुजरात आजतक.
गुजरात सरकार ने छह अधिकारियों को निलंबित करने के बाद छह हाई-प्रोफाइल अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया है. इनमें राजकोट शहर के पुलिस कमिश्नर भी शामिल हैं. गुजरात हाई कोर्ट ने अग्निकांड को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी, जिसके बाद सरकार की तरफ से एक्शन लिया गया है.
गोकानी ने कहा, "14 दिन की रिमांड का मुख्य आधार यह था कि गिरफ्तार आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जो भी सवाल पूछे जाते हैं और उनसे जो भी दस्तावेज मांगे जाते हैं, वे गोलमोल जवाब दे रहे हैं." अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि मामले के मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं.