रणजीत सिंह चौटाला (Ranjit Singh Chautala) हरियाणा के एक राजनीतिज्ञ और व्यवसायी हैं. हरियाणा विधानसभा और राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने मंत्री पद पर भी काम किया है. वह 2024 हरियाणा विधानसभा चुनाव में रानिया सीट से बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे हैं.
वह 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में रानिया सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार जीते. चुनाव के बाद, अपने पोते दुष्यंत चौटाला के साथ, उन्होंने बहुमत हासिल करने के लिए बीजेपी का समर्थन किया और तीन विभागों- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली और जेल के साथ दूसरे मनोहर लाल खट्टर मंत्रालय में शामिल हो गए.
रणजीत सिंह चौधरी देवीलाल चौटाला के बेटे हैं, जो दो बार भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री रहे. वह एक बहुत शक्तिशाली परिवार से हैं जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था. रणजीत सिंह के चाचा साहिब राम सिहाग 1937 और 1946 में विधानसभा के सदस्य थे और उनके पिता देवीलाल 1951 से राजनीति में थे.
1987 में वे लोकदल के टिकट पर रोरी विधानसभा से 7वीं विधानसभा के विधायक चुने गए. वह हरियाणा के कृषि मंत्री भी रहे और उनके पिता मुख्यमंत्री थे. 1990 में उन्हें हरियाणा से राज्यसभा के सांसद के रूप में चुना गया और उनके पिता चौधरी देवीलाल उस समय भारत के उप प्रधानमंत्री थे. वह 2005 - 2009 में राज्य योजना बोर्ड, हरियाणा के उपाध्यक्ष थे. 2019 में उन्होंने हरियाणा की 14वीं विधानसभा के लिए रानिया विधानसभा से चुनाव लड़ा और निर्दलीय विधायक के रूप में जीत हासिल की और मंत्री बने.
हरियाणा में चौटाला फैमिली के आठ सदस्यों ने चुनाव लड़ा, जिनमें सिर्फ दो को ही जीत मिली. बंसीलाल परिवार के दो लोग एक ही सीट पर आमने-सामने थे, उनमें श्रुति चौधरी चुनाव जीत गईं. इसके अलावा भजनलाल परिवार की बात करें तो पंचकूला सीट से कांग्रेस की टिकट पर चंद्रमोहन ने चुनाव जीता.
हरियाणा के विधानसभा चुनाव में देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के परिवार से कुल 12 सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं. देवीलाल के परिवार से सबसे ज्यादा सात सदस्य मैदान में हैं और इनमें से पांच तो दो सीटों पर एक-दूसरे को ही चुनौती दे रहे हैं. वहीं, बंसीलाल परिवार के दो सदस्य भी आमने-सामने हैं. जानिए इन परिवारों से कौन कहां मैदान में है.
हरियाणा बीजेपी में बगावत की स्थिति मध्य प्रदेश या राजस्थान विधानसभा चुनावों जैसी नहीं है. हरियाणा में छोटी-छोटी विधानसभाएं हैं, जहां किसी छोटे कार्यकर्ता के बागी होने का भी असर सीधे जीत और हार पड़ता है. लेकिन, बीजेपी के इन बागी नेताओं की राजनीतिक हैसियत का बारीकी से आंकलन करते हैं तो 20 में से 4 नेता ही ऐसे नजर आते हैं, जो भाजपा का नुकसान करेंगे.
हरियाणा और देश की सियासत में चौधरी देवीलाल ताऊ के नाम से मशहूर रहे हैं. इस फैमिली से जुड़े सदस्य पार्टियां बदलते रहे, लेकिन कुनबे की चमक और धमक राजनीति के मैदान में धुंधली नहीं पड़ी. हिसार जिले के तेजाखेड़ा गांव में जन्मे देवीलाल 15 साल की उम्र में आजादी की लड़ाई में शामिल हुए.
हरियाणा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट आने के बाद से ही बीजेपी में नाराज नेताओं की लिस्ट लंबी होती जा रही है. रणजीत चौटाला, लक्ष्मण नापा, शमशेर गिल ने पार्टी छोड़ दी है तो वहीं योगेश्वर दत्त भी नाराजगी के ही संकेत दे रहे हैं. डैमेज कंट्रोल के लिए बीजेपी का प्लान क्या है?
रणजीत सिंह चौटाला ने 2019 के विधानसभा चुनाव में रानिया सीट से जीत हासिल की थी. वे निर्दलीय चुनाव मैदान में थे. इससे पहले रणजीत को रानियां से दो विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा है. रणजीत 1987 के बाद 2019 में 31 साल बाद विधानसभा चुनाव जीते थे.
हरियाणा सरकार में हुए बड़े फेरबदल के बाद बीजेपी की नई सरकार का शपथग्रहण हो गया है. नायब सिंह सैनी की मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी हो गई है. हरियाणा में नए मुख्यमंत्री नायब सैनी को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर उपस्थित रहे. देखें वीडियो.