रेचेप तैय्यप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) एक तुर्की राजनेता हैं जो 2014 से तुर्की के राष्ट्रपति हैं (President Turky). वह पहले 2003 से 2014 तक तुर्की के प्रधानमंत्री और 1994 से 1998 तक इस्तांबुल के मेयर के पद पर रह चुके हैं. उन्होंने 2001 में जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AKP) की सह-स्थापना भी की.
उनका जन्म 26 फरवरी 1954 को गुनेसु के रीज में हुआ था (Recep Tayyip Erdogan Born). 13 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ वह इस्तांबुल चले गए. उन्होंने अक्सराय एकेडमी ऑफ इकोनॉमिक एंड कमर्शियल साइंसेज में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है (Recep Tayyip Erdogan Education).
1994 के स्थानीय चुनावों में वह पहली बार मेयर के लिए उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए और चुनाव में जीत हासिल की.
उन्होंने 1978 में शादी की और चार बच्चे हैं (Recep Tayyip Erdogan Family).
मिस्र की राजधानी काहिरा में विकासशील मुस्लिम देशों के संगठन D8 का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने मुस्लिम देशों से एक अपील की है. उन्होंने मध्य-पूर्व में 'इजरायल की बढ़ती आक्रामकता' पर बात की है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने यूक्रेन को बैलेस्टिक हथियार देने के अमेरिकी फैसले पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा है कि यह आग में बारूद का ढेर डालने के जैसा होगा. एर्दोगन का कहना है, इससे युद्ध बढ़ सकता है.
गाजा में इजरायल-हमास युद्ध की शुरुआत के बाद से ही तुर्की और इजरायल के रिश्ते खराब चल रहे हैं. बीते हफ्ते तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने घोषणा की थी कि उनका देश इजरायल के साथ अपने आधिकारिक संबंधों को खत्म कर रहा है. अब खबर है कि तुर्की ने इजरायल की तरफ से आए एक अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है.
तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर ने मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच तीसरे विश्व युद्ध की आशंका जताई है. उन्होंने कहा है कि इजरायल एक आक्रामक देश है. इधर, तुर्की की मीडिया में ऐसी खबरें चल रही हैं कि तुर्की ने इजरायल के साथ अपने आधिकारिक संबंध खत्म कर लिए हैं.
तुर्की और इजरायल के संबंधों में पिछले साल न्यूयॉर्क में एर्दोगन और नेतन्याहू के बीच बैठक के बाद से गिरावट आई है, जो दोनों देशों के बीच सुलह का प्रतीक माना गया था. लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हमले और उसके बाद गाजा पर इजरायल की जवाबी कार्रवाई के बाद, जिसमें 43,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, तुर्की ने नेतन्याहू सरकार की कड़ी आलोचना की है.
अंकारा में कैबिनेट की बैठक के बाद एर्दोगन ने कहा कि अगर सुरक्षा परिषद (UNSC) इस मामले में जरूरी इच्छाशक्ति नहीं दिखा सकती है, तो संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को बल प्रयोग की सिफारिश करने के अधिकार को तेजी से लागू करना चाहिए, जैसा कि उसने 1950 के शांति के लिए एकजुटता प्रस्ताव के साथ किया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्की की यह रणनीति BRICS में शामिल होने की उसकी महत्वाकांक्षा से जुड़ी हो सकती है. तुर्की ब्रिक्स में सदस्यता की कोशिश कर रहा है, और इसके लिए भारत की सहमति महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत इस समूह के संस्थापक सदस्यों में से एक है. अर्दोआन का यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब जम्मू-कश्मीर में चुनाव की प्रक्रिया चल रही है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के लिए फतवा जारी करने वाले हेरेतिन करमन ने इजरायल के खिलाफ तुर्की को अपनी क्षमता बढ़ाने को कहा है. उनका कहना है कि तुर्की अगर अपनी डिफेंस क्षमता का विकास नहीं करता है तो इजरायल एक दिन उसके क्षेत्र को भी हड़प लेगा.
आईएमईईसी यानी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कोरिडोर के विरोधी रहे तुर्की को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. दरअसल तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन इराक डेवलपमेंट रोड प्रोजेक्ट को आईएमईईसी की काट की तरह पेश कर रहे थे . और अब वो इसे लेकर कई देशों को साथ लाने में कामयाब रहे हैं.
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कोरिडोर में तुर्की को न शामिल किए जाने पर राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन बेहद नाराज हुए थे और उनका कहना था कि तुर्की के बिना किसी कोरिडोर की कल्पना नहीं की जा सकती है. अब उन्होंने इराक डेवलपमेंट रोड प्रोजेक्ट के रुप में एर्दोगन ने IMEEC की काट ढूंढ ली है.
तुर्की ने साल 2018 में तुर्की अंतरिक्ष एजेंसी की स्थापना की थी. स्थापना के 6 सालों बाद ही तुर्की अपने एक नागरिक को अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है. देश को मिलने वाली इस उपलब्धि से राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन बेहद खुश हैं.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर से की है. नेतन्याहू ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि कुर्दों पर जुल्म करने वाले व्यक्ति को इजरायल को उपदेश देने वाले लोगों की पंक्ति में अंतिम होना चाहिए.
टोरा हिब्रू बाइबिल की पहली पांच पुस्तकों का संकलन है. इसे ईसाइयों द्वारा पेंटाटेच या मूसा की पांच पुस्तकों के रूप में जाना जाता है. इसे यहूदी परंपरा में लिखित टोरा के रूप में भी जाना जाता है. इसका जिक्र करते हुए तुर्की के राष्ट्रपति ने एक बार फिर इजरायल की आलोचना की है.
रविवार को वाशिंगटन के शीर्ष राजनयिक के अंकारा पहुंचने से पहले विरोध प्रदर्शन कर रहे फिलिस्तीन समर्थकों पर तुर्की पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. दरअसल फिलिस्तीन समर्थक यहां अमेरिकी बलों के आवास वाले एक सैन्य अड्डे के बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. देखें वीडियो
एर्दोगन ने हाल ही में इस्तांबुल में फिलिस्तीन समर्थित रैली को संबोधित करते हुए इजरायल को युद्ध अपराधी और कब्जा करने वाला बताया था. उन्होंने कहा था कि हमास कोई आतंकी संगठन नहीं है. एर्दोगन ने बिना किसी शर्त के इजरायल का समर्थन करने के लिए कुछ पश्चिमी देशों की आलोचना भी की थी.
जंग के बीच टर्की ने हमास के पक्ष में का बयान दिया है. नाटो सदस्य होने के बावजूद एर्दोगन ने कहा कि हमास आतंकी नहीं देशभक्त संगठन है. उसे अपने जमीन और लोगों को बचाने का पूरा हक है. IDF ने दावा किया है कि सीरिया के अलेप्पो एयरपोर्ट और गाजा पट्टी पर एयरस्ट्राइक किया. हमले में हमास के एक कमांडर को मार गिराया है. देखें बड़ी खबरें.
तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने कहा कि हमास एक आतंकवादी संगठन नहीं, बल्कि एक मुक्ति समूह है जो अपनी ज़मीन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहा है. एर्दोगन ने कहा कि हमास देशभक्त संगठन है. इसके साथ ही उन्होंने उन पश्चिमी देशों की भी आलोचना की, जिन्होंने हमास के खिलाफ इजरायल की जवाबी कार्रवाई का समर्थन किया है.
तुर्की खुद अतीत में फिलिस्तीनियों का समर्थन करता रहा है, इस्लामिक समूह हमास के सदस्यों की मेजबानी की है और जिसने इज़राइल पर हमला किया था और two-state solution का समर्थन किया था. तुर्की ने शनिवार को कहा कि वह तनाव कम करने में मदद करने के लिए तैयार है.
जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर पर देशों में सहमति बनी थी. इस कॉरिडोर से तुर्की को दूर रखा गया है जिसे लेकर तुर्की ने नाराजगी जाहिर की थी. अब खबर है कि तुर्की इस प्रोजेक्ट की काट तैयार करने के लिए कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है
तुर्की के राष्ट्रपति के एर्दोगन ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर का विरोध किया है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई देश ट्रेड कॉरिडोर बनाकर अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके साथ ही एर्दोगन ने कहा कि तुर्की के बिना कोई कॉरिडोर नहीं है.
दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर एक प्रेस वार्ता के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यदि भारत यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनता है तो हमें गर्व होगा.