रूसी अंतरिक्ष एजेंसी
स्टेट स्पेस कॉरपोरेशन (The State Space Corporation) जिसे आमतौर पर केवल रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) के रूप में जाना जाता है, एक एयरोस्पेस अनुसंधान है. 1950 के दशक में यह सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के नाम से स्थापित किया गया था जो 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद रॉसकॉसमॉस के नाम से जाना जाता है. यह शुरू में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (Russian Space Agency) के रूप में शुरू हुआ, जिसे 25 फरवरी 1992 को स्थापित किया गया था और 1999 में पुनर्गठित किया गया. 2015 में, संघीय अंतरिक्ष एजेंसी (रॉसकॉसमॉस) का संयुक्त रॉकेट और अंतरिक्ष के साथ विलय कर दिया गया था (Foundation of Roscosmos).
Roscosmos का मुख्यालय मॉस्को में है (Headquarter), जिसका मुख्य मिशन कंट्रोल सेंटर पास के शहर कोरोल्योव में है, और यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर मॉस्को के स्टार सिटी में स्थित है. इसकी लॉन्च सुविधाओं में कजाकिस्तान में बैकोनूर कोस्मोड्रोम, दुनिया का पहला और सबसे बड़ा स्पेसपोर्ट और वोस्टोचन कोस्मोड्रोम शामिल हैं (World's first and largest Spaceport,), जो अमूर (Amur Oblast) में रूसी पूर्व में बनाया जा रहा है. मई 2018 से इसके निदेशक दिमित्री रोगोजिन हैं (Director Dmitry Rogozin).
सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उत्तराधिकारी के रूप में, रॉसकॉसमॉस ने दुनिया का पहला उपग्रह, पहला मानव अंतरिक्ष यान और पहला अंतरिक्ष स्टेशन (सैल्यूट) शामिल बनाया है. इसकी वर्तमान गतिविधियों में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन शामिल है, जिसमें यह एक प्रमुख भागीदार है. 22 फरवरी 2019 को, Roscosmos ने Moscow में अपने नए मुख्यालय, National Space Centre के निर्माण की घोषणा की. इसकी Astronaut Corps दुनिया के इतिहास में पहली है.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रूसी यान के आते ही एक रहस्यमयी जहरीली दुर्गंध फैल गई. जिसकी वजह से रूसी यान के दरवाजे यानी हैच को बंद करना पड़ा. इसी यान ने स्पेस स्टेशन को पिछले कुछ दिनों में दो बार अंतरिक्ष के कचरे से बचाया था. लेकिन अब इस विचित्र गंध की वजह भी बना हुआ है.
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर इस समय सुनीता विलियम्स को लेकर छह लोग मौजूद हैं. लेकिन 19 और 25 नवंबर को इन सबकी जान पर आफत आ गई थी. अंतरिक्ष का कचरा स्पेस स्टेशन से टकराने वाला था. तब रूस के कार्गो शिप ने स्पेस स्टेशन की पोजिशन बदली. तब जाकर ये सारे एस्ट्रोनॉट्स और स्टेशन बच पाया.
Space Station पर Sunita Williams समेत सभी अंतरिक्षयात्रियों के लिए खतरा है. नासा लगातार रूसी स्पेस एजेंसी को कह रहा है कि पांच साल से लीक हो रहे रूसी मॉड्यूल को सुधार ले. लेकिन रूसी एजेंसी इसे लेकर कोई काम नहीं कर रही है. यूक्रेन युद्ध के चलते दोनों एजेंसियों के बीच स्पेस स्टेशन को लेकर विवाद चल रहा है.
रूस के अंतरिक्षयात्री ओलेग कोनोनेंको ने स्पेस में कुल मिलाकर 1000 दिन पूरा करने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं. फिलहाल वो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर हैं. सितंबर में लौटेंगे. उस हिसाब से इनका रिकॉर्ड और भी ज्यादा बनने वाला है. ये मील का पत्थर उन्होंने एक नहीं बल्कि पांच मिशन में पूरा किया है.
क्या अंतरिक्ष में किसी देश ने परमाणु हथियार तैनात किया है? क्या अंतरिक्ष में परमाणु जंग अमेरिका और रूस के बीच शुरू होगी? इस तरह के सवाल पिछले दो दिनों से चर्चा में है. अमेरिका अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों को प्रतिबंधित करना चाहता है. रूस ने इस फैसले पर अपना वीटो पावर इस्तेमाल कर लिया है.
Russia के अंतरिक्षयात्री Oleg Kononenko ने अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताने का रिकॉर्ड बना लिया है. वो स्पेस में कुल मिलाकर 879 दिन रहे. यानी करीब ढाई साल तक. आइए जानते हैं इनकी यात्रा के बारे में...
अंतरिक्ष में एक बार में लगातार सबसे ज्यादा समय बिताने वाले अमेरिकी एस्ट्रोनॉट फ्रैंक रुबियो वापस धरती पर लौट आए हैं. उन्होंने स्पेस स्टेशन पर 371 दिन बिताए. इस दौरान पृथ्वी के चारों तरफ उन्होंने 5963 चक्कर लगाए. उनके साथ रूसी कॉस्मोनॉट्स सर्गेई प्रोकोपीयेव और दिमित्री पेतेलिन भी वापस लौटे हैं.
Chandrayaan-3 जहां एक तरफ अपने मॉड्यूल्स को बांट चुका है. वहीं, Russia का LUNA-25 मिशन भी चांद के ऑर्बिट में पहुंच चुका है. रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने इस बात की पुष्टि की है. लूना-25 अब चांद के चारों तरफ पांच दिन तक चक्कर लगाएगा. इसके बाद 21 अगस्त को चांद पर लैंड करेगा.
भारत के चंद्रयान-3 के बाद शुरू हो गई मून मिशन की नई रेस?
भारत ने Chandrayaan-3 भेजा. रूस ने Luna-25. इस साल दो मून मिशन जा चुके हैं. इसी साल दो और मून मिशन जाएंगे. इसके बाद अगले चार सालों में आठ मून मिशन भेजे जाने वाले हैं. जिसमें इजरायल, अमेरिका, भारत, चीन और जापान शामिल हैं. आइए जानते हैं कि इन 10 मून मिशन में क्या-क्या होने वाला है.
इंसान, देश और उनकी स्पेस एजेंसी चांद पर जा रही हैं. लेकिन सौर मंडल में ऐसे कितने ग्रह हैं, जहां पर इंसान या उसका बनाया कोई सामान पहुंच चुका है. वो रोबोट हो. लैंडर हो. ऑर्बिटर हो या इम्पैक्टर. आइए जानते हैं कि ऐसे कौन-कौन से ग्रह और चंद्रमा हैं, जहां पर इंसानों की पहुंच है... और कैसे?
Russia ने अपना मून मिशन Luna-25 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. यह मिशन भारत के Chandrayaan-3 से करीब एक महीना बाद लॉन्च किया गया है. लेकिन यह संभवतः चंद्रयान-3 से पहले चांद की सतह पर लैंड करेगा. रूस करीब 47 साल बाद चांद पर अपना कोई लैंडर उतार रहा है.
ISRO के Chandrayaan-3 के बाद अब रूस भी अपना मून मिशन 10 अगस्त को भेज रहा है. इस मिशन का नाम है Luna-25. रूस चंद्रमा पर करीब 47 साल बाद कोई लैंडर मिशन भेज रहा है. लूना प्रोग्राम ने रूस को चंद्रमा पर कई सफलता दिलाई है. जानिए रूस के इस मिशन के बारे में...
रूसी अंतरिक्ष यात्री व्लादिमीर अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मरने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे. उनका विमान 7 किमी. की ऊंचाई से धरती पर गिरा था. यहां हम आपको बता रहे है कि स्पेस मिशन पर मरने वाले पहले शख्स के साथ आखिर क्या हुआ था.
भारत तेजी से स्पेस सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. इस रेस में एलोन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स एक बड़ा नाम है जिससे मुकाबला करने का दम इसरो (ISRO) की कमर्शियल कंपनी न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड ने दिखाया है. इस कंपनी ने हाल ही में ब्रिटेन की कंपनी वनवेब लिमिटेड के तीन सैटेलाइट लॉन्च किए हैं.
रूसी स्पेस एजेंसी के प्रमुख ने धमकी दी है कि अगर परमाणु युद्ध होता है तो रूस नाटो देशों को आधे घंटे में बर्बाद कर देगा. दिमित्री रोगोजिन (Dmitry Rogozin) अपने धमकी भरे बयानों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. इन्होंने स्पेस स्टेशन से रूस के हटने, उसे गिराने और एलन मस्क (Elon Musk) को धमकाने की बात भी कही थी.
8 जनवरी 2014 को दूसरी दुनिया से आई एक वस्तु पापुआ न्यू गिनी के आसमान में आकर विस्फोट कर गई. इसकी जानकारी अमेरिकी सरकार ने छिपा ली. अब जाकर इससे संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है. क्या इससे खतरा था?