साहित्य आज तक- भारतीय भाषा, साहित्य, कला और मनोरंजन जगत का सबसे बड़ा मेला है. भारत के सबसे तेज और सबसे बड़े हिंदी न्यूज चैनल 'आज तक' द्वारा हर साल सजने वाला यह महाकुंभ एक बार फिर सज रहा है. इस वर्ष 'साहित्य आज तक' लखनऊ में 15 और 16 फरवरी को आयोजित हो रहा है. गीत, संगीत, शायरी, कविता, नाटक, विचार, विमर्श और चिंतन के दिग्गजों से गुलजार इस महासंगम के पीछे 'आज तक' का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी और आम जनता को भारतीय भाषा, कला, संगीत और संस्कृति से सीधे जोड़ना है.
'आज तक' की ख़बरों की तरह ही साहित्य भी जन-जन तक पहुंचे, हमारा यही प्रयास है. साहित्य के इस महाकुंभ 'साहित्य आज तक' के दौरान इन दो दिनों में देश-दुनिया में मशहूर कवि, लेखक, कलाकार, संगीतकार, नाटककार, अभिनेता, रंगकर्मी, चिंतक और विचारक एक जगह, एक साथ इकट्ठा होंगे.
'साहित्य आज तक' में साहित्य के साथ ही होगा सुर, सजेगी संगीत की महफिल, होगा चिंतन, विचार और सार्थक संवाद भी...
साहित्य के महाकुंभ 'साहित्य आज तक' में रजिस्ट्रेशन पर एंट्री फ्री है.
प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पटनायक ने धर्म की रक्षा और आत्मज्ञान के बीच संबंध पर गहन चर्चा की. सनातन धर्म, महावीर और हनुमान जी के उदाहरणों से समझाया गया कि सच्चा धर्म क्या है. अहंकार और आत्मज्ञान के बीच अंतर, पैगंबर और दिगंबर परंपरा की तुलना, तथा रामायण और महाभारत से लिए गए प्रसंगों द्वारा धार्मिक कथाओं का वास्तविक अर्थ समझाया गया है. धर्म के नाम पर स्पर्धा और व्यावसायिकता पर भी चर्चा की गई है.
प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पठानिया ने महत्वाकांक्षा और ऋण के बीच संबंध पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि भोग बिना ऋण नहीं होता और जितना लाभ, उतना ऋण. पठानिया ने बताया कि बिलियनेयर्स सबसे बड़े ऋणी होते हैं. उन्होंने यज्ञ परंपरा और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के बीच तुलना की. पठानिया ने कहा कि मोक्ष का मतलब ऋण से मुक्ति है और केवल डुबकी मारने से ऋण मुक्ति नहीं होती. उन्होंने लोगों को महत्वाकांक्षा से बचने की सलाह दी.
सोनरूपा विशाल ने आज तक के कवि सम्मेलन में अपनी शायरी से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने प्रेम, वीरता और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं. बदायूं की इस होनहार कवयित्री ने अपने पिता राष्ट्रीय कवि उर्मिलेश शांकेधर की विरासत को बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ाया.
प्रसिद्ध कवि चंदन राय ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अपनी प्रेम कविताओं से सभी का दिल जीत लिया. उन्होंने युवाओं को प्रेम में स्वाभिमान बनाए रखने का महत्व समझाया, यह कहा कि प्रेम की असफलता पर आत्महत्या करना गलत है. उनकी कविताएं प्रेम की गहराई और जटिलताओं को सरल शब्दों में व्यक्त करती हैं.
जया किशोरी ने धर्म, आध्यात्म और समाज पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि शास्त्रों का मिसइंटरप्रिटेशन हो रहा है और लोग अपने मन की सोच को शास्त्र मान लेते हैं. उन्होंने जोर दिया कि जिज्ञासु होना जरूरी है और शास्त्रों को समझने के लिए किसी ज्ञानी व्यक्ति का मार्गदर्शन लेना चाहिए. साध्वी जी ने युवाओं में बढ़ती धार्मिक रुचि पर खुशी जताई और कहा कि समाज 50% सही दिशा में जा रहा है. उन्होंने राजनीति पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि देश बदल रहा है.
प्रसिद्ध आध्यात्मिक जया किशोरी ने अध्यात्म और सांसारिक जीवन के बीच संतुलन बनाने पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि स्पिरिचुअल व्यक्ति को वैरागी होने की जरूरत नहीं है. जया ने बताया कि बचपन से ही बच्चों को भगवान की कथाएं सुनाकर उनमें आध्यात्मिक मूल्यों का बीजारोपण किया जा सकता है. उन्होंने युवाओं को जल्द से जल्द शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने की सलाह दी और कहा कि इससे जीवन में बेहतरीन बदलाव आएंगे.
आज तक के कार्यक्रम में जया किशोरी ने आस्तिकता और नास्तिकता पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि नास्तिकता में भी समझदारी होनी चाहिए. जो कर्म पर विश्वास करते हैं, वे समझदार नास्तिक हैं. उन्होंने युवाओं को नकारात्मक विचारों से बचने और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी. साथ ही, उन्होंने गीता प्रेस की किताबों की सराहना की और कहा कि इनसे आध्यात्मिक ज्ञान आसानी से समझा जा सकता है. जया ने सभी को अच्छे कर्म करने और समाज को आगे ले जाने का संदेश दिया.
आध्यात्मिक वक्ता जय किशोरी ने शादी और रिश्तों पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शादी जरूर करेंगी, लेकिन अभी वह अपने काम में व्यस्त हैं. जय किशोरी ने बताया कि शादी के लिए सबसे जरूरी है एक-दूसरे का सम्मान. उन्होंने कहा कि रिश्ते चलाने के लिए जीवन भर प्रयास करने पड़ते हैं. जय किशोरी ने गीता के संदर्भ में भी रिश्तों पर अपनी राय रखी.
मनोज मुंतशिर ने बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि बड़े नामों और सरनेमों से डराने की कोशिश बेकार है. मुंतशिर ने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए उत्तर प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि वे चालू डब्बे में मुंबई आएंगे और हवाई जहाज से ऊंचा उड़ेंगे. मुंतशिर ने अपने पूर्वजों के शौर्य का उल्लेख करते हुए फिल्म इंडस्ट्री के बड़े लोगों को चुनौती दी. उन्होंने आदिपुरुष फिल्म के डायलॉग पर माफी भी मांगी.
मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने हिंदुत्व पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि हिंदू और कट्टरता एक साथ नहीं हो सकते. मनोज ने हिंदू धर्म की करुणा और ममता पर जोर दिया. उन्होंने संत नामदेव और महाराज शिवाजी के उदाहरण दिए. मनोज ने कहा कि हिंदू किसी को नहीं डराता और अब किसी से डरता भी नहीं है. उन्होंने हिंदुओं में एकता की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया और राजनीतिक विभाजन से बचने की सलाह दी.
लोकप्रिय गायक मिका सिंह ने लखनऊ में आज तक के लिए एक शानदार प्रस्तुति दी. उन्होंने अपने हिट गानों के साथ-साथ आज तक के लिए एक विशेष गीत भी गाया. कार्यक्रम में उन्होंने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया. मिका ने आज तक की टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यह उनका पसंदीदा न्यूज़ चैनल है. उन्होंने लखनऊ शहर और यहाँ के लोगों की मेहमाननवाजी की भी प्रशंसा की.
साहित्य आजतक कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक लखबीर सिंह लक्खा ने अपने शब्द कीर्तन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने देशभक्ति गीत 'जिंदा पाड़े वतन' के साथ शुरुआत की और फिर माँ दुर्गा, महादेव और हनुमान जी पर भजन गाए. लखबीर जी ने अपनी मधुर आवाज़ में गाए गीतों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. उन्होंने साहित्य और भजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला.
साहित्या आजतक के कार्यक्रम में मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है. उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम जेनरेशन को इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन की चाह छोड़नी होगी और लंबे समय तक मेहनत करनी होगी. मुंतशिर ने अपने 26 साल के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि आज उन्हें लोग जानते हैं. उन्होंने आदि पुरुष विवाद पर भी बात की और कहा कि देश उन्हें माफ कर चुका है.
साहित्या आजतक के कार्यक्रम में मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में जन्मे सभी लोग हिंदू हैं और सबके पूर्वज राम हैं. मनोज ने मुसलमानों से वंदे मातरम बोलने और राम को पूर्वज मानने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि औरंगजेब का इस्लाम भारत में नहीं चलेगा. तिवारी ने अपने हीरो के रूप में राम और कृष्ण का नाम लिया और कहा कि धर्म और राष्ट्र में से चुनाव करना पड़े तो वे राष्ट्र को चुनेंगे.
मनोज मुंतशिर ने फारूक अब्दुल्ला के महाकुंभ संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला उम्रह करने गए तब सेक्युलर नहीं थे. मुंतशिर ने सेक्युलरिज्म को विदेशी अवधारणा बताते हुए कहा कि यह शब्द इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़ा था. उन्होंने जोर देकर कहा कि वे हिंदू हैं और जीवन भर हिंदू रहेंगे, न तो सेक्युलर हैं और न ही कभी सेक्युलर होने पर गर्व करेंगे.
साहित्या आजतक के कार्यक्रम में मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने हिंदुत्व, सेक्युलरिज्म और हिंदू राष्ट्र पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि हिंदू कभी कट्टर नहीं हो सकता और हिंदुत्व को सबसे बड़ा खतरा अपने ही लोगों से है. मुंतशिर ने जोर देकर कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र है और सदैव रहेगा. उन्होंने मुस्लिम समुदाय से राम को पूर्वज मानने और वंदे मातरम बोलने की अपील की. मुंतशिर ने कहा कि धर्म और राष्ट्र में चुनाव की स्थिति में वे सबसे पहले भारत को चुनेंगे.
प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पटनायक ने साहित्य आजतक के मंच से समझाया कुंभ स्नान का वास्तविक अर्थ क्या है. यज्ञ और तप के बीच क्या अंतर है? वेदों में अग्नि और यज्ञ का महत्व समझें. शिव के नृत्य से जानें मंत्रों का गूढ़ अर्थ. भभूत और विभूति का रहस्य. यज्ञ में देवताओं का आह्वान और आहुति का महत्व. मन के परिवर्तन की आवश्यकता. तीर्थ यात्रा का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए? वेदों में भूख और भोग का सिद्धांत. यज्ञ में नैवेद्य और प्रसाद का महत्व. ऋण और मुक्ति का संबंध.
प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पटनायक ने कहा- रामायण के पात्रों के गहरे अर्थ को समझने की जरूरत है. वाल्मीकि ने रावण को शिव भक्त और वेद ज्ञानी क्यों दिखाया? राम और रावण के चरित्र में क्या अंतर है? यज्ञ का वास्तविक अर्थ क्या है? ज्ञान देने और लेने में पाचन शक्ति का क्या महत्व है? सरस्वती और लक्ष्मी के बीच चुनाव कैसे करें? इन सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ें यह लेख.
साहित्य आज तक में देवदत्त पट्टनायक ने महाकुंभ के इतिहास और महत्व पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि कुंभ शब्द का प्रयोग 1857 से शुरू हुआ, इससे पहले इसे माघ मेला कहा जाता था. पट्टनायक ने त्रिवेणी संगम, बृहस्पति ग्रह की स्थिति और कुंभ मेले के विभिन्न स्थानों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने शिव, राम और वेदों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, साथ ही शब्दार्थ और भावार्थ के बीच के अंतर को समझाया.
प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पटनायक ने अपने लेखन प्रक्रिया का रहस्य खोला. उन्होंने बताया कि वे कैसे विभिन्न आयु वर्ग और रुचि के पाठकों के लिए अलग-अलग विषयों पर लिखते हैं. पटनायक ने देवताओं और संगीत के बीच संबंध पर प्रकाश डाला और कहा कि आजकल लोग देवताओं के हाथों में केवल हथियार देखते हैं, वाद्ययंत्र नहीं. उन्होंने बच्चों के लिए एक नई पुस्तक की योजना का खुलासा किया जो देवताओं को संगीत से जोड़ेगी.
साहित्य आजतक लखनऊ 2025 का आज दूसरा दिन है. इस दौरान लेखक और वक्ता देवदत्त पटनायक ने 'वेद की अग्नि, अखाड़े का भभूत: राम, रावण, शिव और कुंभ' सेशन में शिरकत की. उन्होंने कुंभ मेला, शिव, और हिंदू धर्म जैसे विषयों पर गहन चर्चा की. साथ ही उन्होंने रामायण और महाभारत के पात्रों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को भी समझाया. देखें Video.