देशद्रोह
देशद्रोह (Sedition) एक खुला आचरण होता है, जैसे भाषण और संगठन, जो स्थापित आदेश के खिलाफ विद्रोह करता है. देशद्रोह में अक्सर एक संविधान की तोड़फोड़ और स्थापित सत्ता के प्रति असंतोष या विद्रोह को उकसाना शामिल होता है. देशद्रोह में कोई भी हंगामा शामिल हो सकता है, हालांकि इसका उद्देश्य कानूनों के खिलाफ प्रत्यक्ष और खुली हिंसा नहीं है (what is Sedition).
भारत में अब तक कई लोगों के खिलाफ देशद्रोह का आरोप लगाया जा चुका है उनमें 2003 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महासचिव, प्रवीण तोगड़िया (Praveen Togadia) पर कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में भाग लेने के लिए देशद्रोह का आरोप लगाने की मांग की गई थी. 2010 में, लेखिका अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) पर कश्मीर और माओवादियों पर उनकी टिप्पणियों के लिए राजद्रोह का आरोप लगाया गया था. 2007 से दो व्यक्तियों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है. बिनायक सेन (Binayak Sen), एक भारतीय चिकित्सक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, और कार्यकर्ता को देशद्रोह का दोषी पाया गया. वह पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. 10 सितंबर 2012 को, एक राजनीतिक कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी (Aseem Trivedi) को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्टून की एक श्रृंखला पर राजद्रोह के आरोप में 24 सितंबर 2012 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. त्रिवेदी पर अपनी वेबसाइट पर "बदसूरत और अश्लील" सामग्री अपलोड करने का आरोप लगाया गया था (Sedition Charges In India).
कन्हैया कुमार बेगूसराय से फिर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन आरजेडी ने वो सीट इस बार सीपीआई को दे डाली. कांग्रेस अब कन्हैया कुमार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ उतारने की सोच रही है, लेकिन कन्हैया कुमार का बीता हुआ कल आड़े आ जा रहा है - डर है, कहीं लेने के देने न पड़े.