बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) का 5 नवंबर 2024 को निधन हो गया. कुछ दिनों से सेहत खराब चल रही थी और वेंटिलेटर पर जा चुकी थीं. कुछ दिन पहले ही उनके पति बृजकिशोर सिन्हा का निधन हो गया था. शारदा सिन्हा अपने पति के जाने से सदमे में थीं. वे पिछले कई दिनों से दिल्ली के एम्स अस्पताल (AIIMS) में भर्ती थीं. उनके बेटे अंशुमन ने सोशल मीडिया पर मां का हेल्थ अपडेट दिया था.
शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 में बिहार के समस्तीपुर (Samastipur, Bihar) में हुआ था. वे मुख्य रूप से मैथिली और भोजपुरी भाषा में गाती थीं. उन्हें बिहार कोकिला, बिहार की कोयल कहा जाता था. शारदा सिन्हा ने 'विवाह गीत', 'छठ गीत' जैसे कई क्षेत्रीय गीत गाए. शारदा को 1992 में पद्मश्री और 2018 में पद्म विभूषण और 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.
म्यूजिकल फैमिली में जन्मीं शारदा ने बचपन से ही क्लासिकल संगीत में शिक्षा प्राप्त की थी. 1980 में शारदा ने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन से अपने करियर की शुरुआत की थी. लेकिन पॉपुलैरिटी उन्हें छठ पर्व के गाने गाकर मिली.
शारदा ने बॉलीवुड के कुछ फेमस गाने गाए हैं, जिनमें सलमान खान की ‘मैंने प्यार किया’ में ‘कहे तो से सजना’, सलमान और माधुरी दीक्षित की ‘हम आपके हैं कौन’ में ‘बाबुल’ और अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ का ‘तार बिजली से पतले’ गाना शामिल है (Sharda Sinha Songs).
शनिवार की रात केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2025 की लिस्ट जारी की थी जिसमें मनोरंजन की दुनिया के कई सारे सितारों का नाम शामिल है. इसमें बिहार की फोक सिंगर दिवंगत शारदा सिन्हा का भी नाम था. उनके अंशुमन को अपनी दिवंगत मां पर बेहद गर्व हो रहा है. उन्होंने इसे पूरे बिहार को डेडिकेट किया है.
पद्म पुरस्कार 2024 की घोषणा हो गई है. कुल 139 हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा, जिसमें 7 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं. शारदा सिन्हा, जस्टिस जगदीश खेहर, उसामु सुजुकी, नागेश्वर रेड्डी, कुमुदनी, रजनीकांत और एम टी वासुदेवन को पद्म विभूषण मिलेगा. विवेक देबरॉय, मनोहर जोशी, सुशील मोदी, पंकज दास, साध्वी रितंबरा, शेखर कपूर और हॉकी खिलाड़ी श्रीजेश पद्म भूषण से सम्मानित होंगे. क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन सहित 113 हस्तियों को पद्मश्री मिलेगा.
7 हस्तियों को पद्म विभूषण सम्मान दिया गया, 19 हस्तियों को पद्म भूषण सम्मान दिया गया और 113 हस्तियों को इस बार पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा.
मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमान सिन्हा ने खुलासा किया कि उनकी मां को मृत्यु के 54 घंटे पहले पूर्वाभास हुआ था. उन्होंने इस घटना को विस्तार से साझा किया है. इस पूर्वाभास का अनुभव कैसे होता है, यह समझना और उनके साथ कैसे हुआ, यह जानना दिलचस्प है.
इस हफ्ते एंटरटेनमेंट की दुनिया में काफी कुछ हुआ. रुपाली गांगुली पर गंभीर आरोप लगे. वहीं सलमान-शाहरुख खान को धमकी मिली. जानें और क्या खास हुआ.
बिहार कोकिला शारदा सिन्हा, आज पंचतत्व में विलीन हुईं..7 नवंबर को पटना के गुलबी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.
शारदा के यूट्यूब चैनल पर कुछ घंटों पहले उनका एक वीडियो पोस्ट किया गया है. इसमें सिंगर अस्पताल में रियाज करती दिखती हैं. वीडियो में शारदा ऑक्सीजन सपोर्ट पर रियाज करती दिख रही हैं.
बिहार की स्वर कोकिला शारदा सिन्हा के जाने से भोजपुरी इंडस्ट्री को भी गहरा सदमा लगा है. भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह ने पोस्ट कर लिखा- स्वर कोकिला शारदा सिन्हा जी का निधन बेहद दुखद है, ये एक युग का अंत है.
बिहार कोकिला' शारदा सिन्हा अलविदा कह चुकी हैं. 5 नवंबर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में सिंगर ने अंतिम सांस ली थी.आज, गुरुवार को गुलबी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. देखिए आज सुबह
बिहार की जनप्रिय गायिका शारदा सिन्हा का दिल्ली के एम्स में 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया. गुरुवार को उनका पटना के गुलबी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उनके पार्थिव शरीर को पटना के राजेंद्र नगर स्थित उनके आवास पर रखा गया, जहां परिजनों और चाहने वालों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की.
लोकगायिका शारदा सिन्हा का पटना के गुलबी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उनके आखिरी दर्शन के लिए सैकड़ों की तादाद में प्रशंसक जुटे थे. पटना के राजेंद्र नगर स्थित घर से गुलबी घाट तक शारदा का मुक्ति रथ निकाला गया था. हर किसी ने शारदा को नम आंखों से विदाई दी.
छठ के महापर्व के दौरान लोकप्रिय गायिका शारदा सिन्हा का मंगलवार की रात निधन हो गया था. अब गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है. हजारों लोग नम आखों से शारदा को विदाई देने के लिए सड़कों पर जुटे हैं. देखें वीडियो.
छठ पूजा के गीतों से प्रसिद्ध शारदा सिन्हा पिछले छह साल से मल्टीपल मायलोमा नामक ब्लड कैंसर से परेशान थीं. मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जिसमें असामान्य प्लाज्मा कोशिकाएं बढ़ जाती हैं.
लंबे समय से शारदा बीमार थीं. कहते हैं पति ब्रजकिशोर सिन्हा के निधन का उन्हें सदमा लगा था. पति को खोने का दर्द इतना गहरा था कि उनकी तबीयत अक्सर खराब रहने लगी थी.
भोजपुरी लोकगायिका शारदा सिन्हा का निधन हो गया है. दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. अपने छठ गीतों के ज़रिए घर-घर में जगह बनाने वालीं पद्मभूषण शारदा सिन्हा को आज लखनऊ के छठ घाट पर श्रद्धांजलि दी गयी. लोक कलाकारों ने शारदा सिन्हा की तस्वीर के सामने छठ गीत गा कर उनको श्रद्धांजलि दी.
शारदा सिन्हा हमेशा अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने में विश्वास रखती थीं. उन्होंने कभी अपने स्वार्थ को कभी इतना ऊंचा नहीं किया कि उन्हें अश्लील गाने गाने की जरूरत पड़े.
क्या आप जानते हैं सिंगर शारदा सिन्हा की सास शुरुआत में उनकी गायिकी के खिलाफ थीं. बहू को गाने से रोकने के लिए उन्होंने खाना तक छोड़ दिया था.
'बिहार कोकिला' शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमन ने मीडिया से बातचीत के दौरान मां की अंतिम इच्छा बताई.
भोजपुरी लोकगायिका शारदा सिन्हा गायिकी के प्रति अपने समर्पण के लिए जानी जाती थीं. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कुछ भी हो जाए वो दिन में 8 घंटे रियाज जरूर करती थीं. शारदा सिन्हा ने एक बातचीत में बताया था कि कैसे उन्होंने अपनी बेटी को पाला है
आजतक से बातचीत में शारदा ने कहा था कि वो किस्मत सौभाग्य है हमारा. ये लोगों का प्यार है हमारे लिए जो साथ बना रहा सबका. ये प्यार ये प्रेरणा बनी रही.
शारदा सिन्हा नहीं रहीं, तो अब धान रोपनी में भी संगीत नहीं है, मेड़ लगाने और बोअनी (फसल बुआई) में भी कोई आवाज नहीं है. खेत में पानी लगाने के दौरान और फसल काटने के वक्त भी जो सुर गूंजते थे वो सब शांत हो गए हैं. और छठ पूजा की बात ही क्या की जाए.