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सोलर मिशन

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सोलर मिशन

नेशनल सोलर मिशन (Solar Mission) सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों की एक पहल है (Initiative of Government of India). यह मिशन जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना की नीतियों का एक हिस्सा है. इस कार्यक्रम का उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने 11 जनवरी 2010 को 2022 तक 20 GW के लक्ष्य के साथ किया गया था (Solar Mission Inauguration). इसे 2015 के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने 100 GW तक बढ़ा दिया. भारत ने अपनी यूटिलिटी सोलर पावर उत्पादन क्षमता को 26 मई 2014 को 2,650 मेगावाट से लगभग 5 गुना बढ़ाकर 31 मार्च 2017 को 12,288.83 मेगावाट कर दिया. देश ने 2017-18 में 9,362.65 मेगावाट जोड़ा. भारत ने 2022 की समय सीमा से चार साल पहले, 20 GW के मूल लक्ष्य को 2018 में पार कर लिया. भारत में 30 जून 2021 तक 6.1 गीगावॉट की कुल रूफटॉप सौर स्थापित क्षमता थी (India’s Total Rooftop Solar Installed Capacity).

राष्ट्रीय सोलर मिशन का उद्देश्य भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है. मूल योजना के तहत, सरकार का लक्ष्य 2022 तक 20 गीगावाट की कुल स्थापित सौर क्षमता हासिल करना था. भारत सरकार ने 1 जुलाई 2015 को लक्ष्य को 20 GW से बढ़ाकर 100 GW कर दिया. 11 जनवरी 2010 को मिशन शुरू होने के लगभग ढाई महीने बाद 31 मार्च 2010 को भारत में 161 मेगावाट की स्थापित सौर क्षमता थी. 31 मार्च 2015 तक, भारत ने 3,744 मेगावाट की स्थापित सौर क्षमता हासिल कर ली थी (Solar Mission Objective). 

2021-22 तक भारत में 40,000 MW रूफटॉप सोलर क्षमता थी. ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट्स के तहत, 2021-22 में भारत ने 57,000 MW क्षमता हासिल कर ली थी. यानी इस साल तक भारत सरकार ने कुल 97,000 MW सोलर पावर स्थापित कर दिया (National Solar Mission Year-Wise Target).
 

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