पेड़
पेड़ (Tree) इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं (Ecosystem) जो जीवों के लिए जंगल और आवास प्रदान करते हैं. पेड़ प्रजातियों में से अधिकांश एंजियोस्पर्म या एक मजबूत लकड़ी (Angiosperms or Hardwoods) होता हैं, बाकी में से कई जिम्नोस्पर्म या सॉफ्टवुड होते (Gymnosperms or Softwoods) हैं. पेड़ लंबे समय तक जीवित रहते हैं. कुछ पेड़ कई हजार साल पुराने होते हैं. पृथ्वी पर पेड़ का अस्तित्व लगभग 370 मिलियन वर्षों से है. ऐसा अनुमान है कि विश्व में लगभग तीन ट्रिलियन पुराने वृक्ष हैं (Tree Existence).
सबसे पहले पेड़ फर्न, हॉर्सटेल और लाइकोफाइट्स थे, जो कार्बोनिफेरस काल (Tree in Carboniferous period) में जंगलों में उगते थे. पहला पेड़ आर्कियोप्टेरिस को भी कहा जा रहा है. वट्टीजा पेड़ के जीवाश्म 2007 में न्यूयॉर्क में मध्य देवोनियन (Middle Devonian ) में लगभग 385 मिलियन वर्ष पहले पाए गए थे. ये दोनों पेड़ फर्न और जिम्नोस्पर्म के बीच की कड़ी माना जाता है जो ट्राइसिक काल (Triassic period) में विकसित हुआ था (Earliest Trees)
पेड़, जलवायु कटाव (Erosion) को कम करने और उसको नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड निकालते हैं और अपने ऊतकों में बड़ी मात्रा में कार्बन जमा करते हैं (Tree Remove carbon Dioxide from Atmosphere).
पेड़ और जंगल जीव-जंतुओं की कई प्रजातियों के लिए एक आवास प्रदान करते हैं (Tree as home for animals). उष्णकटिबंधीय वर्षावन दुनिया में सबसे अधिक जैव विविधता वाले आवासों में से हैं. पेड़ छाया और आश्रय प्रदान करते हैं साथ ही आम जीवन क सुचारु रूप से चलाने के लिए पेड़ इंसानों की निर्भता हमेशा से रही है. निर्माण के लिए लकड़ी, खाना पकाने और गर्म करने के लिए ईंधन, और भोजन के लिए फल के साथ-साथ कई अन्य कई उपयोग में भी आते हैं (Uses of Tree in Human life). दुनिया के कुछ हिस्सों में, जंगल कम होते जा रहे हैं क्योंकि कृषि के लिए उपलब्ध भूमि की मात्रा बढ़ाने और भवन और सड़क निर्माण के लिए पेड़ों को साफ किया जा रहा है (Tree cutting causes).
पेड़ों को हमेशा विभिन्न संस्कृतियों में पवित्र पेड़ों की तरह सम्मानित किया गया है. भारत में कई पेड़ों की पूजा की जाती है. दुनिया की कई पौराणिक कथाओं में पेड़ों से जुड़ी कई प्राथिमिकताएं बताई गई हैं (Tree for worship in India).
भारत में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या काफी कम हो गई है. जहां दुनिया में औसत प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 400 है, वहीं भारत में यह संख्या काफी कम है.
Tree Number Per person: भारत में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या काफी कम हो गई है. जहां दुनिया में औसत प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 400 है, वहीं भारत में यह संख्या काफी कम है. इसके अलावा पाकिस्तान में हालात और भी खराब हैं.
दिल्ली में पेड़ों की जड़ों पर जमे कंक्रीट को हटाने के लिए एमसीडी ने जून तक की समय सीमा रखी है. साथ ही नगर निगम ने ऐसे 13 हजार से ज्यादा पेड़ों की पहचान की है. साथ ही बताया कि इन 13 हजार पेड़ों में से 12 से ज्यादा पेड़ों से कंक्रीट को हटा लिया गया है और बचे हुए पेड़ों से भी कंक्रीट हटाने का काम जल्दी पूरा कर लिया जाएगा.
तकलीफ में जोर-जोर से चीखते हैं पेड़-पौधे, निकालते हैं अल्ट्रासोनिक साउंड ताकि कोई मदद के लिए आए, स्टडी में बड़ा दा.
परेशानी आने पर हम अकेले नहीं, जो बोलते-बुदबुदाते हैं, पेड़-पौधे भी हमारी ही तरह हैं. वैज्ञानिकों ने पाया कि प्यास लगने पर या किसी तरह की चोट पहुंचने पर उनसे अलग तरह की आवाजें निकलने लगती हैं. ये आवाजें भले ही हमारे कानों तक न पहुंचें, लेकिन आसपास के जीव ये बात समझ लेते हैं. यह एक तरह का अल्ट्रासोनिक साउंड होता है, जो बबल रैप के फूटने जैसा होता है.
जलवायु परिवर्तन की वजह से पकृति में जो भी बदलाव हो रहे हैं, वे धीरे-धीरे हम सबके सामने आ रहे हैं. हाल ही में एक शोध किया गया जिसमें पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया के वर्षावनों (rainforests) के उष्णकटिबंधीय पेड़ (Tropical trees), 1980 के दशक की तुलना में दोगुनी तेजी से खत्म हो रहे हैं.