त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) 2017 और 2021 के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं. वह 1979 से 2002 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे और 2000 में राज्य के गठन के बाद उत्तराखंड राज्य के संगठन सचिव के पद पर रहे. वह 2002 में राज्य के पहले विधान सभा चुनाव में डोईवाला से चुने गए थे. उन्होंने 2007 के चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखी और राज्य के कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया.
भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में, रावत झारखंड के प्रभारी और उत्तराखंड कैडर के अध्यक्ष रहे. 2017 में डोईवाला से दोबारा जीतकर, उनकी पार्टी के बहुमत हासिल करने और सरकार बनाने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री नामित किया गया था. उन्होंने पार्टी द्वारा किए गए 'सामूहिक निर्णय' का हवाला देते हुए 9 मार्च 2021 को पद से इस्तीफा दे दिया.
रावत का जन्म 20 दिसंबर 1960 को उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले में कोटद्वार तहसील के खैरासैन गांव में हुआ था. वह परिवार में नौवें और सबसे छोटे बच्चे थे. उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध श्रीनगर के बिड़ला परिसर से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री प्राप्त की.
1985 में देहरादून क्षेत्र के प्रचारक बनने से पहले रावत 1979 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए.
हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र रावत ने भू-कानून में दी गई राहत पर अपनी राय जाहिर की, जिसमें उन्होंने बताया कि पहाड़ों में निवेश के लिए कानून में सख्त प्रावधानों के तहत राहत दी गई थी. इसके बाद कोविड महामारी ने स्थिति को प्रतिकूल बना दिया. सख्त कानूनों के बावजूद निवेश को प्रोत्साहन देना आवश्यक था, लेकिन महामारी के चलते स्थिति और जटिल हो गई.
उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और पौड़ी से सांसद अनिल बलूनी की सुरक्षा को लेकर अचानक सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है. सवाल किए जा रहे हैं कि दोनों सांसदों की सुरक्षा में क्या कटौती की गई है? सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्टीकरण पेश किया है.
Uttarakhand BJP Meeting: हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव और उपचुनाव को लेकर देररादून में बीजेपी कार्यसमिति की बैठक चल रही है. उपचुनाव में मिली हार के बाद ये बैठक बुलाई गई. जिसमें शामिल होने के लिए सीएम धामी भी पहुंचे है. देखिए VIDEO