5 दिसंबर 2018 को यूपी सरकार ने राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग में 69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. एटीआरई 5 जनवरी 2019 को आयोजित किया गया था. परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले 4.31 लाख उम्मीदवारों में से 4.10 लाख ने इसमें भाग लिया. 12 मई 2020 को परिणाम घोषित किए गए, जिसमें 1.46 लाख उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए थे. अनारक्षित या सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 67.11%, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए 66.73% और अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवारों के लिए 61.01% निर्धारित किया गया था (UP Teacher Recruitment).
1 जून 2020 को बेसिक शिक्षा परिषद, इलाहाबाद के सचिव ने भर्ती प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की. चयनित उम्मीदवारों की दो सूचियां तब जारी की गई थीं, जो कुल 69,000 पदों में से 67,867 थीं. जिसमें एक 11 अक्टूबर 2020 की तारीख वाली, जिसमें 31,277 उम्मीदवार थे और दूसरी 30 अक्टूबर 2020 की तारीख वाली, जिसमें 36,590 उम्मीदवार थे.
अनुसूचित जनजाति (एसटी) उम्मीदवारों के लिए शेष 1,133 पद इस श्रेणी से उम्मीदवारों की अनुपलब्धता के कारण रिक्त दिखाए गए थे.
आरोपों के बाद दोनों सूचियां उन जांच के दायरे में आईं, जिनमें कहा गया था कि उन्हें उम्मीदवारों के श्रेणी-वार अंकों के विभाजन की घोषणा किए बिना प्रकाशित किया गया था.
इसके अलावा, यह आरोप लगाया गया कि अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार कुल चयनित उम्मीदवारों का 50% से अधिक थे और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला. भर्ती को चुनौती देने वाले उम्मीदवारों के अनुसार, ओबीसी उम्मीदवारों को अनिवार्य 27% के मुकाबले 3.86% आरक्षण दिया गया, जबकि एससी उम्मीदवारों को 21% के बजाय 16.2% पदों पर प्रतिनिधित्व दिया गया.
अक्टूबर 2020 से, परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन किया है और कई बार पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई है. 2021 में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने लखनऊ में प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को 'त्वरित और निष्पक्ष' समाधान खोजने का निर्देश दिया था.
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने शिक्षक भर्ती की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी. सरकार को 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा का परिणाम नए सिरे से जारी करने का आदेश भी दिया है. कोर्ट के इस फैसले पर टीचर्स अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं.
सीएम योगी इस मुद्दे पर आगे की रणनीति के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे.
UP Teacher Recruitment Case: उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षकों की भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगा दी. अब 23 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई होगी. आखिर क्या और क्यों उठा ये पूरा विवाद, और अभ्यर्थियों ने इस पूरे विवाद पर क्या कहा? देखें ये वीडियो.
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें सरकार को इस भर्ती की मेरिट लिस्ट रद्द करने और तीन महीने में दोबारा तैयार करने का आदेश दिया था. यह रोक 25 सितंबर तक लगाई गई है. साथ ही SC ने उत्तर प्रदेश सरकार और हाईकोर्ट में पक्षकारों को नोटिस भेजकर अधिकतम सात पन्नों लिखित जवाब मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल हाईकोर्ट का वो फैसला लागू नहीं होगा जिसमें हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 69000 शिक्षक भर्ती में बनाई गई मेरिट लिस्ट को रद्द कर 3 महीने में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती पर अगली सुनवाई 23 सितंबर को तय की है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी है और सभी पक्षकारों से लिखित दलीलें मांगी हैं. हाईकोर्ट ने पहले मेरिट लिस्ट को रद्द करने और तीन महीने में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था.
69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती को लेकर सैकड़ों की तादाद में अभ्यर्थी लखनऊ में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के आवास पर प्रदर्शन कर रहे हैं. ये लगातार पांचवां दिन है जब शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन लखनऊ में हो रहा है. देखें 'ब्रेकिंग न्यूज'.
अभ्यर्थियों के मुताबिक, वह शाम तक यहां पर बैठेंगे. उन्होंने कहा कि आज शिक्षक दिवस है, आज उनको कॉलेज के स्कूल में होना चाहिए था लेकिन आज वह दर-दर की ठोकर खा रहे हैं.
69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी लखनऊ में यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के आवास पर प्रदर्शन कर रहे हैं. ये लगातार तीसरा दिन है जब शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन लखनऊ में हो रहा है. इससे पहले केशव प्रसाद मौर्य औरअनुप्रिया पटेल के घर के बाहर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था. देखें 'ब्रेकिंग न्यूज'.
लखनऊ में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है. केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के आवास पर अभ्यर्थी 'न्याय दिलाओ' के नारे लगा रहे हैं. गौरतलब है कि कल डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर पर भी प्रदर्शन हुआ था. देखें VIDEO
69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती को लेकर सैकड़ों की तादाद में अभ्यर्थी लखनऊ में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के आवास पर प्रदर्शन कर रहे हैं. अभ्यर्थी आज लगातार दूसरे दिन लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे हैं. कल डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर पर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था. देखें 'ब्रेकिंग न्यूज'.
यूपी के लखनऊ में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन चल रहा है. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास के पास चौराहे का घेराव करने पर पुलिस ने अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया. कोर्ट के आदेश के बावजूद देरी का आरोप अभ्यर्थी लगा है. वह जल्द से जल्द अपना नियुक्ति पत्र देने की मांग कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधित गड़बड़ घोटाले के विरोध में अभ्यर्थी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस भर्ती मामले में न्याय होना चाहिए.
Teachers Online Attendance Rule: बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ ने कहा है कि 01 अक्टूबर से केवल उन्हीं शिक्षकों को वेतन दिया जाएगा जिनकी एप्लिकेशन पर ऑनलाइन अटेंडेंस होगी. नए आदेश में यह भी कहा गया है कि एक सितंबर को सभी शिक्षक एप्लिकेशन को अपडेट कर लेंगे. अटेंडेंस को लेकर नए विकल्प जोड़े गए हैं.
शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में बनाई गई मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया था. अब, चयनित अभ्यर्थी रवि सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद्द करने के बाद ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार 69000 शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची न बनाई जाए. इससे सामान्य वर्ग के छात्रों का अहित होगा.
अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षक पहले से ही नौकरी खोने के डर से डरे हुए हैं, लोन वसूरी से उनपर अत्यधिक मानसिक दबाव बढ़ेगा. जब इन लोन की वसूली के लिए बैंक उनके घरों पर जाएगा तो उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचेगी. इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम निकलेंगे क्योंकि आर्थिक-सामाजिक-मानसिक रूप से प्रभावित शिक्षक का असर शिक्षण पर भी पड़ेगा.