उत्तराखंड हाई कोर्ट
उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) भारत के उत्तराखंड राज्य का उच्च न्यायालय है. यह अदालत नैनीताल में स्थित है (Uttarakhand High Court Principal Seat). इस कोर्ट की स्थापना उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत, उत्तराखंड राज्य को उत्तर प्रदेश राज्य से 9 नवंबर 2000 को अलग किए जाने के दिन हुई थी (Uttarakhand High Court Formation).
न्यायालय के पास अपीलीय के अलावा मूल क्षेत्राधिकार है. इस न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयों की अपील केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है. उत्तराखंड हाई कोर्ट की स्थापना के समय स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 7 थी, जिसे 2003 में बढ़ाकर 9 कर दिया गया. मौजूदा वक्त में इसकी 11 न्यायाधीशों की क्षमता है, जिनमें से 9 स्थायी और 2 अतिरिक्त जज हो सकते हैं (Uttarakhand High Court Sanctioned Strength).
न्यायमूर्ति अशोक देसाई उत्तराखंड हाई कोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश थे (First Chief Justice of Uttarakhand High Court). उत्तराखंड के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सरोश होमी कपाड़िया और जगदीश सिंह खेहर बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने (CJI from Uttarakhand High Court). उत्तराखंड उच्च न्यायालय के भवन का निर्माण 1900 में सैंटोनी मैकडोनाल्ड ने करवाया था (Uttarakhand High Court Building).
उत्तराखंड में बीजेपी की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू किया है, जिससे सभी नागरिकों पर समान कानून लागू होगा. हालांकि, इसके विरोध में याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि यूसीसी के तहत प्रभावित लोग कोर्ट में अपील कर सकते हैं.
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बागेश्वर जिले में खड़िया खनन पर 9 जनवरी 2025 तक रोक लगाई है. अवैध खनन से कांडा तहसील के गांवों में दरारें और भू-स्खलन का खतरा बढ़ गया है. कोर्ट ने राज्य स्तरीय टीम और कोर्ट कमिश्नरों को नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी.
Uttarakhand News: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को पैनल में शामिल करने के दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
इससे पहले 30 अगस्त को मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस रवींद्र मैठाणी की एकल पीठ ने इस कानूनी सवाल पर फैसला सुरक्षित रख लिया था कि इस मामले की सुनवाई एकल पीठ करेगी या खंडपीठ.
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि वह एक अनुशासनहीन बच्चा है, जो बुरी संगत में पड़ गया है. उसे सख्त अनुशासन की जरूरत है. रिहा होने पर उसके साथ और भी अप्रिय घटनाएं हो सकती हैं.
उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उस नियम को रद्द कर दिया, जो गर्भवती महिलाओं को सरकारी नौकरियों के लिए उपयुक्त मानने से रोकता था. हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, मातृत्व महान आशीर्वाद है. इसके कारण महिलाओं को नौकरी या प्रमोशन से वंचित नहीं किया जा सकता है. महिलाओं के साथ उनकी गर्भावस्था की स्थिति के आधार पर भेदभाव न किया जाए.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिछले साल 26 नवंबर को करोड़ों रुपयों के उद्यान घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश दे दिए थे. सीबीआई ने अपनी जांच पड़ताल शुरू भी कर दी. जांच डेढ़ महीने से अधिक समय चली. लेकिन जांच के दौरान कई बड़े नाम आने के बाद सरकार अब उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पहुंची थी.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक SHO को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज करने के आरोप में निलंबित करने का आदेश जारी किया है. हाईकोर्ट ने यह फैसला एक रिजॉर्ट मालिक की याचिका पर दिया है. याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में पुलिस अधिकारी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम बात कही. हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाएं अपने पार्टनर्स के खिलाफ बलात्कार विरोधी कानून का हथियार के रूप में दुरुपयोग कर रही हैं.
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है. अदालत ने राज्य सरकार की उपरोक्त निष्क्रियता को केंद्रीय अधिनियम, लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013, की धारा 63 का उल्लंघन माना है.
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला में लव जिहाद के खिलाफ 15 जून को महापंचायत बुलाई गई थी. पुलिस ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया था. जबकि हिंदू जागृति मंच और व्यापार मंडल महापंचायत करने पर अड़े हैं. हिंदू संगठनों ने पुरोला स्टेट हाईवे को ब्लॉक कर दिया है और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं.
नैनीताल में इन दिनों ट्रैफिक जाम के कारण हालत यह है कि सड़क पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है. यातायात प्रबंधन में पुलिस/प्रशासन फेल नजर आ रहा है. हाईकोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि स्थानीय प्रशासन ने यातायात प्रबंधन को नजरअंदाज किया है. वाहनों की भारी भीड़ के कारण स्कूली बच्चों, बीमार लोगों, बुजुर्गों का खास तौर पर सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है.
उत्तराखंड हाई कोर्ट में एक हिंदू लड़की ने याचिका दाखिल की है. इसमें उसने कलियर शरीफ में नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी है. उसने बताया कि उसका नमाज पढ़ने का मन करता है और वो अपने सहकर्मी के साथ कलियर शरीफ में नमाज पढ़ना चाहती है. मगर, कुछ संगठन उसका विरोध करते हैं.
उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक हिंदू लड़की ने याचिका दाखिल कर कलियर शरीफ में मुस्लिम दोस्त के साथ नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी थी. गुरुवार को कोर्ट ने अनुमति भी दे दी. अब इस पूरे मामले में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है. लड़की ने जिस लड़के के साथ कलियर शरीफ जाकर नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी थी, उस पर ही वो रेप का आरोप लगा चुकी है.
उत्तराखंड हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाओं के जरिए जोशीमठ में 600 से ज्यादा घरों में आई दरारों की भयावहता का जिक्र किया है. याचिका में कहा गया है कि कर्णप्रयाग में 50 से ज्यादा घरों में दरारे आ चुकी हैं. इन घरों में रहने वाले परिवार पीपलकोटी या अन्य जगह शिफ्ट किए गए हैं. उनके रहने का जो दर्जा और सुविधाएं हैं वो मानवीय नजरिए से समुचित नहीं है. उन विस्थापित पीड़ितों को ना ही उचित मुआवजा मिला है.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सभी प्लास्टिक पैकेजिंग कम्पनियां, जो उत्तराखंड के अंदर कार्यरत हैं, उनके इपीआर प्लान सेंटर पोर्टल पर अपलोड करने को कहा है. कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से उनके यहां रजिस्टर्ड कम्पनियां, जो उत्तराखंड में कायर्रत है उनका कल्ट बैग प्लान राज्य प्रदूषण बोर्ड के साथ साझा करने को कहा है.
न्यायालय ने 1971 के मैडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट का हवाला देते हुए गर्भपात के लिए दी गई समय सीमा पर भी गौर करते हुए यह निर्णय लिया. न्यायालय ने मैडिकल बोर्ड से ये भी कहा कि, किशोरी के पिता से लिखित में कंसेट ले लिए जाएं और उसमें न्यायालय में वर्चुअली दिए गए कंसेंट का भी जिक्र कर दिया जाए. मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होनी तय हुई है.
उत्तराखंड सरकार ने विधायक उमेश शर्मा से जुड़े राजद्रोह के केस में यू-टर्न ले लिया है. धामी सरकार ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के राज में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी वापस लेने की अर्जी दी थी. इस पर राजनीति शुरू होने के बाद अब सरकार ने अर्जी वापस न लेने का फैसला किया है. इस संबंध में गृह मंत्रालय ने वकील को पत्र भी लिख दिया है.
उत्तराखंड में सीएम पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच के मसले से खुद को अलग करने का फैसला लिया है. राज्य सरकार ने SC से उस अपील को वापस लेने का आग्रह किया है, जिसमें उसने रावत के खिलाफ सीबीआई जांच के नैनीताल के HC के आदेश को चुनौती दी थी.
उत्तराखंड के एक जज से रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने वाले शख्स का पता लगा लिया है. आरोपी छत्तीसगढ़ की बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद है. उसने इससे पहले भी कई प्रमुख व्यक्तियों को इसी तरह पत्र भेजकर धमकी दी थीं, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है. जोकि एक महीने के भीतर जांच सौंपेगी. इसके साथ ही सचिव मुकेश सिंघल को एक महीने की फोर्स लीव पर भेजा गया है. विधानसभा की गरिमा बचाना मेरा धर्म है. लोकतंत्र के मंदिर में अध्यक्ष होने के नाते किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.