विक्रम लैंडर
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित दूसरे चंद्र अन्वेषण मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) में विक्रम लैंडर (Vikram Lander) भी शामिल था, जो भारत में विकसित किया गया था (Vikram Lander Developed in India). इसका मिशन चांद की सतह की संरचना में अंतर के साथ-साथ यहां मौजूद जल की मैपिंग और अध्ययन करना था (Vikram Lander Mission)
मिशन के लैंडर का नाम कॉस्मिक रे वैज्ञानिक विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) (1919-1971) के नाम पर रखा गया है (Vikram Lander Naming). उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक के रूप में माना जाता है (Founder of Indian Space Programme). अपने मिशन के दौरान विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हुआ और अपने 800 एन तरल मुख्य इंजन का उपयोग करके 30 किमी × 100 किमी की चांद की निचली कक्षा में उतरा. अपने सभी ऑन-बोर्ड सिस्टमों की जांच करने के बाद, इसने एक सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास किया, जिसने रोवर की तैनाती की, और लगभग 14 दिनों के लिए वैज्ञानिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया (Vikram Lander Journey). इसी प्रयास के दौरान विक्रम दुर्घटनाग्रस्त हो गया (Vikram Lander Accident). लैंडर और रोवर का संयुक्त द्रव्यमान लगभग 1,471 किलोग्राम था (Vikram Lander Mass).
लैंडर की प्राइमरी कंफिगरेशन स्टडी 2013 में अहमदाबाद में स्पेस अप्लीकेशंस सेंटर (SAC) ने पूरा किया था. लैंडर के प्रणोदन प्रणाली में एटीट्यूड कंट्रोल के लिए आठ 58 एन (13 एलबीएफ) थ्रस्टर शामिल थे और इसरो के 440 एन (99 एलबीएफ) liquid apogee motor से प्राप्त पांच 800 एन (180 एलबीएफ) तरल मुख्य इंजन शामिल थे. शुरुआत में, लैंडर डिजाइन में चार मुख्य थ्रॉटल-सक्षम तरल इंजन लगे थे, लेकिन लैंडिंग से पहले चंद्रमा की परिक्रमा करने की नई आवश्यकताओं को संभालने के लिए इसमें एक सेंट्रली माउंटेड फिक्स्ड-थ्रस्ट इंजन जोड़ा गया था. सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान अतिरिक्त इंजन से ऊपर की ओर उठने वाली चांद के धूल को कम करने की उम्मीद थी. विक्रम को 12 डिग्री तक की ढलानों पर सुरक्षित रूप से उतरने के लिए डिजाइन किया गया था (Vikram Lander Engine).
इसमें एक उच्च रिजॉल्यूशन वाला कैमरा, लेज़र अल्टीमीटर (LASA), लैंडर हैजर्ड डिटेक्शन अवॉइडेंस कैमरा (LHDAC), लैंडर पोजीशन डिटेक्शन कैमरा (LPDC), लैंडर हॉरिजॉन्टल वेलोसिटी कैमरा (LHVC), एक 800 N थ्रॉटलेबल लिक्विड मेन इंजन, जैसी आधुनिक तकनीकों को लगाया गया (Vikram Lander Associated Technologies).
ISRO ने चांद और धरती की नई तस्वीर जारी की है. ये फोटोग्राफ्स और वीडियो 17 अगस्त की दोपहर तब ली गई थीं, जब विक्रम लैंडर और प्रोपल्शन मॉड्यूल अलग हो रहे थे. ये ठीक उनके अलग होने के बाद विक्रम में लगे लैंडर इमेजर L1 कैमरा-1 से ली गई थीं. आप भी देखिए ये अद्भुत Photos...
इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा है कि चंद्रयान-3 मिशन पूरा हो चुका है. विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर को जो काम दिया गया था, उन दोनों ने अपना काम सफलतापूर्वक पूरा कर दिया है. अब वो चैन की नींद सो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब तक सूरज-चांद रहेंगे तब तक चंद्रयान-3 रहेगा. देखें ये वीडियो.
आमतौर पर शुक्र ग्रह के लिए बेहतरनी लॉन्च विंडो हर 19 महीने के बाद आता है. लेकिन अगर अनुमति मिलने में देरी, पेलोड्स तैयार होने में और रॉकेट तय करने में समय लगेगा. तो लॉन्च देरी से होगा. ऐसा नहीं है कि बीच में समय नहीं मिलेगा. इसरो ने शुक्रयान की लॉन्चिंग के लिए बैकअप प्लान तैयार कर रखा है.
Chandrayaan-3 का रोवर Pragyan चांद की सतह पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह और ISRO के लोगो की छाप चांद की सतह पर स्पष्ट तौर पर नहीं छोड़ पाया. यानी शिव शक्ति प्वाइंट के आसपास की जमीन पर मिट्टी कम पत्थर ज्यादा है. यह एक अच्छी खबर इसलिए हैं क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को उस सतह की असलियत पता चलेगी.
चंद्रमा के शिव शक्ति बिंदु पर आज सूर्योदय होने की उम्मीद है. मतलब, जल्द ही चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर को उपयोगी मात्रा में सूर्य का प्रकाश मिलने लगेगा. इसरो 22 सितंबर को विक्रम और प्रज्ञान के साथ फिर संचार स्थापित करने का प्रयास करेगा.
5 सितंबर से पहले ही Chandrayaan-3 का विक्रम लैंडर सो गया था. अंधेरे वाले चांद में कैसा दिख रहा है Vikram Lander? यह जानने के लिए चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर को भेजा गया. उसने 6 सितंबर को विक्रम लैंडर की तस्वीर ली. ISRO ने अब यह तस्वीर जारी की है, जो रात में चंद्रयान-3 के लैंडर को दिखा रही है.
चंद्रमा पर मौजूद विक्रम लैंडर की धरती से दूरी कितनी है?
Chandrayaan-3 का विक्रम लैंडर अब रात के अंधेरे में जा चुका है. 5 सितंबर 2023 को वह चांद की रात के आगोश में चला गया. इस फोटो में आपको उसके सोने से ठीक पहले का नजारा मिलेगा. जहां पर शिव शक्ति प्वाइंट लाल घेरे में दिख रहा है. यह वही प्वाइंट है जहां पर विक्रम लैंडर उतरा है.
ISRO ने विक्रम लैंडर की रंगीन 3डी इमेज जारी की है. साथ ही अपील की है अगर इसे आप थ्रीडी चश्मे से देखेंगे तो आपको अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. यह फोटो इससे पहले ब्लैक एंड व्हाइट में जारी की गई थी. इस फोटो को 49 फीट दूर से प्रज्ञान रोवर ने अपने नैवकैम से क्लिक किया था.
14 दिन के लिए स्लीप मोड में चंद्रयान का विक्रम लैंडर
दस दिन तक चांद से जुड़े अनसुलझे राज सुलझाने की कोशिशों के बाद आखिर हमारा प्रज्ञान रोवर गहरी नींद में सो गया. चांद पर अब एक लंबी रात है और माइनस 200 के पारे में प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर का काम करना मुमकिन नहीं है. लेकिन स्लीप मोड में जाने से पहले रोवर और लैंडर ने कई ऐसी जानकारियां हम को दे दी है जिनसे मानवता का भला हो सकता है.
Chandrayaan-3 के रोवर प्रज्ञान ने अपने बड़े भाई विक्रम से कहा- भैया जी... स्माइल प्लीज! इसके बाद उसने अपने नेविगेशन कैमरे से विक्रम लैंडर की तस्वीर ली. जिसमें लैंडर मजबूती के साथ चांद की समतल सतह पर खड़ा है. इसमें उसके दो यंत्रों के बारे में भी बताया गया है. आप भी देखिए...
भारत का मून मिशन सफल रहा है और प्रज्ञान रोवर धरती पर चांद की कई अहम जानकारियां भेज रहा है. भारत के रोवर के अलावा चांद पर चीन का रोवर Yutu 2 भी सक्रिय है. चीन ने साल 2019 में इसे चांद पर भेजा था.
Chandrayaan-3 के विक्रम लैंडर ने चांद की सतह का तापमान बताया है. लैंडर में एक खास तरह का थर्मामीटर भेजा गया है, यह थर्मामीटर चांद की सतह के ऊपर और सतह से 10 सेंटीमीटर नीचे यानी करीब 4 इंच नीचे तक का तापमान सिर्फ देखकर नाप सकता है. उसे ड्रिलिंग करने की जरुरत नहीं है. जानिए क्या बताया है ISRO ने...
चंद्रयान 3 के विक्रम लैंडर से प्रज्ञान रोवर की चांद की सतह पर चहलकदमी करने का वीडियो सामने आया है. सोशल मीडिया पर इसरो ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए बताया कि कैेसे रोवर और लैंडर के बीच मजेदार बातचीत हुई है.
इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ ने गुरुवार को बताया है कि चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान दोनों अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और आगे भी हलचल होती रहेगी. हालांकि, उन्होंने आगे आने वाली चुनौतियों को लेकर भी अगाह किया है. इसरो चीफ का कहना है कि चूंकि, चांद पर वायुमंडल मौजूद नहीं है. ऐसे में कोई भी वस्तु चंद्रयान-3 को हिट कर सकती है.
ISRO ने नई खुशखबरी दी है. लैंडर से निकलने के बाद प्रज्ञान रोवर अब तक 26 फीट की दूरी तय कर चुका है. उसके दोनों पेलोड्स ऑन हैं. काम कर रहे हैं. इसके अलावा इसरो ने बताया कि प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर और रोवर के सभी पेलोड्स अब काम कर रहे हैं. तीनों का कम्यूनिकेशन बेंगलुरु स्थित सेंटर से बना हुआ है.
Chandrayaan-3 चांद पर उतरा. पूरे देश और दुनिया ने खुशी मनाई. लेकिन उतरने से ठीक पहले '15-20 मिनट ऑफ टेरर' क्या था? ये असल में वह समय था तब इसरो वैज्ञानिकों समेत पूरे देश की सांसें थमी थीं. सफल लैंडिंग होगी या नहीं इसे लेकर चिंता थी. अब समझिए इसे आसान शब्दों में...
Chandrayaan-3 का लैंडर जहां उतरा है, वहां की तस्वीर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने भेजी हैं. तस्वीर में साफ-साफ चंद्रयान-3 का लैंडर दिख रहा है. यहां दो फोटो का कॉम्बो है, जिसमें बाईं तरफ वाली फोटो में जगह खाली है. दाहिनी फोटो में विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरा हुआ दिखता है. आप भी देखिए इस शानदार तस्वीर को...
23 अगस्त की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग हुई. चांद पर लैंडिंग के 4 घंटे बाद 'प्रज्ञान' विक्रम लैंडर से बाहर निकला. प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा पर सैर करना शुरू भी कर दिया. अब अगले 14 दिन तक प्रज्ञान के जरिए चंद्रमा के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी.
Chandrayaan 3: भारत का मून मिशन योजना के मुताबिक काम कर रहा है. बुधवार को चंद्रयान-3 का लैंडर सफलतापूर्वक चांद की सतह पर लैंड कर गया और अब उसके रोवर प्रज्ञान ने भी काम करना शुरू कर दिया है. हालांकि, कनाडा के पहले अंतरिक्ष यात्री का कहना है कि असली काम तो अब शुरू होगा.