विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) कांग्रेस के एक राजनीतिज्ञ हैं. वह वर्तमान में शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा के सदस्य हैं. वह हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं. उनकी मां प्रतिभा सिंह, मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं.
उनकी सक्रिय राज्य राजनीतिक यात्रा 2013 में शुरू हुई और वह हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े. उन्हें वर्ष 2013 से वर्ष 2017 तक हिमाचल प्रदेश राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चुना गया था.
अपने पिता की मृत्यु के बाद 10 जुलाई 2021 को विक्रमादित्य सिंह को रामपुर के पदम पैलेस में एक निजी समारोह में बुशहर की तत्कालीन रियासत के राजा का ताज पहनाया गया था. उनके पिता स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह, हिमाचल प्रदेश के छह बार पूर्व मुख्यमंत्री
विक्रमादित्य सिंह का जन्म 17 अक्टूबर 1989 को शिमला जिले में बुशहर रियासत के शाही राजपूत परिवार में हुआ था. विक्रमादित्य पूर्व न्यायाधीश अभिलाषा कुमारी के भाई हैं.
विक्रमादित्य सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा बिशप कॉटन स्कूल, शिमला से की. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से इतिहास में बीए और सेंट स्टीफंस कॉलेज से एमए किया.
आज तक संवाददाता अंजना ओम कश्यप ने हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से हरियाणा, जम्मू-कश्मीर चुनाव 2024, कांग्रेस, बीजेपी, विकास समेत कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की है. इसी दौरान सुक्खू ने विक्रमादित्य सिंह के साथ टकराव के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि युवा है, सिख रहा है. देखें वीडियो.
विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि 2023 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया था. उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि एक्ट के तहत लोगों का रजिस्ट्रेशन और रेगुलराईजेश जरूरी है.
हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह के 'नेम प्लेट' फैसले पर कांग्रेस पार्टी की खूब नाराजगी देखने को मिली है. इस विवाद को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने अपनी नाराजगी जताई है और विक्रमादित्य से मुलाकात कर उन्हें इस फैसले को वापस लेने का निर्देश दिया है.
यूपी की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने भी दुकानदारों को फरमान जारी किया है और वेंडर्स, होटल मालिकों, ढाबा वालों को अपना नाम और पहचान लिखना अनिवार्य कर दिया है. हालांकि, अब कांग्रेस हाईकमान ने विक्रमादित्य के फैसले के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है.
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फैसला किया कि रेहड़ी पटरी और सड़क किनारे की दुकानों में दुकानदार का नाम स्पष्ट लिखा होना चाहिए. यूपी में इस आदेश के बाद अधिकारी सड़क पर उतरकर कार्रवाई भी कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश में भी ऐसा ही कुछ फरमान जारी किया गया. जिसके बाद मंत्री विक्रमादित्य सिंह नप गए! देखें वीडियो.
हिमाचल प्रदेश की सरकार ने भी योगी सरकार की तरह ही खाने-पीने की दुकानों पर नेमप्लेट लगाने जरूरी का फरमान जारी किया तो कांग्रेस खुद ही घिर गई. बीजेपी सुक्खू सरकार के फैसले पर कांग्रेस से सवाल खड़ा कर रही है. वहीं, नेमप्लेट की लड़ाई हिंदू-मुस्लमान तक पहुंच चुकी है. देखें सईद अंसारी के साथ स्पेशल रिपोर्ट.
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यूपी की तरह ही दुकानों पर फोटो युक्त पहचान पत्र लगाना अनिवार्य करने ऐलान किया था. जिसे लेकर राजनीतिक घमासान मच गया. बीजेपी से लेकर कांग्रेस के बीच इसे लेकर अंतर्कलह शुरू हो गया. वहीं, कांग्रेस के इस फैसले को लेकर कई अन्य दलों ने विरोध जताया है. देखें चित्रा त्रिपाठी के साथ दंगल.
कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, हिमाचल में शांति बनाना हमारी जिम्मेदारी है. हिमाचल में बाहर के राज्यों के लोगों का स्वागत है लेकिन प्रदेश की आंतिरक सुरक्षा बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है. लॉ एंड ऑर्डर हमारी जिम्मेदारी है. हाइजिन को सही रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है.
कांवड़ यात्रा के समय सहारनपुर में वेंडरों को अपनी पहचान बताना योगी सरकार ने जरूरी कर दिया था. इसे फैसले का डटकर विरोध करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अपनी पार्टी की सरकार के फैसले पर अभी तक क्यों चुप्पी साधे बैठे हैं ?
हिमाचल में भी यूपी की तर्ज पर हर भोजनालय और फास्ट फूड कॉर्नर, रेहड़ी पर मालिक की आईडी लगाई जाएगी, ताकि लोगों को किसी भी तरीके की परेशानी न हो. इसके लिए शहरी विकास एवं नगर निगम की बैठक में निर्देश जारी कर दिए गए हैं. शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर यह जानकारी दी. देखें वीडियो.
हिमाचल प्रदेश में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर रेहड़ी-फड़ी वालों को पहचान के लिए नाम और आईडी लगाना होगा. कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि अब खाने-पीने की दुकानों और फास्ट फूड के मालिक का पहचान पत्र दिखाएंगे. देखिए VIDEO
कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि अब खाने-पीने की दुकानों और फास्ट फूड के मालिक का पहचान पत्र दिखाएंगे, जिससे लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
Shimla Mosque Protest: हिमाचल की कांग्रेस सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी आरोप लगाया कि संजौली में मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से किया गया है. उन्होंने इसके निर्माण की जांच की मांग की.
आरोप है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगी एक महिला सीआईएसएफ कांस्टेबल ने कंगना को थप्पड़ मार दिया. इस मामले में आरोपी कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है. साथ ही उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है और जांच बैठा दी गई है. सोशल मीडिया पर कोई इस घटना को सही बता रहा है तो कोई इसकी आलोचना कर रहा है. आरोपी महिला कांस्टेबल के समर्थन में भी कुछ नेता और लोग आ गए हैं.
Himachal Pradesh-Uttarakhand Lok Sabha Results Updates: हिमाचल प्रदेश की मंडी से कंगना रनौत और उत्तराखंड के नैनीताल-उधमसिंह नगर अजय भट्ट को जीत मिली है. भारतीय जनता पार्टी का साल 2024 में प्रदर्शन साल 2019 लोकसभा चुनाव जैसा ही है. हिमाचल की चारों सीट बीजेपी अपने नाम कर चुकी है. वहीं उत्तराखंड में पांचों सीटों पर बीजेपी जीत हासिल कर चुकी है.
हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट एक हाई-प्रोफाइल मुकाबला बनकर उभरी है. इस सीट से बीजेपी ने बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत पर दांव लगाया था, तो वहीं कांग्रेस ने पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को उम्मीदवार बनाया था. एग्जिट पोल की मानें तो इस सीट पर कंगना रनौत की हवा है और वह इस चुनाव में जीतकर संसद पहुंच सकती हैं.
लोकसभा चुनाव 2024 के इंडिया टुडे और एक्सिस माई इंडिया के सबसे सटीक एग्जिट पोल के नतीजे आ गए हैं. मगर हॉट सीट मंडी पर कंगना रानौत और विक्रमादित्य सिंह के बीच कड़ी टक्कर है. अब देखना यह होगा कि क्या मंडी की जनता कंगना रानौत को मौका देगा या फिर विक्रमादित्य सिंह फिर से चुनाव जीत जाएंगे.
हिमाचल प्रदेश का मंडी सीट इस लोकसभा चुनाव में खासा चर्चा में है. इस सीट पर बीजेपी की तरफ से बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और मौजूदा सांसद प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. जैसा कि 1 जून को मंडी सीट पर भी वोटिंग होनी है, आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर इस सीट का क्या इतिहास है और इस चुनाव में किसके पक्ष में माहौल है?
कंगना रनौत और विक्रमादित्य दोनों की ही सफलता और असफलता, उनकी पार्टियों से मिलने वाले सपोर्ट पर निर्भर हैं. विक्रमादित्य की कहानी तो सबको पता है. अभी कुछ दिनों पहले तक पार्टी में उनकी विश्वसनीयता ही खतरे में थी. पर कंगना के साथ भी ऐसा नहीं है कि पार्टी में सब ठीक हो.
हिमाचल की मंडी सीट से बीजेपी की कंगना रनौत और कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह के बीच मुकाबला हो रहा है. ये चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चुका है. 1952 में 2019 तक इस सीट को जिसने भी जीता, केंद्र में उसी की सरकार बनी है. इस बार कौन मारेगा बाजी? क्या है जनता का मूड? देखें जॉय ई-बाइक रिपोर्टर.
लोकसभा चुनाव 2024 अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. लेकिन अंतिम दो चरण से पहले हिमाचल प्रदेश के मंडी में मामला गरमाया हुआ है. कंगना रनौत और विक्रमादित्य के बीच मुकाबला है. दोनों ही प्रत्याशियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. देखिए VIDEO