विवेकानंद रॉक मेमोरियल
विवेकानंद रॉक मेमोरियल (Vivekananda Rock Memorial) भारत (India) के सबसे दक्षिणी सिरे, तमिलनाडु (Tamil Nadu) के कन्याकुमारी (Kanyakumari) में स्थित एक स्मारक है. यह स्मारक वावथुरई (Vavathurai) की मुख्य भूमि से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित दो चट्टानों में से एक पर स्थित है (Vivekananda Rock Memorial Location).
यह 1970 में स्वामी विवेकानंद के सम्मान में बनाया गया था. कहा जाता हा कि उन्होंने इसी चट्टान पर ज्ञान प्राप्त किया था. किवदंतियों के अनुसार, इस चट्टान पर देवी कन्याकुमारी यानी पार्वती ने भगवान शिव की भक्ति में तपस्या की थी. इस मेमोरियल में ध्यान मंडपम के नाम से जाना जाने वाला एक ध्यान हॉल भी है जो स्मारक से जुड़ा हुआ है. मंडप के डिजाइन में पूरे भारत से मंदिर वास्तुकला की विभिन्न शैलियों को शामिल किया गया है. चट्टानें लक्षद्वीप सागर से घिरी हुई हैं जहां तीन महासागर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal), हिंद महासागर (Indian Ocean) और अरब सागर (The Arabian Sea) मिलते हैं. स्मारक में दो मुख्य संरचनाएं हैं, विवेकानंद मंडपम और श्रीपाद मंडपम (Vivekananda Rock Memorial Structure). यह एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है. सालों भर यहां सौलानियों का तांता लगा रहता है.
इतिहासकारों के मुताबिक स्वामी विवेकानंद, कन्याकुमारी के इस समुद्र को तैरते हुए इसके बीच में स्थित चट्टान तक पहुंचे थे. उन्होंने इस चट्टान पर तीन दिनों तक ध्यान किया और उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई (Vivekananda Rock Memorial History).
जनवरी 1962 में, स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की जन्म शताब्दी के अवसर पर, लोगों के एक समूह ने कन्याकुमारी समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य चट्टान पर एक स्मारक और चट्टान की ओर जाने वाले पैदल पुल का निर्माण करना था. लगभग उसी समय, मद्रास में रामकृष्ण मिशन (Ramakrishna Mission) ने इस स्मारक की योजना बनाना शुरू किया. आज भारत के मुख्य स्मारकों में से एक है.
वाकई, 2024 के चुनाव में कितने ही सुखद संयोग बने हैं. अमृतकाल के इस प्रथम लोकसभा चुनाव में मैंने प्रचार अभियान 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणास्थली मेरठ से शुरू किया. मां भारती की परिक्रमा करते हुए इस चुनाव की मेरी आखिरी सभा पंजाब के होशियारपुर में हुई. संत रविदास जी तपोभूमि, हमारे गुरुओं की भूमि पंजाब में आखिरी सभा होने का सौभाग्य भी बहुत विशेष है. इसके बाद मुझे कन्याकुमारी में भारत माता के चरणों में बैठने का अवसर मिला.
लोकसभा चुनाव के 7वें चरण का प्रचार थम चुका है. जिसके बाद पीएम मोदी कल कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल के ध्यान मंडपम में ध्यान साधना के लिए पहुंच गए हैं. बता दें कि 2019 में फाइनल राउंड से पहले प्रधानमंत्री ने केदारनाथ में 17 घंटे तक साधना की और इस बार पीएम 45 घंटे तक ध्यान में हैं. देखें...
ध्यान हमें इतना सक्षम बनाता है कि हम किसी भी चीज का प्रतिरोध कर सकें. ध्यान हमें प्रकृति के करीब पहुंचाता है और उसमें निहित सुंदरता को हमारे सामने लेकर आता है. ध्यान हमें धरती पर ही स्वर्ग का अहसास कराता है.
कन्याकुमारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 45 घंटों का ध्यान शुरु हो चुका है. प्रधानमंत्री उसी स्थान पर जगह ध्यान लगा रहे हैं जहां स्वामी विवेकानंद ने विकसित भारत का सपना देखा था. प्रधानमंत्री की ध्यान साधना एक जून तक चलेगी.
लोकसभा चुनाव 2024 के आखिरी चरण के मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी के स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान लगाकर बैठ हुए हैं. वहीं उनकी ध्यान साधना पर राजनीति भी तेज है. अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने उनपर निशाना साधा है. देखिए VIDEO
किसकी जीत होगी, किसकी हार होगी, किसकी सरकार बनेगी इस तरह के तमाम सवालों से दूर प्रधानमंत्री नरेंद्र अंतिम दौर के प्रचार से फुर्सत मिलते ही कन्याकुमारी का रुख करेंगे. कहा जा रहा है कि पीएम मोदी विवेकानंद रॉक मेमोरियल पर ध्यान करेंगे.
लोकसभा चुनाव 2024 के आखिरी चरण का प्रचार थमने के बाद ही तुरंत पीएम मोदी कन्याकुमारी के स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल में ध्यान साधना करेंगे. वहीं उनकी ध्यान साधना पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है. विपक्ष दलों का कहना है कि इससे उनके वोटरों पर असर पड़ सकता है. देखिए VIDEO
लोकसभा चुनाव 2024 के सातवें और आखिरी चरण का चुनाव प्रचार थमने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आध्यात्मिक यात्रा के लिए कन्याकुमारी जाएंगे, जहां पीएम मोदी विवेकानंद रॉक मेमोरियल में 1 जून तक ध्यान करेंगे. पीएम मोदी के इस कार्यक्रम पर विपक्ष हमलावर है. इस बीच तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव ने उनपर निशाना साधा है. देखिए VIDEO
जब गुरुवार को पीएम मोदी तमिलनाडु पहुंचे तो उन्होंने पहले यहीं के पास स्थित भगवती अम्मन मंदिर में पूजा की. यहीं से वह विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचें और अब वह यहां लगभग दो दिनों तक के लिए ध्यान में बैठ गए हैं. 1 जून को अपने प्रस्थान से पहले पीएम मोदी यहां संत तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का दौरा भी कर सकते हैं.
लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार का वक्त खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी पहुंचे. वो अब 1 जून तक यहीं रहेंगे और विवेकानंद रॉक मेमोरियल में 45 घंटे तक साधना करेंगे. लेकिन इसे लेकर विपक्ष एक बार फिर पीएम मोदी को घेर रहा है. देखें 'ब्लैक एंड व्हाइट'.
आज लोकसभा चुनाव के 7वें और अंतिम चरण का चुनाव प्रचार देश भर में थम गया. अब 1 जूनको आखिरी चरण के मतदान का और फिर 4 जून को चुनाव के नतीजों का दिन है. देश में चुनाव प्रचारलंबा चला, जिसमें सबने अंतिम चरण तक पूरी ताकत लगाकर प्रचार किया है. अब प्रचार की मेहनत का रिजल्ट किसे करेगा पास? देखें दस्तक.
सूरज की रक्तिम आभा, समंदर की मचलती लहरें और शांत सी शिला है विवेकानन्द रॉक मेमोरियल. कन्याकुमारी में स्थित इस शिला पर कभी स्वामी विवेकानंद ने ध्यान लगाया था. अब पीएम मोदी भी यहां मेडिटेशन करेंगे. सबसे पहले PM मोदी भगवती अम्मान मंदिर में दर्शन करेंगे. इसके बाद वह विवेकानन्द रॉक मेमोरियल में मेडिटेशन करेंगे.
आज लोकसभा चुनाव के 7वें और अंतिम चरण का चुनाव प्रचार थमने के बाद पीएम मोदी अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए कन्याकुमारी जाएंगे. यहां पीएम मोदी विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंचकर 30 मई की शाम से लेकर 1 जून तक मेडिटेशन करेंगे. इससे पहले पीएम मोदी ने अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी के नाम खास वीडियो सन्देश जारी किया.
लोकसभा चुनाव 2024 के 7वें और अंतिम चरण का चुनाव प्रचार थमने के बाद कन्याकुमारी पहुंच सकते हैं. यहां पीएम मोदी विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुंच ध्यान कर सकते हैं. इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि जिस जगह पीएम मोदी ध्यान करने वाले हैं, वहां की खासियत क्या है. देखिए VIDEO
स्वामी विवेकानंद का जन्म आज ही के दिन वर्ष 1863 में संयुक्त बंगाल के कलकत्ता में हुआ था. और वो संत रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे और उनका जीवन और उनके सिद्धांत युवाओं के लिए प्रेरणा माने जाते हैं. एक बार एक व्यक्ति ने ज़ोर देकर स्वामी विवेकानंद से पूछा था कि ये कैसे पता चलेगा कि युवा कौन होता है?.
Swami Vivekananda Jayanti 2023: राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है. ज्यादातर लोग स्वामी विवेकानंद को इस्लाम विरोधी मानते हैं लेकिन यह अवधारणा गलत है. विवेकानंद इस्लाम का सम्मान करते थे जिसका जिक्र नेहरू ने अपनी किताब 'भारत की खोज' में किया है.
Swami Vivekananda Jayanti 2023: स्वामी विवेकानंद को एक वेश्या ने संन्यास का असल मतलब समझाया था. जयपुर के राजा ने एक बार उन्हें महल में आमंत्रित किया था लेकिन भूल से उनकी मेजबानी के लिए एक वेश्या को बुला लिया था. आगे की कहानी बेहद ही दिलचस्प है-
Swami Vivekananda Jayanti 2023: स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था. भारत में उनके जन्मदिन को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. स्वामी जी की बुद्धिमानी और हाजिर जवाबी की पूरी दुनिया कायल थी. उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया.