WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए काम करती है. इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड (Geneva, Switzerland) में है (Headquarter Of WHO) और इसके 6 क्षेत्रीय कार्यालय और दुनिया भर में 150 क्षेत्र कार्यालय हैं (Offices of WHO).
WHO की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी. एजेंसी की शासकीय निकाय, विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) की पहली बैठक उसी वर्ष 24 जुलाई को हुई थी. WHO ने लीग ऑफ नेशंस हेल्थ ऑर्गनाइजेशन, ऑफिस इंटरनेशनल डी हाइजीन पब्लिक और इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (ICD) की संपत्ति, और काम करने वालों को शामिल किया. वित्तीय और तकनीकी संसाधनों के जुड़ने के बाद 1951 में इसका काम शुरू हुआ. सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज, सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों की निगरानी के साथ जुड़ाव, स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए प्रतिक्रियाओं का समन्वय, और स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए यह देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों को निर्धारित करता है, और वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों पर डेटा एकत्र करता है. WHO स्वास्थ्य के मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है (Formation of WHO).
डब्ल्यूएचओ ने कई सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियों में अग्रणी भूमिका निभाई है, विशेष रूप से चेचक का उन्मूलन, पोलियो उन्मूलन, और एक इबोला वैक्सीन का विकास. इसकी वर्तमान प्राथमिकताओं में संचारी रोग, विशेष रूप से एचआईवी/एड्स, इबोला, कोविड-19, मलेरिया और तपेदिक, गैर-संचारी रोग जैसे हृदय रोग और कैंसर है (Important Role of WHO).
WHO फंडिंग के लिए सदस्य राज्यों और निजी दाताओं के योगदान पर निर्भर करता है (Funding of WHO).
WHO का पहला सम्मेलन 23 जून 1851 को पेरिस में आयोजित किया गया था. यह एक सम्मेलनों की श्रृंखला थी जो 1938 तक, लगभग 87 वर्षों तक चली थी. यह सम्मेलन हैजा से संबंधित था (first conference Of WHO).
विश्व स्वास्थ्य संगठन के संविधान पर 22 जुलाई 1946 को संयुक्त राष्ट्र (UN) के सभी 51 देशों और 10 अन्य देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे (constitution of WHO). इस प्रकार यह संयुक्त राष्ट्र की पहली विशिष्ट एजेंसी बन गई, जिसमें प्रत्येक सदस्य सदस्यता लेता था. इसका संविधान औपचारिक रूप से 7 अप्रैल 1948 को पहले विश्व स्वास्थ्य दिवस पर लागू हुआ (first World Health Day).
विश्व स्वास्थ्य सभा की पहली बैठक 24 जुलाई 1948 को समाप्त हुई. एंड्रीजा ताम्पर विधानसभा के पहले अध्यक्ष थे, और जी. ब्रॉक चिशोल्म को डब्ल्यूएचओ का महानिदेशक नियुक्त किया गया था, जिन्होंने योजना के चरणों के दौरान कार्यकारी सचिव के रूप में कार्य किया था (First Meeting of World Health Assembly).
इसकी पहली प्राथमिकता मलेरिया, तपेदिक और यौन संचारित संक्रमणों के प्रसार को नियंत्रित करना और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरणीय स्वच्छता में सुधार करना था. इसका पहला विधायी अधिनियम रोग के प्रसार और रुग्णता पर सटीक आंकड़ों के संकलन से संबंधित था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के लोगो में रॉड ऑफ़ एसक्लपियस को उपचार के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है (Logo of WHO).
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में यह नया संक्रमण 21 जनवरी को शुरू हुआ था और अब तक 419 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 53 लोगों की मौत हो चुकी है. WHO अफ्रीका कार्यालय के अनुसार, इस बीमारी का पहला मामला बोलोको कस्बे में सामने आया, जब तीन बच्चों ने चमगादड़ का मांस खाया और 48 घंटे के भीतर उन्हें रक्तस्रावी बुखार (हेमरेजिक फीवर) के लक्षण दिखाई देने लगे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.
अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली के प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के साथ गंभीर मतभेदों के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से देश को बाहर निकालने का आदेश दिया गया है. राष्ट्रपति जेवियर माइली का यह निर्णय उनके सहयोगी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से मेल खाता है, जिन्होंने 21 जनवरी को पदभार संभालने के पहले दिन ही एक कार्यकारी आदेश के साथ अमेरिका को WHO से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी.
अमेरिका के राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि वो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में दोबारा शामिल हो सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में एक ट्रिलियन डॉलर का निवेश करने की अपील की, जो कि पहले ही 600 बिलियन डॉलर तक निवेश करने का ऐलान कर चुका है. देखें यूएस टॉप-10.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संकेत दिए कि वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में दोबारा शामिल होने पर विचार कर सकते हैं.
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गुलेन बैरी सिंड्रोम में अचानक हो रही बढ़ोतरी की जांच के लिए एक टीम गठित कई गई है. डॉक्टरों के मुताबिक कि GBS एक दुर्लभ स्थिति है, जो अचानक सुन्नता और मांसपेशियों में कमजोरी का कारण बनती है. इस सिंड्रोम के कारण अंगों में गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आते हैं.
अमेरिका जल्द ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग होने का फैसला ले सकता है. डोनाल्ड ट्रंप जनवरी में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद जिन एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स पर दस्तखत करेंगे, ये फैसला उनमें से एक हो सकता है. अमेरिका को इससे भले फर्क न पड़े, लेकिन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के लिए ये बहुत बड़ा धक्का साबित हो सकता है.
ट्रंप लंबे समय से WHO के आलोचक रहे हैं. 2019 में दुनियाभर में फैले कोरोना के लिए ट्रंप चीन को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि इस महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने चीन के विरोध में एक शब्द नहीं कहा.
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय हाइपर एक्टिव मोड में हैं. 20 जनवरी को जब वह राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे तो कई चौंकाने वाले ऐलान कर सकते हैं. खबर है कि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन को लेकर भी बड़ा फैसला लेने वाले हैं.
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से डब्ल्यूएचओ के आलोचक रहे हैं. 2019 में दुनियाभर में फैले कोरोना के लिए ट्रंप चीन को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि इस महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने चीन के विरोध में एक शब्द नहीं कहा.
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह या गले के कैंसर के मामले सामने आते हैं. इसके बाद लंग कैंसर है. 2022 में पुरुषों में कैंसर के 6.91 लाख मामले सामने आए थे. इनमें से डेढ़ लाख से ज्यादा मामले मुंह-गले या लंग कैंसर के थे.
एमपॉक्स वायरस की वजह से दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा हुआ है. इस वायरस के फैले प्रकोप के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की तरफ से राहत भरी ख़बर सामने आई है, दरअसल WHO ने एमपॉक्स वायरस के उपचार के लिए वैक्सीनेशन के टीके को पहली मंजूरी दे दी है..
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ देशों में एमपॉक्स के खिलाफ़ विश्व के पहले टीके को मंजूरी दे दी है. एमवीए-बीएन वैक्सीन (MVA-BN vaccine) को फिलहाल 18 साल से कम लोगों के लिए नहीं बनाया गया है. हालांकि WHO ने जल्द से जल्द शिशुओं, प्रेग्नेंट महिलाओं, किशोरों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए भी ऐसे वैक्सीन को तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
मंकीपॉक्स ने भारत में दस्तक दे दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था और इसे 'ग्रेड 3 इमरजेंसी के रूप में बताया था'. जब मंकीपॉक्स से संक्रमित हुआ इंसान, ऐसे लगा था सोर्स का पता, जानें.
मंकी पॉक्स ने भारत में दस्तक दे दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था और इसे 'ग्रेड 3 इमरजेंसी के रूप में बताया था'. मंकीपॉक्स का मंकी से क्या कनेक्शन है? जानें.
मंकी पॉक्स ने भारत में दस्तक दे दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस को ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था और इसे 'ग्रेड 3 इमरजेंसी के रूप में बताया था'. आखिर क्या है मंकी पॉक्स, जानें.
दुनिया में Mpox के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत में भी अलर्ट है. हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसे इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी करार दिया है. हालांकि, भारत में अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है. दिल्ली के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है और सरकार पूरी तरह से तैयार है.
दुनिया कुछ समय पहले कोविड 19 वायरस के खतरे से बाहर निकली ही थी कि अब एक और वायरस ने चिंता बढ़ा दी है. इस वायरस का नाम एमपॉक्स है, जिसे लेकर डब्ल्यूएचओ ने ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की है.
WHO की डॉ. वैन केरखोव ने कहा, "हाल के महीनों में, सीजन की परवाह किए बिना, कई देशों में COVID-19 के मामलों में उछाल देखा गया है, जिसमें ओलंपिक भी शामिल है, जहां कम से कम 40 एथलीट पॉजिटिव पाए गए हैं."
WHO और WUENIC डेटा में, भारत के बाद अन्य देशों में लिस्ट में इथियोपिया, कांगो, सूडान, इंडोनेशिया, यमन, अफगानिस्तान, अंगोला, पाकिस्तान, सोमालिया, वियतनाम, मेडागास्कर, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, माली, डीपीआरके, चीन, गिनी और म्यांमार जैसे देशों का नाम है.
दुनिया की लीडिंग मेडिकल जर्नल 'लैंसेट' में प्रकाशित नए विश्लेषण से पता चला है कि दुनिया के शीर्ष 10 मोटापे से ग्रस्त देशों में से 9 प्रशांत क्षेत्र के देश (फिजी, पापुआ न्यू गिनी, माइक्रोनेशिया, समोआ, सोलोमन आइलैंड इत्यादि) हैं. 2022 के आंकड़ों के हवाले से किए गए शोध में पाया गया कि दुनिया में 1 अरब से अधिक लोग अब मोटापे के साथ जी रहे हैं. वीडियो में जानें प्रशांत क्षेत्र के लोगों को WHO ने दी क्या सलाह.
हाल ही में हुए शोध में कहा गया है कि दुनियाभर में एक अरब देश से अधिक लोग मोटे हो गए हैं. लैंसेट की स्टडी में कहा गया है कि 10 सबसे मोटापे से ग्रस्त देशों में से 9 देश प्रशांत क्षेत्र के हैं.