जाकिर हुसैन
जाकिर हुसैन (Zakir Hussain) एक भारतीय तबला वादक और संगीतकार थे. 15 दिसंबर 2024 को उन्होंने अंतिम सांस ली. 73 साल की उम्र में यूएस के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हो गया. उन्हें भारत सरकार द्वारा 1988 में पद्मश्री और 2002 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया, जिसे राष्ट्रपति अब्दुल कलाम द्वारा प्रस्तुत किया गया था (Zakir Hussain Padma Awards). उन्हें फरवरी 2024 में तीन ग्रैमी अवॉर्ड मिले थे.
उन्हें 1990 में संगीत नाटक अकादमी, भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी द्वारा दिए गए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. 1999 में उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल एंडॉमेंट फॉर द आर्ट्स नेशनल हेरिटेज फेलोशिप से सम्मानित किया गया था, जो पारंपरिक कलाकारों और संगीतकारों को दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है (Zakir Hussain Awards).
जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई (Mumbai) में हुआ था (Zakir Hussain Age). जाकिर तबला वादक अल्ला राखा (Alla Rakha) के सबसे बड़े बेटे थें (Zakir Hussain Father). जाकिर हुसैन के दो भाई हैं- उस्ताद तौफीक कुरैशी और उस्ताद फजल कुरैशी हैं. दोनों भाई भी तबला वादक हैं (Zakir Hussain Brothers). उन्होंने माहिम में सेंट माइकल हाई स्कूल में पढ़ाई की और सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से स्नातक किया था (Zakir Hussain Education).
जाकिर हुसैन ने कथक नर्तक और शिक्षक एंटोनिया मिनेकोला से शादी की था, जो उनके प्रबंधक भी रही हैं (Zakir Hussain Wife). उनकी दो बेटियां हैं, अनीसा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी (Zakir Hussain Daughters).
ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन 3 फरवरी की सुबह हुआ. यहां तमाम सिंगर्स ने अवॉर्ड अपने नाम किए. शो के 'इन मेमोरियन' सेशन के दौरान पिछले साल दुनिया को अलविदा कहने वाले कई संगीतकारों को याद किया गया. हालांकि इस वीडियो में उस्ताद जाकिर हुसैन कहीं नहीं थे. भारतीय म्यूजिक फैंस को ग्रैमी आयोजकों की ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई.
ग्रैमी अवॉर्ड्स 2025 का आयोजन 3 फरवरी की सुबह हुआ. यहां तमाम सिंगर्स ने अवॉर्ड अपने नाम किए. शो के 'इन मेमोरियन' सेशन के दौरान पिछले साल दुनिया को अलविदा कहने वाले कई संगीतकारों को याद किया गया. हालांकि इस वीडियो में उस्ताद जाकिर हुसैन कहीं नहीं थे. भारतीय म्यूजिक फैंस को ग्रैमी आयोजकों की ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई.
तबला वादक जाकिर हुसैन की 36 साल पुरानी एक्सक्लूसिव तस्वीरें एक बार भी सामने आ गई हैं. दरअसल, इंडिया टुडे मैगजीन ने 1988 में अपने पिता के साथ तबला वादन करते उस्ताद जाकिर हुसैन पर एक स्टोरी की थी. आज उस दौर की तस्वीरों को एक बार फिर याद किया गया है.
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में जाकिर हुसैन का निधन हो गया है. जाकिर हुसैन ने संगीत यात्रा की शुरुआत बहुत ही कम उम्र में की थी. महज 12 साल की उम्र में उन्होंने अमेरिका में अपना पहला कॉन्सर्ट किया था. देखिए उनका सफर
तबले की ताल में तीन मुख्य चीजें हैं. सम, ताली और खाली... सम से ताल की धुन शुरू होती है, ताली... यानी बीट पर वो जगह जहां से ताल दी जाती है और खाली... बीट के बीच एक रिक्त स्थान जहां कोई ताल नहीं पड़ती और वह खाली जाती है. उस्ताद साहब के जाने से तबले और ताल में वही खाली स्थान बन गया है. अब न वहां ताल बची न लय और शायद सदियों तक होगी भी नहीं. अलविदा उस्ताद...
जाकिर अपने पीछे संगीत की एक पूरी विरासत छोड़ गए हैं. उन्होंने भारतीय संगीत के कई बड़े नामों के साथ कोलेबोरेट किया और कई पॉपुलर फिल्मों में भी उनके तबले की थाप ने रंग भरा. लेकिन क्या आपको पता है कि जाकिर ने हिंदी सिनेमा लेजेंड अमिताभ बच्चन के साथ भगवान हनुमान को समर्पित एक भजन भी पेश किया था?
संगीत मैस्ट्रो जाकिर हुसैन भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी ख्याति दूर दूर तक फैली है. जाकिर के अचीवमेंट्स से तो आप वाकिफ होंगे लेकिन ये शायद ही कोई जानता होगा कि उनका बचपन कितनी मुफ्लिसी में बीता है. आपको बताते हैं उनके बारे में अनकहे किस्से...
संगीत मैस्ट्रो जाकिर हुसैन भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी ख्याति दूर दूर तक फैली है. जाकिर के अचीवमेंट्स से तो आप वाकिफ होंगे लेकिन ये शायद ही कोई जानता होगा कि उनका बचपन कितनी मुफ्लिसी में बीता है. आपको बताते हैं उनके बारे में अनकहे किस्से...
प्रख्यात तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया. भारत सरकार ने उन्हें 2022 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था. 1951 में मुंबई में जन्मे जाकिर हुसैन ने संगीत जगत में अमूल्य योगदान दिया. उनके पिता भी एक सुप्रसिद्ध तबला वादक थे. देखें तबला उस्ताद की यादगार तस्वीरें.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्गज तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. जाकिर हुसैन का सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया.
तबला वादक जाकिर हुसैन का सोमवार को सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में निधन हो गया. उनके परिवार की तरफ से इस दुखद खबर की पुष्टि कर दी गई है. वो 73 साल के थे. 16 दिसंबर की सुबह जाकिर हुसैन ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. देखें ये वीडियो.
मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन अब हमारे बीच नहीं रहे, उन्होंने 73 साल की उम्र में अमेरिका के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली. दुनियाभर में फेमस जाकिर हुसैन अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए हैं.
90 की पैदाइश वाले लोगों के जेहन में दूरदर्शन की जो यादें अब तलक जिंदा है, उनमें दो बातें खास हैं, पहला तो वो अमर गीत 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' और दूसरा कई सारे यादगार विज्ञापन. उन दिनों एक चाय का विज्ञापन बहुत मशहूर रहा था.
मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. वह 73 साल के थे. उन्हें ह्रदय संबंधी समस्याओं की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह बीते दो हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थे लेकिन बाद में उनकी तबियत और बिगड़ने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था.
जाने माने तबला वादक और तबला वादन के ग्लोबल आइकन बन चुके जाकिर हुसैन अब हमारे बीच नहीं हैं. अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हो गया. वो बीमार थे और अमेरिका में 2 हफ्ते से उनका इलाज चल रहा था. जाकिर हुसैन को पिछले साल सरकार ने पद्मविभूषण से सम्मानित किया था.
दिया मिर्जा ने जाकिर को याद करते हुए कहा, 'वो सिर्फ एक म्यूजिकल जीनियस नहीं थे बल्कि सबसे विनम्र, सबसे ज्यादा प्यार करने वाले और दयालु व्यक्तियों में से एक थे.' उन्होंने आगे लिखा कि जाकिर की मुस्कराहट की छाप उनके दिल पर हमेशा रहेगी.
Ustad Zakir Hussain Net Worth: मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन अब हमारे बीच नहीं रहे, उन्होंने 73 साल की उम्र में अमेरिका के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली. दुनियाभर में फेमस जाकिर हुसैन अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए हैं.
भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक जाकिर हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है. अपने करियर में वह पांच ग्रैमी अवॉर्ड हासिल कर चुके हैं.
मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का 73 साल की उम्र में निधन हो गया है. जाकिर हुसैन कुछ समय से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती थे. वहीं, उन्होंने 16 दिसंबर को अंतिम सांस ली.
देश के मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन के निधन का दावा गलत है. उनके भांजे ने बताया है कि वो जीवित हैं लेकिन उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. अमेरिका के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.
Tabla maestro Zakir Hussain: तबला वादक जाकिर हुसैन की हालत नाजुक है. वह ICU में भर्ती हैं और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका इलाज चल रहा है. जाकिर की बहन खुर्शीद ने लोगों से अपील की है कि वह उनके भाई की सलामती के लिए दुआ करें.