कोरोना महामारी ने साल 2020 में दुनिया को काफी परेशान किया है और पूरी दुनिया सामान्य हालातों की राह देख रही है हालांकि आज से लगभग 500 साल पहले फ्रांस में डांस की महामारी ने कई लोगों को लील लिया था. ये लोग रहस्यमयी अंदाज में सिर्फ डांस करते चले जा रहे थे और ये तब तक डांस करते गए जब तक इनकी मौत नहीं हो गई.
14 जुलाई 1518 को फ्रांस के शहर स्ट्रैसबर्ग में सब कुछ सामान्य था लेकिन अचानक फ्रॉ त्रोफे नाम की महिला सड़कों पर डांस करने लगती है. उनके आसपास लोग खुश होते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं और तालियां बजाते हैं लेकिन धीरे-धीरे ये साफ हो गया था कि ये सामान्य डांस नहीं था क्योंकि ये महिला अगले छह दिनों तक बिना रेस्ट किए सिर्फ डांस किए चली जा रही थी.
ये महिला हर रात थकान के मारे सो जाती थी, उसके जूते डांस करते-करते खून से सन चुके थे लेकिन वो अगली सुबह फिर उठती थी तो डांस करने लगती थी. एक हफ्ते के अंदर उसे 34 लोग जॉइन कर चुके थे. एक महीने के अंदर 400 लोग इस डांस मंडली में शामिल हो चुके थे और जब ये डांस की दीवानगी अपने चरम पर थी तो रोज कम से कम 15 लोग हार्ट अटैक, थकान या स्ट्रोक्स से मर रहे थे.
जब शहर के प्रशासन को कुछ समझ नहीं आया तो दो अधिकारियों ने म्यूजिशियन्स को बुलाया और एक डांस के लिए बहुत बड़े स्टेज का निर्माण करा दिया. उन्हें लगा कि ये डांस का पागलपन खत्म हो जाएगा लेकिन ये प्रयास उल्टा पड़ गया और ज्यादा से ज्यादा लोग इस महामारी का हिस्सा बनने लगे और अपनी जान गंवाने लगे.
जॉन वॉलर नाम के इतिहासकार ने इस बारे में हिस्ट्री. कॉम वेबसाइट के साथ बातचीत में कहा था कि 16वीं शताब्दी में एक कैथोलिक संत के बारे में कहा जाता था कि वो लोगों को ऐसा श्राप दे सकता था जो लोगों में डांस की महामारी फैला सकता था. 1518 में स्ट्रैसबर्ग में सूखा और बीमारियां लोगों को परेशान कर रही थीं तो कहीं ना कहीं वो स्ट्रेस और अंधविश्वास मिलकर एक ऐसे उन्मादी बिहेवियर का निर्माण कर रहा था जो पूरे शहर को जकड़ रहा था.
इसके अलावा भी कई थ्योरीज हैं जिनमें कहा जाता है कि ये लोग एक डांस कल्ट ग्रुप का हिस्सा थे और उन्होंने कुछ ऐसे एरगोट नाम के फंगस का सेवन कर लिया था जिससे वे सुधबुध खोकर दूसरी दुनिया में चले गए थे. ये फंगस एलएसडी नाम के विवादित ड्रग्स में भी पाया जाता है. मॉर्डन मेडिकल टर्म्स में इसे साइकोजेनिक बीमारी कहा गया है. ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान साइकोलॉजिकल वजहों से अजीबोगरीब व्यवहार कर सकता है. हालांकि आज भी इस डांस महामारी की सही वजह सामने नहीं आ पाई है.