साल 2020 को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के लिए हमेशा याद रखा जाएगा लेकिन नए साल के आगाज के साथ कोरोना का खतरा भी बरकरार है. लोग नए साल पर बाहर जाने, रेस्टोरेंट में खाना खाने, मॉल घूमने जैसी तमाम प्लानिंग कर रहे हैं. अगर आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं तो हम आज आपको कुछ ऐसी चीजें बताएंगे जिसको जानकर आप नए साल पर बनाए प्लान को लेकर एक बार सोचने पर मजबूर हो जाएंगे. अगर आप इन चीजों को नजरअंदाज करेंगे तो संभव है कि कोरोना आपके घर दस्तक दे दे..इसलिए इन सावधानियों को बनाए रखें. (सभी तस्वीरें - Getty)
बहुत से लोग मानते हैं कि बाहर खाना और रेस्टोरेंट जाना शायद अभी सबसे असुरक्षित है, हाल ही में एनएचएस, यूके द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि कोरोना संक्रमित होने से पहले अधिकांश लोग किराने की दुकान या सुपरमार्केट गए थे जिसेक बाद उनमें कोरोना के लक्षण पाए गए.
PHE (पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड) और NHS ने टेस्ट और ट्रेस ऐप का उपयोग करके ऐसे लोगों का पता लगाया है. जो लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं उनके विश्लेषण के बाद पाया गया कि उनका कोई रिश्तेदार या करीबी सुपरमार्केट या भीड़ भरे स्टोर पर गया था जिसके बाद वो पॉजिटिव पाए गए. एक किराने की दुकान या सुपरमार्केट में एक दूसरे के करीब बहुत सारे गलियारे होते हैं और देखा गया है कि हमेशा इस बात का जोखिम बना रहता है कि आप किसी ऐसी वस्तु को छूने जा रहे हैं जिसे कोई संक्रमित व्यक्ति छू चुका हो.
बीएमजे जर्नल द्वारा महीनों पहले किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि सुपरमार्केट और किराने की दुकानों में संक्रमण दर 18.6% है, जो स्कूलों, नर्सिंग होम, होटल, रेस्टोरेंट और यहां तक कि सार्वजनिक वॉशरूम से भी ज्यादा है.
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि छूने की वजह से संक्रमण (जो दुनिया में 40% कोरोना मामलों के लिए जिम्मेदार है) में वृद्धि भी जोखिम भरा हो सकता है. स्वच्छता ना होना, मास्क का ख्याल नहीं रखना, ग्राहकों और कर्मचारियों दोनों के लिए समस्याओं को और बदतर बना सकती हैं.
हालांकि खुदरा विक्रेताओं ने सख्त उपाय किए हैं और लोग एहतियाती सुझावों का पालन करने के लिए अधिक जागरूक हैं, लेकिन याद रखें कि किराने की खरीदारी एक आवश्यक काम है जिसके लिए ज्यादातर लोग बाहर जाते हैं. ब्रिटेन के सर्वे में यह भी पाया गया कि लोगों में सार्वजनिक संस्थानों, रेस्टोरेंट, कैफे, जिम जाने के बाद कोरोना के मामले सामने आए लेकिन अजीब बात ये है कि खरीदारी करने गए लोगों की तुलना में ऐसे मामलों का प्रतिशत कम है.