अमेरिका की ओलंपिक लॉन्ग जंपर क्यूनेशा बर्क्स ने मैकडॉनल्ड्स से ओलंपिक तक का शानदार सफर तय किया है. बर्क्स 10 साल पहले तक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट में वेटर के तौर पर काम करती थीं लेकिन आज वे ओलंपिक गेम्स में अमेरिका की तरफ से पदक की दावेदार बनी हुई हैं.
बर्क्स जब 16 साल की थीं तो अपनी फैमिली को सपोर्ट करने के लिए वे मैकडॉनल्ड्स में काम करने लगी थीं. बर्क्स अपनी छोटी बहनों की जिम्मेदारी उठाने के लिए कम उम्र से ही काम करने लग गई थीं. हालांकि बर्क्स ये भी जानती थीं कि मैकडॉनल्ड्स उनके लिए किसी भी तरह से सीरियस करियर नहीं है.
बर्क्स के मां-बाप अलग हो गए थे और उनकी मां ने दूसरी शादी रचाई थी. पारिवारिक जिंदगी में उथल-पुथल के बीच बर्क्स घर के बिल्स भरती थीं, अपनी छोटी बहनों को स्कूल ले जाती थीं और घर के काफी काम निपटाती थीं. इतना बिजी होने के बावजूद वे बॉस्केटबॉल्स गेम्स में काफी दिलचस्पी रखती थीं.
मिडिल स्कूल के दौरान बर्क्स ने दौड़ना शुरु किया था ताकि वे अपना बास्केटबॉल गेम को बेहतर बना सकें हालांकि बास्केटबॉल की कई स्टेट चैंपियनशिप्स खेलने के बाद बर्क्स के कोच ने कहा था कि वे बास्केटबॉल के लिए काफी तेज हैं और उन्हें अपना करियर रनिंग में बनाना चाहिए.
बर्क्स ने पहले तो इस बात पर ध्यान नहीं दिया लेकिन जब उन्होंने इस खेल की बारीकियां सीखीं तो उनकी इस खेल को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ने लगीं. वे खासतौर पर लॉन्ग जंप में काफी दिलचस्पी रखती थीं. हालांकि बर्क्स को इस खेल के बारे में कुछ मालूम नहीं था लेकिन इसी खेल के चलते उन्हें ओलंपिक का टिकट मिला.
बर्क्स को शुरुआत में लॉन्ग जंप के दौरान रेत में कूदना भी अजीब लगता था. उन्हें लगता था कि वे बेवजह अपने कपड़े खराब नहीं करना चाहती हैं. हालांकि इस गेम की बारीकियां जानने के बाद उनका इंटरेस्ट काफी बढ़ा. हाई स्कूल के दौरान उन्होंने 13 फीट का जंप मारा था और वे औसत से सिर्फ 3 इंच दूर रह गई थीं. इसके कुछ महीनों बाद ही वे 20 फीट जंप करने लगी थीं.
साल 2019 में यूएस आउटडोर ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप से पहले उन्हें अपने दादा को खो दिया था. वे अपने दादा के बेहद करीब थीं. वे उनकी मौत से काफी टूट चुकी थीं और चैंपियनशिप में भाग नहीं लेना चाहती थीं लेकिन उनके परिवार ने उन्हें इस चैंपियनशिप के लिए तैयार किया. बर्क्स कहती हैं कि इस घटना ने उन्हें मानसिक तौर पर मजबूत बनाया है.