सभी जानते हैं कि सेब की खेती सिर्फ ठंडे प्रदेशों जैसे कि कश्मीर हिमाचल प्रदेश जैसे इलाकों में होती है, लेकिन सेब की एक खास प्रजाति को औरंगाबाद के खेतों में उपजा कर एक किसान अपनी अच्छी कमाई कर रहा है. किसान अमरेश कुमार सिंह औरंगाबाद के कर्मडीह गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने सेब की खास प्रजाति हरमन 99 की खेती अपने जमीन पर करना शुरू किया. अमरेश ने बताया कि फिलहाल उन्होंने 2 कट्ठा जमीन पर हरमन 99 सेब के पौधे लगाए हैं. (इनपुट-अभिनेश कुमार सिंह)
उन्होंने सेब के पौधों को दिसंबर में लगाया था. जो अब बड़े हो गए हैं और उसमें फल भी आ चुके हैं. उन्होंने बताया कि एक बार वह अपने पेड़ से फल तोड़ भी चुके हैं. इस बार वह उत्साहित होकर पौधों की संख्या को और अधिक बढ़ा रहे हैं. अमरेश ने बताया कि अन्य सेब की प्रजाति की तुलना में यह सबसे बेहतरीन है. इसका दाम भी मार्केट में काफी अधिक है. खेती करने पर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि बाजार में इसकी डिमांड काफी बढ़ती जा रही है. यह सेब की प्रजाति 40 से 48 डिग्री गर्मियों में भी पनपती है.
वैसे तो सभी जानते हैं कि सेब ठंडे प्रदेशों में ठंडे मौसम में उगता है लेकिन हरमन 99 गर्मियों में भी आसानी से जाया जा सकता है. इस सेब का पौधा 40 से 48 डिग्री तापमान पर भी आसानी से पनप सकता है. इसमें स्वपरागण के जरिए प्रजनन होता है. इसे कोई भी अपने आंगन या बगीचे में लगा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि अपने जिले और बिहार की मिट्टी में यह पौधा आसानी से उगाया जा सकता है और इसके फल का लाभ लिया जा सकता है.
अमरेश कुमार पढ़े-लिखे किसान हैं. वह खेती को वैज्ञानिक ढंग से करते हैं उन्होंने साथ में यह भी बताया कि इस सब के प्रजाति की खोज 1999 में हुई थी और पौधे को 2001 में लगाया गया था. इस सेब की खोज हिमाचल के हरीमन शर्मा नामक वैज्ञानिक ने 1999 में की थी 2001 में पहला पौधा लगाया गया था जिसमें फल उपजा था. धीरे-धीरे इसकी प्रजाति पूरे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल गई. इन्होंने बिहार के औरंगाबाद में सेब की खेती सफलतापूर्वक शुरू की है तथा उन्होंने आग्रह भी किया कि बिहार के किसान सामान्य खेती धान, गेहूं आदि को छोड़कर अगर इस तरह की खेती की तरफ अपना ध्यान दें तो उनकी आमदनी काफी बढ़ सकती है.
अमरेश किसानों को जागरूक भी करने के उद्देश्य से ताकि उनका विकास हो सके लोगों को अपने खेत को दिखाते हैं तथा उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के गुर भी बताते हैं. उन्होंने बताया कि बिहार के किसान धान गेहूं आदि की खेती को करने के साथ-साथ अपने कुछ जमीन पर ही अगर इस तरह की खेती करना शुरू करें तो वे आत्मनिर्भर बनेंगे तथा साथ ही उनकी आमदनी भी काफी बढ़ेगी.