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'बेहमई नरसंहार': जब फूलन देवी ने 20 लोगों को मार दी थी गोली

'बेहमई नरसंहार': जब फूलन देवी ने 20 लोगों को मार दी थी गोली
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फूलन देवी...चंबल से उभरा एक ऐसा नाम जो दुनिया में तब चर्चा में आया जब एक दस्यू सुंदरी ने एक लाइन में खड़ा कर टाकुर समुदाय के 20 लोगों को गोली से सरेआम उड़ा द‍िया. इस नरसंहार को 'बेहमई कांड' के नाम से जाना जाता है. 38 साल पहले हुए इस नरसंहार मामले में अगले साल 6 जनवरी को फैसला आना है. इस मामले में डेढ़ माह से लगातार चल रही बहस गुरुवार को पूरी हो गई.
'बेहमई नरसंहार': जब फूलन देवी ने 20 लोगों को मार दी थी गोली
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14 फरवरी 1981 को उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के बेहमई गांव में डकैत फूलन देवी ने 20 लोगों को लाइन में खड़ा करके गोलियां बरसाकर मौत दी थी. इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय दस्यु प्रभावित क्षेत्र में चल रही थी. 38 साल सुनवाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए. 
'बेहमई नरसंहार': जब फूलन देवी ने 20 लोगों को मार दी थी गोली
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बता दें क‍ि 10 अगस्त 1963 को यूपी में जालौन के 'घूरा का पुरवा' में फूलन देवी का जन्म हुआ था. गरीब और छोटी जाति में जन्मी फूलन में दब्बूपन नहीं था. उसने मां से सुना था कि चाचा ने उनकी जमीन हड़प ली थी तो दस साल की उम्र में चाचा से भिड़ गई. जमीन के लिए धरना दिया. सजा तो मिलनी ही थी. 10 साल की उम्र में शादी कर दी गई.

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खुद से 30-40 साल बड़े आदमी के साथ शादी हुई. पहली रात से जो दरिंदगी शुरू हुई, वो लंबे समय तक चली. उस आदमी ने फूलन से रेप किया. फिर ये रोज का सिलसिला बन गया. तब‍ीयत खराब हुई तो मायके आई, उधर पति ने दूसरी शादी कर ली. फिर किस्‍मत ने एक और करवट ली.
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फूलन के नए दोस्‍त बने. उसमें से कुछ डाकू गैंग से थे. फूलन ने बताया था क‍ि शायद किस्मत को यही मंजूर था. गैंग का सरदार बाबू गुज्जर, मुझसे प्‍यार करने लगा. वहीं, विक्रम मल्लाह को भी फूलन से प्‍यार था. विक्रम और सरदार के बीच ऐसी तनी कि विक्रम ने उसकी हत्या कर दी और सरदार बन गया. अब फूलन विक्रम के साथ रहने लगी. फिर क्‍या था, एक दिन फूलन अपने गैंग के साथ पति के गांव गई. वहां उसे और उसकी बीवी दोनों की जमकर पिटाई की.
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डाकुओं का एक और गैंग था ठाकुरों का गैंग. जब फूलन के गैंग की इससे भिड़ंत हुई तो सबसे बुरा परिणाम फूलन को भुगतना पड़ा. उसके साथ जो होने वाला था वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे. ठाकुरों के गैंग का सरगना था श्रीराम ठाकुर और लाला ठाकुर. ये गैंग उस बाबू गुज्जर की हत्या से नाराज था, जिसका जिम्मेदार फूलन को माना जाता था. दोनों गुटों में लड़ाई हुई.

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एक बार दोनों गैंग के बीच खूनी झड़प हुई. छिपते-छिपाते फूलन और मल्‍लाह कुछ देर के लिए आराम करने बैठे. तब मल्लाह को गोली लगी थी. दोनों जब सोए तो एक दूसरे के साथ थे, पर जब उठे तो फूलन, ठाकुर गैंग की गिरफ्त में थी. गैंग ने मल्‍लाह को मारकर फूलन को किडनैप कर लिया था.

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फूलन ने अपनी किताब में कुसुम नाम की महिला का जिक्र किया है, जिसने श्रीराम की मदद की थी. फूलन के मुताबिक विक्रम मल्लाह ने उसे तोहफे में जितनी भी ज्वैलरी दी थी, वो सभी कुसुम ने उसके बदन से उतार ली थी. फिर एक-एक कर मेरे साथ रेप किया.
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फूलन एक कोठरी में बंद थी, जानवरों की तरह. हर रोज उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया जाता. तब तक जब तक वह बेहोश ना हो जाती. जिस समय ये बर्बरता हुई फूलन केवल 18 साल की थी.
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यहां से छूटने के बाद फूलन डाकुओं के गैंग में फिर शामिल हो गई. 14 फरवरी 1981 में फूलन बेहमई गांव लौटी. उसने उन दो लोगों की पहचान की, जिन्होंने उसका रेप किया था. बाकी के बारे में पूछा, तो किसी ने कुछ नहीं बताया. फूलन ने गांव में 20 लोगों को लाइन में खड़ा करके गोलियां बरसाई थीं, इनमें से 17 ठाकुर थे और तीन अन्य. सभी को बांधकर लाया गया था इसल‍िए कोई भी बचकर भाग नहीं सका.  
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यही वो हत्याकांड था, जिसने फूलन की छवि खूंखार डकैत की बना दी. मीडिया ने फूलन को नया नाम दिया, 'बैंडिट क्वीन'. भिंड के एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी इस बीच फूलन के गैंग से बात करते रहे. ये उनका ही कमाल था कि फूलन आत्मसमर्पण को राजी हो गईं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने फूलन देवी ने समर्पण क‍िया. उस समय उन पर 22 हत्या, 30 डकैती और 18 अपहरण के चार्जेज थे.
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फूलन को 11 साल जेल में रहना पड़ा. मुलायम सिंह की सरकार ने 1993 में उन पर लगे सारे आरोप वापस लेने का फैसला किया. राजनीतिक रूप से ये बड़ा फैसला था. 1994 में फूलन जेल से छूट गईं. उम्मेद सिंह से उनकी शादी हो गई.

1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गईं. मिर्जापुर से वह सांसद बनीं. चंबल में घूमने वाली अब दिल्ली के अशोका रोड के शानदार बंगले में रहने लगी. 1998 में हार गईं, पर फिर 1999 में वहीं से जीत गईं.

25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा फूलन से मिलने आया. नागपंचमी के दिन उनके हाथ से खीर खाई और फिर घर के गेट पर फूलन को गोली मार दी. उसने कहा कि मैंने 'बेहमई हत्याकांड' का बदला ले लिया है. 14 अगस्त 2014 को दिल्ली की एक अदालत ने शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

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