बिहार के भागलपुर से गुजर रही गंगा नदी में इन दिनों नजारा बेहद रोमांचक है. अठखेलियां करती डॉल्फिन लोगों को खूब लुभा रही हैं. गंगा नदी में पानी में छलती और नमस्कार करती डॉल्फिन को देखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. वहीं खास बात ये है कि गंगा में डॉल्फिन की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है.
(इनपुट- राजीव सिद्धार्थ)
गंगा की गाय कही जाने वाली गांगेय डॉल्फिन के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है. शंकर टॉकीज से लेकर मानिक सरकार घाट तक डॉल्फिनों की अठखेलियां आसानी से देखी जा सकती है, तो वहीं लोग गंगा नदी के इस विहंगम दृश्य के साथ-साथ डॉल्फिनों को मस्ती करते देख खूब खुश भी हो रहे हैं.
90 के दशक में बिहार सरकार ने सुल्तानगंज से बटेश्वर पहाड़ी तक गंगा नदी के 70 किलोमीटर के क्षेत्र को विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन सेंचुरी के रूप में घोषित किया था, जबकि बक्सर से बटेश्वर तक गंगा नदी में गांगेय डॉल्फिन के वंश वृद्धि से गंगा में ईको टूरिज्म की संभावना बढ़ती जा रही है. गांगेय डॉल्फिन को भारत सरकार द्वारा अक्टूबर 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया. फिलहाल बक्सर से बटेश्वर तक गंगा नदी में तकरीबन 500 से ज्यादा डॉल्फिन हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने गंगा नदी में पाई जाने वाले डॉल्फिन को राष्ट्रीय जल जीव कहा था. वहीं स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 'डॉल्फिन प्रोजेक्ट' को शुरू करने का ऐलान किया था.