साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी के कहर के चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं चरमराई हैं. वहीं इस मामले में चीन लगातार कहता रहा है कि उन्होंने इस वायरस को लेकर लगातार महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं. हालांकि एक नई डॉक्यूमेंट्री में काफी ऐसी जानकारियां सामने आ रही हैं जिससे साफ होता है कि चीन कोरोना को लेकर दुनिया से झूठ बोलता आया है.
आईटीवी की डॉक्यूमेंट्री Outbreak: Virus that shook the world में वुहान के कुछ मेडिकल प्रोफेशनल्स को देखा जा सकता है. इन लोगों के स्टिंग ऑपरेशन किए जा रहे हैं और वे साफ कहते हैं कि उन्हें ये पता था कि ये वायरस कितना खतरनाक हो सकता है लेकिन उन्हें इस बारे में झूठ बोलने को कहा गया. इस डॉक्यूमेंट्री के एक हिस्से में एक हेल्थ प्रोफेशनल कहता है कि दिसंबर 2019 के अंत में मेरा एक रिश्तेदार इस वायरस के चलते मर गया था. उसके साथ जो लोग रह रहे थे वे भी इस वायरस से संक्रमित हो गए थे. तो हमें पता था कि ये वायरस काफी खतरनाक है.
इसके अलावा इन लोगों को ये भी पता था कि ये वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है. एक मेडिकल प्रोफेशनल के बयान के मुताबिक, 'हमें पता था कि ये वायरस इंसानों से इंसानों में ट्रांसमिट हो सकता है लेकिन जब हम अस्पताल की मीटिंग अटेंड कर रहे थे तो हमें कहा गया था कि हमें इस बारे में कोई बात नहीं करनी है.
प्रांत के लीडर्स ने अस्पताल को कहा था कि वे किसी को इस बारे में सच्चाई ना बताएं. अस्पताल का कुछ स्टाफ चाहता था कि इस डेडली वायरस के चलते लोगों को सचेत करना चाहिए और नए साल का जश्न नहीं मनाना चाहिए लेकिन चीन का प्रशासन धूमधाम से नए साल का जश्न मनाना चाहता था.'
गौरतलब है कि चीन ने 31 दिसंबर 2019 को डब्ल्यूएचओ को कोरोना के 27 केसेस के बारे में बताया था. चीन ने इस बीमारी से होने वाली पहली मौत के बारे में डब्ल्यूएचओ को मिड जनवरी में रिपोर्ट दी थी. 12 जनवरी को चीन ने ये भी कहा था कि इस वायरस के इंसानों से इंसानों में फैलने के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं.
21 जनवरी को पहली बार डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस को लेकर अपनी पहली रिपोर्ट जारी की थी. उस समय तक चीन में 278 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके थे और तीन अन्य देशों में ये वायरस फैल चुका था.
वुहान के मेडिकल प्रोफेशनल्स के बयानों को ताइवान के सीनियर वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर यी-चुन लो ने भी सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा कि इस वायरस को लेकर शुरुआत में मैनेजमेंट पूरी तरह से असफल साबित हुआ था. मुझे लगता है कि चीन अगर पारदर्शिता के साथ शुरुआती दौर में ही जरूरी जानकारी मुहैया करा देता तो इस महामारी को रोका जा सकता था.
इसके अलावा इस डॉक्यूमेंट्री में ताइवान के डॉ यीन चींग ने भी अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि वो और उनकी टीम ये पता लगाने की काफी कोशिश कर रहे थे कि क्या ये वायरस इंसानों से इंसानों में फैलता है. हालांकि चीन में यात्रा करने के बाद और कड़ी जांच के बाद भी उन्हें चीनी प्रशासन ने ठीक से जवाब मुहैया नहीं कराए थे. बता दें कि डब्ल्यूएचओ की एक टीम भी फिलहाल कोरोना वायरस को लेकर जांच के लिए वुहान में है.