लगातार बढ़ते प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन की वजह से सदी के आखिर तक यानी 2100 तक दुनिया के कई इलाके रहने लायक नहीं बचेंगे. यह अनुमान है मीटियरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) का. संस्थान के वैज्ञानिकों को आशंका है कि आने वाले सालों में धरती का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. यदि ऐसा होता है तो धरती के कई इलाकों में इंसानों का रहना मुश्किल हो जाएगा.
World Meteorological Organization के अनुसार, पिछले 22 सालों में धरती पर सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी है और हर साल गर्मी में इजाफा हो रहा है. यही ट्रेंड कायम रहा तो 2100 तक धरती कई इलाकों में इंसानों का रह पाना मुश्किल होगा. इन इलाकों में भारत के भी कई बड़े शहर शामिल हो सकते हैं.
हाल ही में मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेस की क्लाइमेट चेंज पर आई एक रिपोर्ट में भी 2100 तक भारत का तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की बात कही जा रही है. 2015 में क्लाइमेट चेंज को लेकर पेरिस में तापमान 2100 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस के अंदर रोकने का लक्ष्य था, लेकिन बढ़ते प्रदूषण और शहरीकरण के कारण वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा होते दिख नहीं रहा है.
भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि 1901 के बाद 2019 7 वां ऐसा साल रहा जो सबसे गर्म रहा. 2019 में देश का तापमान 0.36 डिग्री सेल्सियस बढ़ा. ताज्जुब की बात तो ये है कि जो 7 सबसे गर्म साल रहे वो 2009 से लेकर 2019 तक 11 साल दर्ज किए गए हैं. इनमें अब तक सबसे गर्म साल 2016 रहा है. उस साल देश का तापमान 0.72 डिग्री सेल्सियस बढ़ा था.
वहीं, जर्मनी की संस्था जर्मन वॉच का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के मामले में भारत बेहद संवेदनशील देश है. साथ ही आबादी काफी ज्यादा है. ऐसा अनुमान है कि भारत के 60 करोड़ लोग यानी 45% आबादी ऐसी जगह रहती है जहां 2050 तक क्लाइमेट चेंज के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज का अनुमान है कि 2050 तक 20 करोड़ लोग माइग्रेशन करेंगे. यानी वो ऐसे स्थानों का रुख करेंगे जहां ज्यादा गर्मी ना हो.