कोविड 19 से पैदा संकट काल में जीने का अंदाज बदल गया है. लोग पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ आगे बढ़ रहे हैं और नई सोच को जीवन में उतारा है. उत्तर प्रदेश के औरैया में कुछ ऐसा ही देखने को मिला. जहां पर क्वारनटीन सेंटर एक शादी हुई, जिसमें गिनती के कुछ ही लोग शामिल हुए और इस शादी में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा गया था. दूल्हा और दुल्हन ने मास्क पहनकर सात फेरे लिए जयमाला डाली और सबसे मुश्किल समय में हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए.
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दिल्ली के रहने वाले बाबूराम ने अपनी बेटी राधा की शादी औरैया जिले के सिकरोड़ी गांव निवासी संतोष कुमार के बेटे श्रीकांत के साथ तय की थी. मार्च माह में बाबूराम अपने परिवार के साथ अजीतमल क्षेत्र के गांव शाहपुर बेदी रिश्तेदारी में झंडा चढ़ाने आए थे. इसी बीच 25 मार्च को लॉकडाउन हो गया और वापस दिल्ली नहीं जा सके. इसके अलावा श्रीकांत जो दूसरे शहर में नौकरी करता है अपने घर लौटने पर उसे भी 14 दिन के लिए क्वारनटीन सेंटर भेज दिया गया. ऐसे में सबके समाने दिक्कत खड़ी हो गई.
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इन दौरान लॉकडाउन बढ़ता गया और शादी की तारीख भी नजदीक आ गई. फिर दोनों के परिजनों ने क्वारनटीन सेंटर में ही शादी करने का फैसला लिया. इस मामले को लेकर अधिकारियों से बातचीत की गई. जिस पर उपजिलाधिकारी रमेश यादव ने दोनों पक्षों को शादी करने की अनुमति भी दे दी.
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मंगलवार की रात क्वारनटीन सेंटर में उपजिलाधिकारी रमेश यादव और विद्यालय के प्रबंधक सुधीर गुप्त, प्रधानाचार्य गोपाल डे की मौजूदगी में सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखते हुए शादी कराई गई. इस मौके पर मौजूद सभी लोगों ने नव विवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया. इस शादी को लेकर जिले में चर्चाएं हो रही हैं.
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कोरोना ने अब शादी का तरीका बदल दिया है. रस्में वही हैं, लेकिन अंदाज थोड़ा नया है. न बैंड- बाजा न बाराती और न ज्यादा भीड़ भाड़. एक ही दिन में तेल, हल्दी से लेकर फेरे और विदाई तक की रस्में महज 3-4 घंटे में ही पूरी हो रही हैं.