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मंगल ग्रह पर आई थी भयावह बाढ़, क्यूरियोसिटी रोवर ने खोजे जीवन के सबूत!

Curiosity Rover finds evidence of ancient flood and life on Mars
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मंगल ग्रह पर कभी भयानक बाढ़ आई थी. इसे वैज्ञानिक मेगाफ्लड कह रहे हैं. साथ ही ये भी उम्मीद जता रहे हैं कि अगर बाढ़ आई थी तो इसका मतलब वहां कभी जीवन रहा होगा. नासा द्वारा भेजे गए मार्स क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर आए बाढ़ के सबूत भेजे हैं. जिन्हें देखकर लगता है कि करोड़ों साल पहले वहां जीवन रहा होगा. आइए जानते हैं कि आखिर मंगल ग्रह पर बाढ़ और जीवन की सच्चाई क्या है? 

Curiosity Rover finds evidence of ancient flood and life on Mars
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जैक्सन स्टेट यूनिवर्सिटी, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के शोधकर्ता इस समय नासा (NASA) के साथ मिलकर मंगल ग्रह पर भेजे गए मार्स क्यूरियोसिटी रोवर (Mars Curiosity Rover) द्वारा भेजे गए डेटा का एनालिसिस कर रहे हैं. इसी डेटा का एनालिसिस करने पर पता चला कि मंगल ग्रह पर 400 करोड़ साल पहले एक भयानक बाढ़ आई थी. इसके सबूत मंगल ग्रह के गेल क्रेटर (Gale Crater) में मिले हैं. 

Curiosity Rover finds evidence of ancient flood and life on Mars
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अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतनी भयानक बाढ़ आई कैसे? आपको बता दें मंगल ग्रह पर बर्फ है. 400 करोड़ साल पहले यहां ज्यादा मात्रा में बर्फ रही होगी. तभी इस पर कोई एस्टेरॉयड आकर गिरा होगा. उसकी टक्कर से निकली ऊर्जा और गर्मी से बर्फ पिघली होगी और वह उसने भयानक बाढ़ का रूप ले लिया होगा. 

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क्यूरियोसिटी से मिले आंकड़ों की जांच करने के बाद वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि गेल क्रेटर में इस भयावह बाढ़ के पानी की गहराई करीब 78 फीट थी. लेकिन जब लहरें उठी तो वो विनाशकारी थीं. हर सेकेंड एक 32 फीट ऊंची लहर उठ रही थी. इतनी ऊंची लहर अगर किसी जगह उठे वो भी हर सेकेंड तो उससे होने वाली तबाही भयावह हो सकती है. 

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इस स्टडी को करने वाले शोधकर्ता अल्बर्टो जी. फेयरेन ने बताया कि 400 करोड़ साल पहले मंगल ग्रह पर जीवन के अंश थे. इनका स्वरूप बेहद सूक्ष्म रहा होगा. यानी माइक्रोबियल जीव यहां रहते होंगे. यहां पर बाढ़ के समय कुछ लहरें 30 फीट ऊंची ऊठी थी. पानी की लहर का फैलाव 450 फीट तक था. 

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इन लहरों की वजह से मंगल ग्रह की सतह पर निशान पड़ गए हैं. ये निशान लहरों के हैं. इनका अध्ययन करने पर पता चला कि गेल क्रेटर में पानी कहां-कहां और कितनी मात्रा में आया होगा. साथ ही वैज्ञानिकों को ये भी पता चला कि ये पानी कितने दिन तक यहां पर रुका रहा होगा. क्योंकि बड़ी लहरों के निशान भी गेल क्रेटर की चट्टानों और मिट्टी में मिले हैं. इन्हें वैज्ञानिक मेगारिप्लस या एंटीड्यून्स कह रहे हैं. 

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वैज्ञानिकों ने इस बाढ़ के बारे में जो अध्ययन किया है उसका आधार है मंगल ग्रह के गेल क्रेटर में स्थित पत्थर, गड्ढे, तलछट और मिट्टी पर मिले निशान. पत्थरों का आकार, झुकाव आदि. इस बाढ़ के बारे में इंसानों के अब पता चला है जब उन्होंने क्यूरियोसिटी रोवर के डेटा की जांच की. जबकि, मंगल ग्रह के चारों तरफ घूम रहे ऑर्बिटर यह जानकारी नहीं दे सकते. 

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अल्बर्टो ने बताया कि जब बाढ़ खत्म हुई होगी तब गर्मी की वजह से पानी भाप बना होगा. मंगल के वायुमंडल में नमी की मात्रा बढ़ी होगी. भले ही यह छोटे समय के लिए हो लेकिन हुआ जरूर होगा. इस समय का फायदा उठाकर सूक्ष्म जीव जरूर पनपे होंगे. क्योंकि एक और स्टडी हुई थी, उसमें ये बताया गया था कि 400 करोड़ साल पहले लाल ग्रह पर एक तूफान आया था. जिसकी वजह से वहां के गड्ढों में पानी भर गया था. नदियां बहने लगी थीं. 

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