रात के अंधेरे और दिन के उजाले में जुगाड़ का रिक्शा चलाते हुए चलाते हुए एक मजदूर परिवार ने करीब 600 किलोमीटर का सफर 5 दिन और 5 रातों में तय किया. तब जाकर परिवार अपने घर वापस पहुंच पाया. मजदूर ने अपनी पत्नी, तीन बच्चों के साथ घर-गृहस्थी का पूरा सामान जुगाड़ कर रिक्शे पर रखा था. इस मजदूर ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे इस तरह कभी रिक्शा लेकर महानगरों की दौड़ती-भागती जिंदगी से वापस सन्नाटे में पसरे अपने गांव लौटना होगा.
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मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के हरपालपुर में रहने वाला शख्स रात के अंधेरे में बीवी-बच्चों और घर-गृहस्थी का सामान रखकर रिक्शा चलाता हुआ दिल्ली से मजबूर होकर अपने गांव वापस पहुंचा है.
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वजह वही कि लॉकडाउन हुआ तो रोजगार छिना. तब मवैया गांव में रहने वाला वृदांवन अहिरवार अपनी बीवी, तीन बच्चों को जुगाड़ के रिक्शे से दिल्ली के बवाना से हरपालपुर में अपने घर ले आया.
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रास्ते में मिले मीडियाकर्मियों को अपनी दर्द भरी दास्तान सुनाते हुए उसने कहा कि लॉककडाउन के दौरान मकान मालिक परेशान कर रहे थे लेकिन उनके पास मकान मालिक को देने के लिये किराया नहीं था.
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किराया भी कहां से देते जब बच्चों को खाना खिलाने के लिए घर पर अनाज का दाना भी नहीं था. परिवार को मरते देख नहीं सकते थे इसलिए उन्होंने जुगाड़ का रिक्शा तलाशा और परिवार को उसमें बैठाकर अपने गांव वापस ले आया. वृंदावन ने अब कभी दोबारा दिल्ली वापस न जाने की बात कही है.
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किसी तरह 5 दिन और 5 रात रिक्शा चलाते हुए यह मजदूर परिवार के पांच लोगों के बोझ को रिक्शे पर घसीटते हुए शुक्रवार को अपने गांव पहुंचा है.