मधुबनी जिले में मां दुर्गा को नाम आंखों से विदाई दी गई. इस दौरान पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया. दुर्गा विसर्जन के दौरान हजारों श्रद्धालु उनके पीछे-पीछे चल रहे चलते हुए नजर आए. जिन रास्तों से दुर्गा की प्रतिमा गुजरी उन रास्तों को मधुबनी पेंटिंग और रंग, अबीर और गुलाल से सजाया गया.
(इनपुट- अभिषेक कुमार झा)
विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन किया गया. जिस प्रकार बेटियां अपनी ससुराल से मायके घूमने आती हैं और कुछ दिन बिताने के बाद वापस अपने घर यानी अपने ससुराल चली जाती हैं. उसी प्रकार मां दुर्गा भी अपने मायके यानी इस धरती पर आती हैं और 9 दिन के बाद फिर से अपने घर चली जाती हैं.
मिथिला में बेटियों को विदा करते समय उन्हें कुछ खाने-पीने का सामान और अन्य प्रकार की भेंट भी देने की परंपरा है, इसलिए विसर्जन के समय एक पोटली में मां दुर्गा के साथ भी श्रृंगार का सारा सामान और खाने की चीजें रख दी जाती हैं.
दुर्गा जी की मूर्ति के साथ सामानों की पोटली का रिवाज काफी खास है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि देवलोक तक जाने में उन्हें रास्ते में कोई तकलीफ न हो.