केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ बीते 16 दिन से सड़कों पर उतरे किसानों ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है. किसानों ने अब जयपुर-दिल्ली, दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे को अवरुद्ध करने की घोषणा की है जिसके बाद इन हाइवे पर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं. बता दें कि किसान सरकार से कृषि बिल को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. कई दौर की बातचीत के बाद भी इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. (तस्वीर - पीटीआई)
शनिवार को किसान संगठनों के नेताओं ने प्रदर्शन की समीक्षा और आंदोलन के भविष्य को लेकर सिंघु बॉर्डर पर एक बैठक भी बुलाई है. किसानों ने 14 दिसंबर को जिला कलेक्टर ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन की योजना बनाई है. इन तमाम मुद्दों को लेकर शाम की बैठक में बातचीत की जाएगी. (तस्वीर - पीटीआई)
हरियाणा के किसान भी आंदोलन में शामिल होने के लिए अब दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं. कुरुक्षेत्र जिले में किसान ट्रैक्टरों में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं. सड़क पर ट्रैक्टरों की लंबी कतार दिखाई दे रही है. जिसमें इलाके के किसान सवार होकर दिल्ली के लिए कूच कर रहे हैं. ये सभी दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन देने के लिए निकले हैं. (तस्वीर - पीटीआई)
वहीं किसान आंदोलन में विवादित पोस्टर की मौजूदगी को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि अगर बैन किए गए संस्थानों के लोग हमारे इर्द-गिर्द दिखाई दे रहे हैं तो सेंट्रल इंटेलिजेंस को उन्हें पकड़कर जेल भेजना चाहिए. हमें अपने आंदोलनकर्ताओं के बीच ऐसा कोई शख्स दिखाई नहीं दे रहा है. अगर हमें ऐसा कोई मिला तो हम उन्हें बाहर निकाल देंगे. दरअसल खुफिया सूत्रों के अनुसार किसान आंदोलन से जुड़ी एक रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है, जिसमें आंदोलन को अतिवादी वामपंथी संगठनों द्वारा हाइजैक करने की बात कही गई है. (तस्वीर - पीटीआई)
वहीं दूसरी तरफ नये कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को साफ संदेश देते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि कृषि क्षेत्र में किये गये सुधारों से उन्हें नये बाजार उपलब्ध होंगे और उनकी आय बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि नये कृषि कानूनों के जरिये कृषि क्षेत्र में बाधाओं को हटाने का काम किया गया है. इससे क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकी आयेगी और निवेश बढ़ेगा. (तस्वीर - पीटीआई)
प्रधानमंत्री ने देश के प्रमुख उद्योग मंडल फिक्की की 93वीं सालाना आम बैठक का वीडियो कन्फ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन करते हुये यह बात कही. उन्होंने उद्योगपतियों को कृषि क्षेत्र में निवेश करने की अपील करते हुये कहा कि इस कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र की ओर से जितना निवेश होना चाहिये था उतना नहीं हुआ है. (तस्वीर - पीटीआई)
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं जब किसान संगठन तीन नये कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर बीते 16 दिन से सड़कों पर डटे हुए हैं. किसान सरकार से इन कानूनों को वापस लिये जाने की मांग कर रहे हैं. पीएम के बयान के बाद किसानों की बात नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने ट्वीट कर कहा, कृषि कानूनों को हटाने के लिए हमारे किसान भाइयों को और कितनी आहुति देनी होगी? (तस्वीर - पीटीआई)