अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की तारीख से एक दिन पहले धरती की तरफ एक एस्टेरॉयड आ रहा है. यह एक छोटे फ्रिज के आकार का है. वैसे तो इसके धरती से टकराने की कोई आशंका नहीं है. लेकिन अगर किसी कारण से यह दिशा बदल कर धरती की तरफ आता है तो यह पृथ्वी के वायुमंडल में ही टूट कर खत्म हो जाएगा. यह दावा किया है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने. (फोटोः गेटी)
नासा (NASA) ने बताया कि इस एस्टोरॉयड का नाम है 2018VP1. यह एस्टेरॉयड करीब 6.5 फीट लंबा है. धरती की तरफ इसके आने की आशंका सिर्फ 0.41 फीसदी है. अगर आ भी जाता है तो इससे धरती या उस पर रहने वाले लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा. (फोटोः गेटी)
इससे पहले यह एस्टेरॉयड 1970 में धरती के बेहद करीब से निकला था. साल 2018 के नवंबर महीने में भी यह धरती के बगल से निकला था. यह अपने सूरज के चारों तरफ अंडाकार कक्षा में चक्कर लगाता है. 2018 में हमारे वायुमंडल से इसकी दूरी कम से कम 4800 किलोमीटर और ज्यादा 2.60 लाख किलोमीटर थी. (फोटोः गेटी)
नासा के वैज्ञानिक कहते हैं कि इतने छोटे एस्टेरॉयड के आने की पहले से गणना करना बड़ा मुश्किल होता है. जब तक कि ये धरती के बेहद करीब न आ जाएं. लेकिन ज्यादातर एस्टेरॉयड हमारे चंद्रमा की दूरी से भी ज्यादा दूरी से निकल जाते हैं. (फोटोः गेटी)
नासा ने बताया कि पिछले हफ्ते हिंद महासागर के ऊपर से एस्टेरॉयड 2020QG निकला था. तब उसकी गति 2995 किलोमीटर प्रति घंटा थी. लेकिन नासा इस एस्टेरॉयड को पहचान ही नही पाया. हाल ही में दर्ज कि गई किसी एस्टेरॉयड की यह सबसे कम दूरी थी. साल 2005 में नासा ने 90 फीसदी एस्टेरॉयड खोजे जिनका आकार 459 फीट से ज्यादा है और ये धरती के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. (फोटोः गेटी)
नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी स्थित सेंटर फॉर नीयर अर्थ ऑब्जेक्ट्स स्टडीज निदेशक पॉल चोडस ने कहा कि छोटे आकार के एस्टेरॉयड्स को खोजना एक बड़ी उपलब्धि है. क्योंकि ये बहुत तेजी से धरती के बगल से निकल जाते हैं. कई बार इनके आने-जाने का पता ही नहीं चल पाता. वैसे तो इनसे खतरा कम ही होता है लेकिन अगर इनका छोटा हिस्सा भी वायुमंडल पार करते धरती पर आ गया तो तबाही मचा सकता है. (फोटोः गेटी)