गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडे ने एक नई पहल शुरू की है. जिले के सरकारी दफ्तरों में बिजली को कैसे बर्बाद होने बचाया जाए इस पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया हुआ है. दफ्तर में बिजली की बर्बादी होने पर संबंधित अधिकारियों पर दंड लगाया जा रहा है.
(इनपुट: मयंक गौड़)
इस अनूठी पहल में पहले सभी सरकारी कार्यालयों पर अचानक छापेमारी की जा रही है और दंड लगाया जा रहा है. दफ्तर में कर्मचारी या अधिकारी न होने पर यदि बिजली का दुरुपयोग पाया गया तो उनके खिलाफ अर्थदंड लगाकर सख्त कार्रवाई की जा रही है.
इस नियम को डीएम अजय शंकर पांडे ने खुद पर सख्ती के साथ लागू किया. जब वह अपने दफ्तर में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पंखा पहले से ही चला रहा है और रूम की लाइट भी ऑन थी और वहां कोई मौजूद भी नहीं था. वहां पर मौजूद कर्मचारियों से इसकी जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि आधे घंटे पहले ही पंखा चलाया गया है. फिर उन्होंने आधे घंटे तक लाइट, पंखा और एसी नहीं चलाया या क्योंकि आधे घंटे से बिजली बर्बाद हो रही थी.
जिले के विभिन्न विभागों में औचक निरीक्षण कर रहे जिलाधिकारी अजय पांडेय जहां भी कुछ कमी पाते हैं उसे न केवल दुरुस्त करते हैं बल्कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रायश्चित करने को भी कहते हैं. इस समय वह बिजली की बचत को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं.
उन्होंने संबंधित विभागों को साफ- साफ कह रखा है कि कोई बिजली बेवजह खर्च न करें यह नियम उन्होंने अपने कार्यालय पर भी लागू कर रखा है. उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने कार्यालय से जाएगा तो उसे हर हाल में बिजली के स्विच ऑफ करने होंगे. बावजूद इसके कहीं भी बिजली बर्बादी पकड़ी गई तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पर अर्थदंड लगाकर बिजली बिल की वसूली की जाएगी.