देश और दुनिया का सबसे महंगा मशरूम कौन सा है. ये मशरूम भारत में मिलता है. इस मशरूम की डिमांड दुनियाभर में है. इसलिए अब मांग की जा रही है कि इस सब्जी को जीआई टैग (GI Tag) दिया जाए. इसके बारे में खुद नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने ट्वीट किया है. आपको बता दें कि अगर आपको यह मशरूम एक किलोग्राम खरीदना है तो आपको खर्च करने पड़ सकते हैं 20 से 30 हजार रुपए. इसे खाने से दिल संबंधी कोई बीमारी नहीं होती. ये एक तरह से मल्टी-विटामिन की प्राकृतिक गोली है. (फोटोः गेटी)
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने अपने ट्वीट में लिखा है कि भारत के सबसे महंगे मशरूम के लिए जीआई टैग की मांग की गई है. यह मशरूम जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में पैदा होता है. इसकी कीमत खुदरा बाजार में 20 हजार रुपए प्रति किलो से ज्यादा तक जाती है. पिछली साल केसर को जीआई टैग दिया गया था. इस सब्जी का नाम गुच्छी (Gucchi). यह हिमालय पर मिलने वाले जंगली मशरूम की प्रजाति है. बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए किलो है. (फोटोः गेटी)
GI tag sought for India’s costliest mushroom. The Gucchi mushroom grown in the wild in Doda district of J&K is an heirloom crop which retails for over ₹ 20,000 a kg. They are cherished for their antioxidant & anti microbial properties. Last year saffron was granted GI tag.
— Amitabh Kant (@amitabhk87) January 18, 2021
गुच्छी नाम की इस सब्जी को बनाने में ड्राय फ्रूट, सब्जियां और देशी घी का इस्तेमाल होता है. यह भारत की दुर्लभ सब्जी है, जिसकी मांग विदेशों में भी होती है. लोग मजाक में कहते हैं कि अगर गुच्छी की सब्जी खानी है तो बैंक से लोन लेना पड़ सकता है. लजीज पकवानों में गिनी जाने वाली औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी के नियमित उपयोग से दिल की बीमारियां नहीं होती हैं. दिल की बीमारियों से पीड़ित लोग अगर इसे रोज थोड़ी मात्रा में ले तो उन्हें फायदा होगा. इसे हिमालय के पहाड़ों से लाकर सुखाया जाता है. इसके बाद इसे बाजार में उतारा जाता है. इसमें अलग-अलग क्वालिटी की सब्जी आती है. (फोटोः गेटी)
गुच्छी का वैज्ञानिक नाम मार्कुला एस्क्यूपलेंटा है. आमतौर पर मोरेल्स भी कहते हैं. इसे स्पंज मशरूम भी कहा जाता है. यह मशरूम की ही एक प्रजाति मॉर्शेला फैमिली से संबंध रखता है. यह ज्यादातर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों पर उगाए जाते हैं. कई बार बारिश के सीजन में ये खुद ही उग जाते हैं. लेकिन अच्छी मात्रा में जमा करने में लोगों को कई महीने लग जाते हैं. क्योंकि पहाड़ पर इतनी ऊपर जाकर जान जोखिम में डालकर यह सब्जी लाना इसकी कीमत बढ़ाता है. (फोटोः गेटी)
गुच्छी (Gucchi) को बारिश में जमा करके इसे सुखाया जाता है. फिर इसका उपयोग सर्दियों में ज्यादा होता है. अमेरिकी, यूरोप, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड के कुल्लू की गुच्छी को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं. गुच्छी में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-बी, डी, सी और के होता है. इस सब्जी में हद से ज्यादा पोषक तत्व मौजूद होते हैं. (फोटोः गेटी)
प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाली गुच्छी फरवरी से लेकर अप्रैल के बीच मिलती है. बड़ी-बड़ी कंपनियां और होटल इसे हाथों-हाथ खरीद लेते हैं. इस कारण इन इलाकों में रहने वाले लोग सीजन के समय जंगलों में ही डेरा डालकर गुच्छी इकट्ठा करते हैं. इन लोगों से गुच्छी बड़ी कंपनियां 10 से 15 हजार रुपए प्रतिकिलो के हिसाब खरीद लेती हैं. बाजार में यह 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो के भाव से बेची जाती है. (फोटोः गेटी)
इस सब्जी का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक कहते हैं कि पहाड़ के लोग भी जल्दी गुच्छी (Gucchi) चुनने नहीं जाते. क्योंकि गुच्छी एक बार जहां उगती है, जरूरी नहीं उसी जगह अगली बार भी उगे. कई बार यह सीधी चढ़ाई पर उग जाती है. या फिर गहरी घाटियों में. कभी-कभी तो पहाड़ों पर ऐसी जगह उगती है जहां जा पाना नामुमिकन होता है. (फोटोः गेटी)
कहानियां भी सुनाई जाती है कि जब पहाड़ों पर तूफान आता है और उसी समय बिजली गिरती है तो गुच्छी की फसल पैदा होती है. हालांकि, पाकिस्तान के हिंदुकुश पहाड़ों पर भी ये सब्जी उग जाती है. वहां भी लोगों ने इसे देखा है. पाकिस्तान के लोग भी इसे सुखाकर विदेशों में बेचते हैं. विदेशों में इसे दुनिया का सबसे बेहतरीन मशरूम कहा जाता है. (फोटोः गेटी)
ज्यादातर लोगों को सुखाए हुए गुच्छी (Gucchi) खाने के लिए मिलते हैं. इसलिए उसमें वो स्वाद और स्पंजीनेस नहीं आता जो कि ताजा गुच्छी को खाने में आता है. कश्मीर के लोग जब गुच्छी को एकदम ताजा-ताजा मसालों के साथ पकाते हैं तो इसका देसी स्वाद और भी बेहतरीन लगता है. दुनिया भर के रेस्टोरेंट्स में गुच्छी (Gucchi) के कबाब बेहद प्रसिद्ध हैं. यही नहीं गुच्छी से लोग मिठाई भी बनाते हैं. जब आप इसका मीठा लकड़ी वाला मस्क स्वाद अपने मुंह में महसूस करते हैं अलग ही आनंद आता है. (फोटोः गेटी)
गुच्छी (Gucchi) का पुलाव भी बनाया जाता है. कश्मीर में इसे बट्टकुछ कहते हैं. ऐसी जानकारी भी सामने आई है कि सिंहस्थ कुंभ में कुछ अखाड़े किसी एक दिन या कुछ दिन तक अपने यहां भंडारे में गुच्छी (Gucchi) की सब्जी बनवाते हैं. जिस दिन ऐसा होता है उस दिन साधु-संतों के उस अखाड़ें में प्रसाद खाने वालो की खासी भीड़ होती है. (फोटोः गेटी)