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तैयार हो रही बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल, कैंसर जैसी बीमारियों में फायदेमंद

तैयार हो रही बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल.
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कोरोना काल के बाद लोग अब अपनी सेहत पर सबसे ज्यादा ध्यान रखने लगे हैं. लोग उन चीजों का उपयोग अपने भोजन में सबसे ज्यादा कर रहे हैं, जिन्हें हमारे पूर्वज सेहत बढ़ाने के लिए खाया करते थे. लोगों के इस रुझान को देखते हुए पाली में अब गेहूं बोने की पुरानी पद्धति फिर से अपनाई जा रही है. 

तैयार हो रही बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल.
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राजस्थान के पाली में एक बार फिर से बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं का चलन शुरू हो रहा है. दरअसल, बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं यह सुनने में काफी अचंभित करने वाला है, लेकिन हमारी भोजन श्रृंखला में वर्तमान में खाया जाने वाला गेहूं का चलन काफी पुराना नहीं है. 

तैयार हो रही बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल.
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हमारे पूर्वज इन तीन रंगों का गेहूं खाकर अपने शरीर को 100 वर्ष तक स्वस्थ रखते थे. पाली जिला मुख्यालय पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से एक बार फिर से लोगों की सेहत को बढ़ाने के लिए इन तीनों ही गेहूं के बीज का उत्पादन शुरू कर दिया गया है. 

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तैयार हो रही बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल.
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अब इन बीजों से पाली के किसान अपने खेतों में फिर से पूर्वजों की इस गेहूं बोने की पुरानी पद्धति को अपना कर फिर गेहूं उगाएंगे. पाली में एक बार फिर से बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं के उत्पादन चलन शुरू हो गया है, जो लोगों को सेहत प्रदान करेगा.

तैयार हो रही बैंगनी, काले और हरे रंग के गेहूं की फसल.
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इस गेहूं की खास बात यह है कि इसका रंग काला होता है. काले गेहूं में कई पौष्टिक तत्व होते हैं. इस गेहूं में कैंसर, डायबिटीज, तनाव, दिल की बीमारी और मोटापे जैसी बीमारियों की रोकथाम करने की क्षमता होती है. सामान्य गेहूं की तुलना में काले गेहूं की न्यूटीशियन वैल्यू अधिक होती है. इसके अलावा इसमें फाइबर कंटेट भी होता है, जो शुगर और कैंसर रोगियों के लिए फायदेमंद होता है.

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