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इस तरह सिंधु बॉर्डर पर डटे हैं किसान, आम लोगों से लेकर NGO पहुंचा रहे खाना

सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं किसान
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केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है और वो दिल्ली सीमा पर डटे हुए हैं. आज किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत हो रही है जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. लेकिन इस दौरान सिंधु बॉर्डर पर डटे किसानों ने ट्रैक्टर ट्राली को ही अपना अस्थाई निवास बना लिया है. किसान सड़क पर ही बिस्तर लगाकर खुले आसमान के तले कंबल-रजाई लेकर रात भर सोते हैं. कृषि संबंधित 3 कानूनों की वापसी की मांग को लेकर पंजाब के किसान सिंधु बॉर्डर पर पिछले 5 दिन से आंदोलन कर रहे हैं (इनपुट - अशोक सिंघल)

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ट्रैक्टर- ट्राली में राशन लेकर सिंधु बॉर्डर पर पहुंचे किसान लंबी लड़ाई के मूड में हैं. कृषि कानून में बदलाव तक वो यहीं रुकने का दावा कर रहे हैं. किसान घर वालों को भी आश्वस्त कर के आए हैं कि वो कोई भी चिंता ना करें और जब भी जरूरत होगी वो खुद फोन करेंगे.

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इसके अलावा दिल्ली के सामाजिक संगठन और एनजीओ भी आंदोलनकारी किसानों की मदद कर रहे हैं. राशन से लेकर खाने-पीने और दवाइयों तक सबकी व्यवस्था कर रहे हैं. इन संगठनों में सठखंड सेवा सोसायटी और यूनाइटेड सिख ऑर्गेनाइजेशन जैसे एनजीओ शामिल हैं. इसके अलावा भी अलग-अलग लोग स्थानीय स्तर पर अपनी सेवाएं इन आंदोलनकारी किसानों को दे रहे हैं.
 

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कोई बिस्किट भिजवा रहा है कोई पानी दे रहा है तो कोई फल सब्जियां पहुंचा रहा है. सठखंड सोसाइटी के चेयरमैन इकबाल सिंह का कहना है कि हम लोग तीनों समय किसानों के लिए कुछ ना कुछ जरूर लाते हैं. किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के ज्वाइंट सेक्रेट्री सुखबीर सिंह समरा का कहना है कि हमलोगों को खाने-पीने की या किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है. हम यहां संघर्ष करने के लिए आए हैं और सरकार से अपनी मांगे मनवाएंगे.

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उन्होंने कहा, हम 6 महीने का राशन अपने ट्रैक्टर ट्राली में भरकर लाए हैं. चाहे सूखा राशन हो या फिर आटा, दाल, चावल वो सबकुछ लेकर पहुंचे हैं. समरा ने कहा, हमारे पास सब व्यवस्था है. हम गैस सिलेंडर, चूल्हा और बर्तन तक साथ लेकर आए हैं. यहां पर हम लोग लंगर बनाते हैं. स्थानीय लोग और अलग-अलग संगठन हमारी खाने में मदद करते हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर हमारा भी लंगर चलता है . जरूरत पड़ने पर लोग चंदा भी देते हैं जिससे आंदोलन चल रहा है.

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