अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर राफेल को वायुसेना में शामिल करने से ठीक पहले सभी धर्मों के गुरुओं ने पूजा-पाठ की. एकसाथ पूजा करके देश की सुरक्षा की प्रार्थना की. इसमें पंडित, मौलवी, पादरी और सिख गुरू शामिल थे. अगर आपकी रुचि अपने धर्म या अध्यात्म में है तो आप सेना में धर्मगुरु बनकर करियर बना सकते हैं. आइए जानते हैं कि सेना में इन धर्मगुरुओं की भर्ती कैसे होती है? ये सेना में क्या करते हैं? क्या इनका काम सिर्फ पूजा कराना होता है?
भारतीय सेना अलग-अलग धर्मों के अनुसार धर्मगुरुओं की नियुक्ति करती है, जैसे हिन्दू धर्म के लिए पंडितों की, मुस्लिम धर्म के लिए मौलवियों की, सिख धर्म के ग्रन्थी, ईसाई धर्म के लिए पादरी. ये धर्मगुरु सेना द्वारा संचालित मंदिरों, मस्जिद, गुरुद्वारों पूजन, इबादत इत्यादि का कार्य संपन्न करते हैं.
इस धर्मगुरुओं को अपने धर्म के उपदेश भी देने होते हैं साथ ही आध्यामिक रूप से इनका मार्गदर्शन भी करते हैं. सैनिकों के रीति-रिवाज आदि की जानकारी भी इन धर्मगुरुओं को रहती है. धर्मगुरु बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता किसी भी विषय में स्नातक और संबंधित धर्म डिग्री या डिप्लोमा है.
धर्मगुरुओं के लिए वही शारीरिक मापदंड होते हैं जो सैनिकों की भर्ती के लिए होते हैं. इन्हें कड़े प्रशिक्षण से भी गुजरना पड़ता जैसा एक सैनिक बनने के लिए होता है. भारतीय सेना द्वारा समय-समय पर विज्ञापनों या समाचार पत्रों द्वारा धर्मगुरुओं के पदों के लिए नियुक्तियां निकाली जाती हैं.
आइए जानते हैं इनकी भर्ती के लिए योग्यता क्या है? समय-समय निकाले जानी भर्तियों में आयु सीमा न्यूनतम 25 साल और अधिकतम 34 साल होती है. ये सभी धर्मगुरुओं के लिए एक समान है. इसके अलावा जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर (रीलिजियस टीचर) के लिए किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रैजुएट होना चाहिए.
पंडित और गोरखा रेजिमेंट के पंडित की भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास संस्कृत में आचार्य की डिग्री या संस्कृत में शास्त्री डिग्री और कर्म कांड में एक साल का डिप्लोमा होना चाहिए. सिखों के धर्मगुरू ग्रंथी के लिए अभ्यर्थी को पंजाबी में 'ज्ञानी' होना जरूरी है.
मौलवी और लद्दाख स्काउट्स के लिए मौलवी (शिया) पद पर भर्ती के लिए मुस्लिम अभ्यर्थियों को अरबी में मौलवी अलीम या उर्दू में आदिब अलीम होना जरूरी है. पादरी के लिए संबंधित और मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रीस्टहुड हासिल कर चुका हो. साथ ही स्थानीय बिशप द्वारा प्रमाणित सूची में आता हो.
बौद्ध धर्म के मोंक (महायान) के लिए मान्यता प्राप्त अथॉरिटी से मोंक या बौद्ध प्रीस्ट का पद हासिल कर चुका हो. किसी मोनास्ट्री के प्रमुख द्वारा पुजारी घोषित हो. मोनास्ट्री के प्रमुख के पास खांपा पीएचडी (जेशी), लोपोन या राजबम होना चाहिए. या फिर मोनैस्ट्री से प्राप्त सही सर्टिफिकेट होना चाहिए.
मेडिकल जांच वैसी ही होती है जैसी आम सैनिकों की भर्ती के दौरान की जाती है. सामान्य वर्ग के कैंडिडेट के लिए लंबाई 160 सेंटीमीटर, गोरखा-लद्दाखी के लिए 157 और अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप के स्थानीय लोगों के लिए 155 सेंटीमीटर होनी चाहिए. सीना 77 सेंटीमीटर सबके लिए मान्य है. सेना में पंडित, मौलवी, ग्रंथी और पादरी की सैलरी 57,100 रुपए से लेकर 1.77 लाख रुपए तक होती है. इसे पे-स्केल लेवल-10 तक रखा गया है.
सामान्य और लद्दाखी कैटेगरी के अभ्यर्थियों का वजन 50 किलोग्राम और गोरखा के लिए 48 किलोग्राम होना चाहिए. फिजिकल फिटनेस टेस्ट में देखा जाता है कि अभ्यर्थी 8 मिनट में 1.60 किलोमीटर दौड़ पाता है कि नहीं. पहाड़ी इलाके में 5000 से 9000 फीट के लिए 30 सेकेंड अतिरिक्त मिलते हैं. 9000 से 12 हजार फीट के लिए 120 सेकेंड अतिरिक्त मिलते हैं. ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करेंः भारतीय सेना में शामिल हों...