अमेरिका में अब जो बाइडेन राष्ट्रपति बनने वाले हैं. भारत समेत दुनियाभर के कई देशों की उम्मीदें बन-बिगड़ रही होंगी. ये तो भविष्य बताएगा लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के समय भारत के क्या अच्छा रहा और क्या बुरा, इसपर काफी चर्चा हो रही है. ट्रंप और मोदी का रिश्ता पूरी दुनिया में हमेशा चर्चित रहा. दोनों एक-दूसरे को काफी सराहते और साथ देते नजर आए लेकिन क्या ट्रंप सरकार का कार्यकाल भारत के लिए अच्छा था या बुरा...आइए जानते हैं. (फोटोःगेटी)
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका गए. उनका वहां पर भव्य स्वागत हुआ. ठीक इसी तरह डोनाल्ड ट्रंप जब भारत आए तो उनका भी वैसा ही स्वागत सत्कार हुआ. इसके अलावा पिछले पांच साल में दोनों नेता एक-दूसरे से कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मिले. लेकिन दोनों नेताओं के इतने अच्छे संबंध होने के बावजूद अमेरिका और भारत के रिश्ते उतार-चढ़ाव से भरे रहे. (फोटोःगेटी)
डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति बने उसके एक साल बाद ही उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद पनपने वाला देश बताया. ये बात उन्होंने ट्वीट करके कही. अमेरिका और भारत के रिश्तों के एक्सपर्ट कहते हैं कि ट्रंप के कार्यकाल को भारत के लिए तीन अलग-अलग चरणों में देखना चाहिए. पहला ये सुरक्षा और रक्षा के मामलों पर अमेरिका और भारत के रिश्ते बेहतरीन रहे हैं. (फोटोःगेटी)
दूसरा- डिप्लोमैटिक मामलों को अगर देखें तो दोनों देशों के बीच संबंध काफी अच्छे रहे. लेकिन तीसरे और सबसे आखिरी चरण यानी व्यापार और इकोनॉमी के हिसाब से भारत के लिए ट्रंप सरकार का कार्यकाल अच्छा नहीं रहा. हालांकि, अन्य एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब भी अमेरिका भारत के बारे में सोचता है तब वह साथ में पाकिस्तान और चीन को भी सोचता है. इसलिए भारत के साथ-साथ वह पाकिस्तान और चीन के लगभग एक जैसा रवैया रखता है. (फोटोःगेटी)
पाकिस्तान में आतंकवाद को लेकर ट्रंप के ट्वीट ने पूरी दुनिया में पाकिस्तान के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया था. क्योंकि भारत, पाकिस्तान से फंडेड आतंकवाद का बहुत पुराना शिकार रहा है. जब दुनिया का सबसे ताकतवर देश इस बात को मान ले तो ये एक अच्छे संबंध की निशानी है. ट्रंप ने अपने ट्वीट में ये भी बताया था कि कैसे अमेरिका ने पाकिस्तान खरबों डॉलर की मदद की लेकिन पाकिस्तान हमेशा से उसके साथ धोखा करता आया है. (फोटोःगेटी)
ट्रंप के इस ट्वीट के बाद से पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद में लगातार कटौती होने लगी. इससे भारत को परदे के पीछे फायदा हुआ. क्योंकि अमेरिका से मिलने वाले पैसों से पाकिस्तान की सरकार परोक्ष या अपरोक्ष रूप से आतंकवाद को बढ़ावा देती आ रही थी. फंडिंग कम होने की वजह से पाकिस्तान को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. इस वजह से पाकिस्तान और अमेरिका के बीच रिश्तों में कड़वाहट भी आई थी. (फोटोःगेटी)
बात चाहे कोरोना वायरस की हो या भारत के इलाकों पर चीन की घुसपैठ की. ट्रंप की सरकार ने हमेशा भारत का साथ दिया. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन की आलोचना की. सीमा विवाद को लेकर अमेरिका ने भारत का समर्थन इस तरीके से किया कि चीन के ऊपर अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव बनने लगा. ट्रंप ने दोनों देशों को सामंजस्य बनाने को कहा ताकि इस विवाद का हल निकल सके. (फोटोःगेटी)
लद्दाख विवाद को भारत आराम से शांत कर लेता लेकिन अमेरिका का समर्थन मिलने से उसकी ताकत कई गुना बढ़ गई. यह कूटनीतिक नजरिए से एक बड़ा कदम था. ट्रंप ने चीन के खिलाफ भारत का खुल कर समर्थन नहीं किया लेकिन कोरोना वायरस के मामले में ट्रंप ने चीन पूरी तरह से झकझोर दिया. यहां तक WHO की फंडिंग में अमेरिकी हिस्से को रोक दिया. भारत के साथ-साथ अमेरिका ने भी चीन के कई एप्स को प्रतिबंधित किया था. (फोटोःगेटी)
ट्रंप सरकार इंडो-पैसिफिक इलाके में अपना आधिपत्य मजबूती से साबित करना चाहता है. इसके लिए उसे भारत की जरूरत है. साथ ही साउथ चाइना सी में चीन के कब्जे को खत्म करना चाहता है. इसलिए अमेरिका ने भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर काम किया और कई मोर्चों पर नए रिश्ते बनाए. लेकिन ट्रंप के कार्यकाल में भारत को व्यापारिक नुकसान हुआ. अमेरिका ने साल 2019 में जीएसपी जैसी चीजों पर भारत को शुल्क मुक्त आयात की सुविधा बंद कर दी. इससे भारत में रत्न, आभूषण, चावल, चमड़ा जैसे कई उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ. (फोटोःगेटी)
ट्रंप सरकार ने H1B वीजा को लेकर कई बार बदलाव किए. जिसका खामियाजा भारतीय सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट्स, स्टूडेंट्स, टेक्नोक्रेट्स आदि पर पड़ा. हजारों भारतीयों का वीजा अटक गया. एक्सपर्ट इसे भारत के खिलाफ उठाया गया कदम नहीं कहते. वो कहते हैं कि ट्रंप स्वदेशी की रणनीति पर चल रहे थे, जैसे मोदी भारत में चल रहे हैं. अमेरिका ने ईरान पर कई रोक लगाए लेकिन भारत को चाबहार डील में शामिल रहने दिया. रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद पर अमेरिका ने भारत को कुछ नहीं कहा. (फोटोःगेटी)