दुनिया भर में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद भारत में 24 मार्च से केंद्र सरकार ने पूरे देशव्यापी लॉकडाउन का फैसला लिया था. कोरोना वायरस जैसे संकट के शुरुआती दौर में ही कड़े प्रतिबंध लगाने वाले देशों में भारत भी शामिल है. इसका सबसे बड़ा कारण भारत की बड़ी आबादी और जनसंख्या घनत्व है. भारत के कोरोना प्रभावित राज्यों की जितनी जनसंख्या तो दुनिया के कई देशों की है. ऐसे में अगर कठोर फैसले नहीं लिए जाते तो भारत में आज कोरोना मरीजों की संख्या कई गुना ज्यादा हो सकती थी. अभी देश की अनुमानित जनसंख्या करीब 130 करोड़ है.
इस वायरस के फैलने में जनसंख्या मायने रखती है. यह वायरस अब भी दुनिया के लिए नया है और पिछले साल के अंत में इसने मनुष्यों को संक्रमित करना शुरू किया था. वैज्ञानिक अभी भी वायरस से लड़ने के लिए ड्रग्स या वैक्सीन को विकसित करने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं.
स्वास्थ्य सेवाओं में कमी की वजह से दुनिया भर के कई देशों में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया गया. मानव-से-मानव में संक्रमण की रफ्तार को कम करने के लिए लोगों के बीच संपर्क को कम करना और संक्रमित लोगों का पता लगाना और उन्हें अलग करना ही अभी एकमात्र उपाय है. ऐसे में भारत के लिए खतरा काफी बड़ा है.
भारत में एक-एक राज्यों की जितनी आबादी है उतनी जनसंख्या दुनिया के अलग-अलग देशों की है. इसलिए यहां लॉकडाउन का सख्त फैसला लेना पड़ा.
महाराष्ट्र जो कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित है उसकी आबादी जापान की आबादी के बराबर है. ऐसे देश कोरोना वायरस से ज्यादा कारगर तरीके से लड़ने में सक्षम है.
राजधानी दिल्ली में 1500 ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीजों की अभी तक पुष्टि हो चुकी है. दिल्ली की जितनी आबादी है इतनी ही आबादी हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका की भी है. श्रीलंका में अभी तक कोरोना के 238 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं.
वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान में 1000 से ज्यादा कोरोना के संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है. इन दोनों राज्यों की जितनी जनसंख्या है लगभग उतनी ही जनसंख्या कोरोना से बुरी तरह प्रभावित दो यूरोपीय देश जर्मनी और UK की है.
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या अभी 800 है. यूपी की जनसंख्या भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आबादी के बराबर है जहां 7000 हजार कोरोना संक्रमिक मरीजों की अब तक पहचान हुई है.
वहीं कोरोना से बुरी तरह प्रभावित तमिलनाडु की जनसंख्या ईरान के बराबर है जबकि केरल की आबादी की तुलना उज्बेकिस्तान से की जा सकती है.