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गगनयान के एस्ट्रोनॉट्स के लिए खरीदे जाएंगे Mission Alpha जैसे यंत्र-उपकरण

India France in Discussion for Mission Alpha Gaganyaan
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भारतीय एस्ट्रोनॉट्स यानी अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में पहुंचाने का मिशन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे दुनियाभर के देश भारत को अलग-अलग तरह से मदद करने को तैयार है. फिलहाल, भारत और फ्रांस के बीच बातचीत चल रही है कि दोनों देश गगनयान मिशन में जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों को अत्याधुनिक उपकरण और यंत्र मुहैया कराएंगे. फ्रांस गगनयान मिशन के लिए अगले साल मिशन अल्फा जैसे उपकरण भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को दे सकता है. 

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आपको बता दें कि मिशन अल्फा फ्रांस का सबसे अत्याधुनिक स्पेस मिशन है, जिसे फ्रांस के एस्ट्रोनॉट थॉमस पेस्क्यू पूरा करेंगे. फ्रांस की स्पेस एजेंसी नेशनल सेंटर फॉर स्पेस स्टडीस (CNES) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मिशन अल्फा के लिए उपकरणों पर काम चल रहा है. थॉमस पेस्क्यू अभी यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station - ISS) के लिए अगले साल स्पेस एक्स (Space X) के ड्रैगन क्रू (Dragon Crew) स्पेसक्राफ्ट में जाएंगे. 

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CNES के अधिकारी ने कहा कि चर्चा अंतिम चरण में है. इसे लेकर जल्द ही एक घोषणा की जा सकती है. मिशन अल्फा के लिए उपकरणों पर काम चल रहा है. हालांकि, अधिकारी ने इस उपकरण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. यह उपकरण किस काम आएगा, कैसे उपयोग किया जाएगा. कौन करेगा और यह किस तरह के काम में मदद करेगा. इन सब विषयों की कोई जानकारी नहीं दी गई है. 

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भारत और फ्रांस अंतरिक्ष के क्षेत्र में मजबूत सहयोग साझा करते हैं. दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां करीब 10 हजार करोड़ रुपए के गगनयान मिशन में सहयोग कर रही हैं. इसका उद्देश्य 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजना है. 

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पिछले साल, CNES के साथ फ्लाइट सर्जन ब्रिगिट गोडार्ड भारत में डॉक्टरों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने भारत आए थे. फ्रांस में अंतरिक्ष चिकित्सा (स्पेस मेडिसिन) के लिए एक अच्छी तरह से स्थापित तंत्र है. इसमें फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस मेडिसिन एंड फिजियोलॉजी है, जहां अंतरिक्ष सर्जन प्रशिक्षण से गुजरते हैं. 

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इसरो (ISRO) के एक अधिकारी ने कहा कि एक बार कोरोना वायरस की वजह से उत्पन्न हुई स्थिति सामान्य होने के बाद अगले साल भारतीय स्पेस सर्जन भी फ्रांस जाएंगे. गगनयान मिशन के तहत ISRO तीन अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष में सात दिन की यात्रा कराएगा. इन अतंरिक्षयात्रियों को सात दिन के लिए पृथ्वी की लो-ऑर्बिट में चक्कर लगाना होगा. इस मिशन के लिए ISRO ने भारतीय वायुसेना से अंतरिक्षयात्री चुनने के लिए कहा था.

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दिसंबर 2021 में इसरो तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजेगा. उससे पहले दो अनमैन्ड मिशन होंगे. ये दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में किए जाएंगे. इन दोनों मिशन में गगनयान को बिना किसी यात्री के अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.

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इसके बाद दिसंबर 2021 में मानव मिशन भेजा जाएगा. इस पूरे मिशन की लागत 10 हजार करोड़ रुपए है. गौरतलब है कि देश के पहले अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा 2 अप्रैल 1984 में रूस के सोयूज टी-11 में बैठकर अंतरिक्ष यात्रा पर गए थे. 

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भारतीय अंतरिक्षयात्रियों के खाने का मेन्यू भी सामने आया था. जिसमें एग रोल, वेज रोल, इडली, मूंग दाल हलवा और वेज पुलाव शामिल थे. यह खाना मैसूर स्थित डिफेंस फूड रिसर्च इंस्टीट्यूट के द्वारा तैयार किया जा रहा है. अंतरिक्ष में खाना गर्म करने के लिए ओवन की व्यवस्था भी डीआरडीओ ही कर रहा है. अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पानी और जूस के साथ-साथ लिक्विड फूड की भी व्यवस्था रहेगी. 

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