भारत से तनाव के बीच चीन ने अगस्त के अंत में लाइव फायर टैक्टिकल ट्रेनिंग के दौरान मध्यम रेंज की मिसाइल दागी. इस दौरान वह अपनी फौज के जवानों को सिखाना चाहता था कि कैसे इस मिसाइल को लॉन्च किया जाता है. लेकिन चीन शायद ये भूल गया कि भारत के पास ऐसी मिसाइलों का पूरा जखीरा है, जो आकाश से अंतरिक्ष तक सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं. ये मिसाइलें दुश्मन के हमले को जमीन से कई किलोमीटर ऊपर हवा में ही नष्ट कर सकती हैं. यानी भारत का एयर डिफेंस सिस्टम चीन से बेहतर है.
भारत के पास एयर डिफेंस के लिए दो सिस्टम हैं. इसमें दो हिस्से हैं - एयर डिफेंस ग्राउंड एनवायरनमेंट सिस्टम (ADGES) और बेस एयर डिफेंस जोन्स (BADZ). ADGES में राडार कवरेज, डिटेक्शन और इंटरसेप्शन होता है. BADZ में राडारों के साथ मिसाइलों का कनेक्शन, नेविगेशन, हमला और एक्टिव रिस्पॉन्स की गतिविधियां शामिल होती हैं. आइए जानते हैं कि भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है.
भारत के पास एयर डिफेंस सिस्टम के तहत दुश्मन पर हमला करने और बचाव के लिए दो मिसाइल डिफेंस प्रणाली है. पहली है बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और दूसरी है क्रूज मिसाइल डिफेंस. बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में दो इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम हैं. पहली पृथ्वी एयर डिफेंस (Prithvi Air Defence - PAD) और एडवांस्ड एयर डिफेंस (Advanced Air Defence - AAD). PAD ज्यादा ऊंचाई पर मार करने के लिए है, जबकि AAD कम ऊंचाई हमला करने के लिए है.
दो स्तर का हवाई रक्षा कवच होने से फायदा ये होता है कि आप अपनी तरफ आ रही 5000 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल को भी हवा में ध्वस्त कर सकते हैं. एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम रखने वाला भारत दुनिया का चौथा देश है. इससे पहले अमेरिका, रूस और इजरायल ये तकनीक बना चुके हैं. चीन या पाकिस्तान के पास ऐसे सिस्टम नहीं हैं. 6 मार्च 2009 को भारत ने दुश्मन मिसाइल को हवा में 75 किलोमीटर ऊपर ही मार गिराया था. यह भारत के एयर डिफेंस सिस्टम का एक सफल परीक्षण था.
6 मई 2012 को अचानक एक दिन कहा गया कि इस सिस्टम का पहला फेज पूरा हो चुका है. बेहद कम समय में एयर डिफेंस सिस्टम यानी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस दिल्ली और मुंबई में तैनात किया जा सकता है. यह कवच दिल्ली और मुंबई को 2000 किलोमीटर रेंज वाली दुश्मन मिसाइल से बचाएगी. दुश्मन मिसाइल को हवा में नष्ट कर दिया जाएगा. बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस में पृथ्वी मिसाइल का उपयोग किया गया है. इस मिसाइल के कई वैरिएंट हैं जो 150 से लेकर 600 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम हैं.
पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने पृथ्वी बैलिस्टिक मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को विकसित किया था. इसके अलावा हवाई हमले से बचने के लिए बनाए गए इस सिस्टम में धनुष और अग्नि मिसाइलें भी शामिल हैं. धनुष मिसाइल की रेंज 350 से 750 किलोमीटर है. अग्नि मिसाइल अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल है. इसकी रेंज 700 से 12 हजार किलोमीटर है. यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है.
भारत ने अपने आसमान की सुरक्षा के लिए इजरायल Arrow एयर डिफेंस सिस्टम का एक स्क्वॉड्रन तैनात किया है. इसमें S-300 PMU मिसाइल तैनात है. यह एक एंटी-टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल स्क्रीन है. भारत ने रूस ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी 5.4 बिलियन डॉलर में खरीदा है. वह भी जल्द ही भारत को मिल जाएगा. इसके बाद दुश्मन देश भारत पर हमला करने से पहले सोचेंगे.
अब आता है दूसरे स्तर पर क्रूज मिसाइल डिफेंस (Cruise Missile Defence). यह मिसाइल सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले दुश्मन विमानों, मिसाइलों, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर को मार गिराने में सक्षम होता है. भारत ने AAD मिशन के तहत इंटरसेप्टिंग क्रूज मिसाइल सिस्टम भी बनाया है जो परमाणु हथियार लेकर हमला करने आ रही मिसाइलों को मार गिराएगा. इसमें मदद करने के लिए भारत इजरायल से और अवॉक्स विमान खरीदने जा रहा है. ये विमान आसमान में उड़ते हुए दुश्मनों के हवाई हमले की जानकारी देता है. जिससे ग्राउंड स्टेशन एक्टिवेट हो जाता है.
सिर्फ इतना ही नहीं भारत के पास अंतरिक्ष से हमला होने की स्थिति में भी दुश्मन को मात देने की क्षमता है. आपको याद होगा कि पिछले साल मार्च 2019 में भारत ने एक मिसाइल लॉन्च करके अंतरिक्ष में अपने ही पुराने सैटेलाइट माइक्रोसैट-आर को मार गिराया था. यह एक सफल परीक्षण था अंतरिक्ष से होने वाले हमलों को खत्म करने का. इसमें पृथ्वी डिफेंस व्हीकल मार्क-2 का उपयोग किया गया था. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑपरेशन शक्ति नाम दिया था. इस मिसाइल ने 10 किलोमीटर प्रति सेकेंड यानी 36 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से टारगेट पर हमला किया था. यह मिसाइल 1200 किलोमीटर की ऊंचाई तक हमला कर सकती है.