मुलियील का कहना है कि चूंकि मौतें काफी बड़े क्षेत्रफल में फैली होंगी इसलिए त्रासदी की असल तस्वीर अगर दिखेगी भी तो काफी देरी से. वहीं, ग्रामीण इलाकों में काफी लोग खुद पर लांछन लगने के डर से भी लक्षण छिपाने की कोशिश करेंगे. रोज मजदूरी करने वालों को डर होगा कि लक्षण पता चलने पर उनका काम छूट सकता है. वहीं, भारत के 80 फीसदी डॉक्टर और 60 फीसदी हॉस्पिटल शहरी इलाकों में ही हैं. यानी ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी है जिसकी वजह से भी गांवों में कोरोना का रूप शहरों से अलग हो सकता है.