भारत अगले दो दशकों में ऊर्जा की बढ़ती मांग का मुख्य चालक होगा. यानी यहां ऊर्जा की मांग में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी. इस मांग के साथ ही भारत यूरोपीय संघ को पीछे छोड़ते हुए ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बन जाएगा. (All Photos: File Photo)
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की ऊर्जा खपत लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है. IEA ने मंगलवार को जारी अपने इंडिया एनर्जी आउटलुक 2021 में इस बारे में विस्तार रूप से बताया है. अब भारत एक सौर ऊर्जा क्रांति के युग में भी प्रवेश कर रहा है, जो आने वाले समय में ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत के रूप में कोयले को पीछे छोड़ देगा.
सौर ऊर्जा वर्तमान में देश की बिजली आपूर्ति का कुल 4 प्रतिशत है. लेकिन 2040 तक ऐसा अनुमान है कि यह आकड़ा 18 गुना तक बढ़ जाएगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी एमिटर, भारत की ऊर्जा मांग अगले दो दशकों में किसी भी अन्य राष्ट्र की तुलना में अधिक बढ़ जाएगी.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत यूरोपीय संघ को पीछे छोड़ते हुए ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बन जाएगा. इस समय चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाद भारत चौथा सबसे बड़ा वैश्विक ऊर्जा उपभोक्ता है.
ऊर्जा एजेंसी का यह भी मानना है कि मौजूदा नीतियों के तहत भारत का उत्सर्जन भी इस अवधि के दौरान 50% बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन भारत की आबादी के हिसाब से प्रति-व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से काफी कम होगा.