देश की सामरिक सुरक्षा को मजबूती देने वाले आकाश मिसाइल सिस्टम को सरकार अब दूसरे देशों को निर्यात करेगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. सरकार कैबिनेट स्तर पर पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर आकाश मिसाइल सिस्टम की वो कौन सी खासियत है जिसने दूसरे देशों को भी इसे खरीदने के लिए आकर्षित किया है.
सबसे पहले बता दें कि आकाश मिसाइल प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी है और भारत में ही इसका विकास किया गया है. इसके 96 फीसदी पार्ट्स भी पूरी तरह भारतीय हैं. आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जिसकी रेंज 25 किलोमीटर है. ये वही मिसाइलें हैं जिसे कुछ हफ्ते पहले भारत ने टेस्ट किया था. भारतीय सेना के लिए इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है.
यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई मिसाइल प्रणाली है. यह लड़ाकू जेट, क्रूज मिसाइल, ड्रोन और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर सटीक निशाने के साथ हमला करने में सक्षम है.आकाश मिसाइल ब्रह्मोस की तरह सुपरसॉनिक मिसाइल है, जिसकी अधिकतम रफ्तार 2.5 मैक (3,087 किलोमीटर प्रति घंटा) है. यह मीडियम रेंज मिसाइल है, जो 25 किलोमीटर तक मार कर सकती है.
इस हिसाब से मिसाइल में 10 किमी प्रति सकेंड से ज्यादा की रफ्तार को संभालने के लिए इसमें उच्च तकनीक वाले मल्टी स्टेज इंटरसेप्टर को कन्फिगर किया गया है. इसे बनाने में देश के करीब 150 वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई थी. आकाश मिसाइल को भारतीय थेल सेना, वायु सेना और नौ सेना की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग तैयार किया गया है.
कमांड गाइडेंस सिस्टम के साथ यह 60 किलो तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम है. यह किसी भी मौसम में दुश्मन पर हमला कर सकती है. इस मिसाइल का पहला परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर रेंज से साल 2017 में किया गया था. इस मिसाइल की कामयाबी के बाद भारत को जमीन से हवा में मार करने वाली तकनीक हासिल हो गई थी.
साल 2014 में मोदी सरकार ने डीआरडीओ को इस मुश्किल प्रोजेक्ट पर काम करने का आदेश दिया था जिसके बाद साल 2017 में सफलता मिली. इसपर प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह कार्रवाई किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि देश की क्षमता को परखने के लिए थी.